Tuesday, September 17, 2019 01:54 PM

चंडीगढ़ में छाए हिमाचल के व्यंग्यकार

पंजाब-हिमाचल-हरियाणा-उत्तर प्रदेश-दिल्ली के व्यंग्यकारों की सजी महफिल, सुनाई एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां

ऊना -ट्राइसिटी चंडीगढ़ में आयोजित व्यंग्य की महापंचायत में हिमाचल प्रदेश के व्यंग्यकारों की धूम रही और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से व्यंग्यकार इस आयोजन में पहुंचे। पहली बार आयोजित व्यंग्य के इस बड़े कार्यक्रम में पांच राज्यों-पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश  व दिल्ली  के अलावा के चंडीगढ़ के व्यंग्यकारों का जमावड़ा लगा और यह व्यंग्य पंचायत कल दोपहर अढ़ाई बजे से शुरू होकर रात तक चली। इसमें विसंगतियों पर तीखे तंज भी कसे गए और व्यंग्य लेखन पर गंभीर चर्चा भी हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन माध्यम साहित्यिक संस्थान के तत्त्वावधान में व्यंग्यकार गुरमीत बेदी के संयोजन में किया गया। देश के वरिष्ठतम व्यंग्यकार व आलोचक सुभाष चंदर ने इस कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की जबकि प्रमुख व्यंग्यकार व अट्हास पत्रिका के प्रमुख संपादक अनूप श्रीवास्तव व साहित्यकार राम किशोर उपाध्याय कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल कपूर ने की। कार्यक्रम का संचालन गुरमीत बेदी ने किया। सुभाष चंदर ने कहा कि व्यंग्यकार के पास भाषा, शिल्प और विसंगतियों को पकड़ने की क्षमता होना जरूरी है। उन्होंने कहा व्यंग्य लिखना कोई सिखा नहीं सकता। जो हमारे आसपास घट रहा है, उस पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है। सुभाष चंदर ने कहा कि व्यंग्य के नाम पर आज सपाटबयानी चरम पर है। व्यंग्य किसी घटना का आख्यान नहीं है और न ही किसी विसंगति पर प्रतिक्रिया भर है। रचना में व्यंग्य लाना है तो शैलीय उपकरणों को समृद्ध करना होगा। रचना ऐसी हो जिसमें देश, काल, परिवेश हों और उसे रिक्शेवाले से लेकर प्रबुद्ध प्रोफेसर तक सभी समझ जाएं। सुभाष चंदर ने कहा व्यंग्यकार अपनी रचनाओं के जरिए विसंगतियों के खिलाफ माहौल बनाने का काम करते हैं और गहराई तक जाते हैं। उन्होंने युवा व्यंग्यकारों को सलाह दी कि वे वरिष्ठ व्यंग्य लेखकों को पढें, उन्हें समझें और चीजों को पकड़ने का हुनर सीखें। वरिष्ठ व्यंग्यकार और अट्टहास पत्रिका के प्रमुख संपादक अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि व्यंग्यकार की समाज में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। वह चाहे किसी सामाजिक परिवर्तन को करने में सफल न हो लेकिन वह समाज की आत्मा को झकझोरने में पूर्णतया सक्षम होता है। उन्होंने हिमाचल, पंजाब, हरियाणा व ट्राई सिटी चंडीगढ़ के व्यंग्य कारों को अट्टहास पत्रिका के साथ जुड़ने का आह्वान किया और यह भी कहा कि व्यंग्य की गोष्ठियां हर माह नियमित रूप से होनी चाहिए और व्यंग्यकारों को समाज की विसंगतियों को निर्भीक होकर रेखांकित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह पहली गोष्ठी देखी है जो पूर्णतया व्यंग्य पर केंद्रित रही और दोपहर से लेकर रात तक चली। राम किशोर उपाध्याय ने कहा कि व्यंग्य लेखक से साहित्य को बड़ी अपेक्षाएं हैं। यह सर्वविदित है कि साहित्य से दुनिया नहीं बदलती लेकिन पाठक को यह सोचने पर विवश कर देती है कि यह दुनिया कैसी है और वह इस समाज को ठीक करने के प्रयास में जुट जाता है। उन्होंने कहा कि व्यंग्यकार के पास ऐसा शिल्प होना चाहिए जो उसकी बात को संप्रेषित कर सके। व्यंग्य की इस महापंचायत में  हिमाचल से  राजेंद्र राजन, अशोक गौतम, अजय पाराशर, मृदुला श्रीवास्तव, प्रभात कुमार, कुलदीप शर्मा, मेला राम शर्मा, राजीव त्रिगर्ती, वीरेंद्र शर्मा, पवन चौहान, अजय श्रीवास्तव व रतन चंद निर्झर, पंजाब से लाजपत राय गर्ग, सुभाष शर्मा, सरदार सेवी रायत,  हरियाणा से  जसविंदर शर्मा, ट्राई सिटी चंडीगढ़ से प्रेम विज, मदन गुप्ता सपाटू, अशोक नादिर, भूपिंद्र सिंह, सुभाष शर्मा, रतन चंद, डा. दलजीत कौर, नीलम कुमारी, गुरदर्शन सिंह, बलवंत ने शिरकत की। इस अवसर पर इन पांच राज्यों के व्यंग्यकारों की रचनाओं पर केंद्रित व्यंग्य पत्रिका अट्टहास के विशेषांक का विमोचन भी किया गया, जिसका अतिथि संपादन गुरमीत बेदी ने किया है।