चार्जशीट आईएएस अधिकारी को क्लीनचिट

शिमला- चौपाल में स्ट्रांग रूम से छेड़छाड़ के आरोपी आईएएस अधिकारी की चार्जशीट ड्रॉप कर दी गई है। चार्जशीट ड्रॉप होने के साथ ही अधिकारी को सरकार ने भी क्लीन चिट दे दी है। लोकसभा चुनाव के दौरान उक्त अधिकारी को सरकार ने चार्जशीट कर दिया था, जिसके आदेश चुनाव आयोग ने दिए थे। चुनाव आयोग के कहने पर इस मामले में सरकार ने कार्मिक विभाग को जांच के आदेश दिए थे। कार्मिक विभाग ने जांच करवाई और जांच कमेटी ने उक्त अधिकारी को क्लीन चिट दी है। आईएएस अधिकारी मुकेश रिपसवाल चौपाल के एसडीएम थे और अब सरकार ने उन्हें सचिवालय में विशेष सचिव शिक्षा व ऊर्जा का जिम्मा सौंप रखा है। स्ट्रांग रूम खोलने के मामले में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था। किसी शिकायत पर उनके द्वारा उक्त अधिकारी को वहां से तबदील करने के आदेश हुए थे, जिस पर सरकार ने तत्काल तबादला कर दिया। इस मामले में हुई जांच में जांच कमेटी ने पाया है कि आईएएस अधिकारी ने जानबूझकर कोई गलती नहीं की थी, यह अनजाने में हुई है। उनकी इंटेंशन नियमों को तोड़ने की नहीं थी, परंतु ऐसा हो गया। अब जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी है। क्योंकि आईएएस अधिकारी का अभी लंबा कैरियर है और वह युवा हैं, लिहाजा सरकार ने भी उन्हें राहत प्रदान कर दी है, जिससे मुकेश रिपसवाल की परेशानी फिलहाल दूर हो चुकी हैं। हालांकि मामला अभी भी चुनाव आयोग के संज्ञान में है, जिसकी ओर से कोई दूसरा आदेश नहीं आया है। इसी मामले में जहां चौपाल के तत्कालीन एसडीओ को वहां से हटाया गया था, वहीं शिमला जिला के तत्कालीन जिलाधीश को भी तबादला तुरंत कर दिया गया था। चुनाव तक डीसी शिमला भी तबदील किए गए, लेकिन चुनाव के बाद उन्हें वापस शिमला में ही जिलाधीश की कुर्सी सौंप दी गई। क्योंकि मामला चुनाव आयोग के नियमों की उल्लंघना का माना गया, लिहाजा सरकार ने आयोग के निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई अमल में लाई थी। अब जिलाधीश को वापस वह कुर्सी दे दी गई है, वहीं दूसरे आईएएस अधिकारी की चार्जशीट को भी ड्रॉप कर दिया गया है।

जानबूझ कर नहीं किया

पहली बार प्रदेश में चुनाव आयोग के निर्देशों पर इस तरह की कार्रवाई अमल में लाई गई थी। जांच कमेटी ने साफ किया है कि जानबूझकर किसी तरह का काम नहीं किया गया है, तो सरकार भी इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना चाहती थी।

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