Tuesday, September 17, 2019 01:47 PM

चंदा मामा को निहारने की इच्छा से पहुंची थी इसरो

चन्द्रयान-2 की असफलता के बावजूद दोगुने जोश के साथ लौटी अर्पिता सूद

शिमला -अब कौन कहता है कि बेटियां किसी से कम है बेटियों के हर क्षेत्र में उमदा प्रदर्शन को देख कर हर कोई बेटियों की बौद्धिक कुशाग्रता का कायल है। आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता पिता का नाम रोशन कर रही है। आठवीं कक्षा की छात्रा अर्पिता सूद हिमाचल के उन दो सौभाग्यशाली छात्रों में से है जिन्हें चन्द्रयान-टू की सफलता का गवाह  बनने का मौका मिला। भले ही वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों के बावजूद मिशन चन्द्रयान-टू असफल हुआ और चांद को छू पाने की चाहत अधूरी रही। लेकिन  अर्पिता सूद ने बताया कि वह निराश नहीं हुुई है। उन्हें चन्द्रयान-टू को प्रधान मत्री के साथ देखने का मौका मिला। साथ ही इसरो में बड़े-बड़े वैज्ञानिकों से मिलने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि उन्हें वहां बहुत कुछ सीखने को मिला। इस मिशन के 95 प्रतिशत सफतला से अर्पिता बहुत खुश है। और अगले चन्द्रयान मिशन के लिए अभी से ही तैयारी में जुट गई है। बता दे कि अर्पिता सूद दयानंद पब्लिक स्कूल कक्षा आठवीं की छात्रा है। आठवीं कक्षा की छात्रा होने के साथ-साथ उनके इरादे काफी मजबूत है। वह बडे़ होकर वैज्ञानिक बनना चाहती है। इसके लिए वह अभी से ही खूब पढ़ाई कर रही है।  बता दे कि अर्पिता को इसरों में जाने का मौका  चन्द्रयान क्विज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद मिला है। इसके बाद ही उन्हें इस मिशन को प्रधान मत्री नरेन्द्र मोदी के साथ देखने का मौका मिला है। हिमाचल से मात्र दो होनहार छात्रों ने इस प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन किया जिनमें से एक तो अर्पिता रही व दूसरा शोमिल शर्मा दानोघाट के छात्र का चयन हुआ है। दोनों ही छात्राएं  चन्द्रयान-2 को देखने के लिए  हुए चयन को लेकर काफी उत्सुक थी। इन दोनों छात्राओं का कहना है कि वह अगली बार फिर  इस प्रतियोगिता में जीत हासिल कर  इसरो में जाएगी और दौबारा इस मिशन को सफल होते देखेगी। वहीं अर्पिता की माता अंजू सूद ने बताया कि वह अपनी बेटी की इस कामयाबी से बहुत गर्व महसूस कर रही है।