चिंतनीय है शिक्षक का चारित्रिक पतन

प्रो. सुरेश शर्मा

लेखक, नगरोटा बगवां से हैं

हमारे समाज में शिक्षक को पिता के रूप में देखा जाता है। प्राचीनकाल से ही उसको ब्रह्मा, विष्णु व महेश जैसी उपमा दी गई है। शिक्षक को श्रेष्ठतम माना गया है। विद्वता के साथ-साथ उसे सभी मानवीय तथा चारित्रिक गुणों से संपन्न होना चाहिए, लेकिन अगर वही शिक्षक शिष्य-शिक्षक संबंधों की सीमाओं को तार-तार कर परस्पर विश्वसनीयता की हत्या कर दे, तो यह बहुत ही चिंतनीय, निंदनीय और शर्मनाक विषय है। यह किसी भी प्रकार से व्यावसायिक आचार-व्यवहार की सीमाओं से परे है तथा छात्र-अध्यापक संबंधों की परस्पर विश्वास, पवित्रता व अध्यापक की गरिमा के बिलकुल विपरीत है...

अध्यापक अनुकरणीय एवं उदाहरण होता है। न केवल शिक्षण संस्थानों में बल्कि समाज में सभी उसका  अनुकरण एवं अनुसरण करते हैं। वह भविष्य निर्माण के लिए सभी को नेतृत्व प्रदान करता है। उस पर समाज निर्माण का दायित्व होता है। अध्यापक को सृजनकर्ता के रूप में स्वीकार किया जाता है। उस पर विश्वास किया जाता है परंतु अगर उसी शिक्षक के चारित्रिक पतन की इबारत समाचार पत्रों की सुर्खियां बन जाए तो मामला बहुत ही गंभीर है। हमारे समाज में शिक्षक को पिता के रूप में देखा जाता है। प्राचीनकाल से ही उसको ब्रह्मा, विष्णु व महेश जैसी उपमा दी गई है। शिक्षक को श्रेष्ठतम माना गया है। विद्वता के साथ-साथ उसे सभी मानवीय तथा चारित्रिक गुणों से संपन्न होना चाहिए, लेकिन अगर वही शिक्षक शिष्य-शिक्षक संबंधों की सीमाओं को तार-तार कर परस्पर विश्वसनीयता की हत्या कर दे, तो यह बहुत ही चिंतनीय, निंदनीय और शर्मनाक विषय है। यह किसी भी प्रकार से व्यावसायिक आचार-व्यवहार की सीमाओं से परे है तथा छात्र-अध्यापक संबंधों की परस्पर विश्वास, पवित्रता व अध्यापक की गरिमा के बिलकुल विपरीत है। अभी हाल ही में जिला शिमला के रोहडू़ उपमंडल के एक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में छात्राओं के साथ उसी पाठशाला के अध्यापक द्वारा हुई छेड़छाड़ व अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। अध्यापक के खिलाफ  यह शिकायत एक या दो नहीं बल्कि आठ छात्राओं द्वारा दर्ज करवाई गई है। छात्राओं, अभिभावकों द्वारा मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन तथा गुडि़या हेल्पलाइन पर इस संदर्भ में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ  आईपीसी की धारा 354 ए तथा पोस्को एक्ट के अधीन मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी शिक्षक फरार है तथा पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए ढूंढ रही है। इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आना  न केवल एक अध्यापक के लिए बल्कि शिक्षा और शिक्षक समाज के लिए शर्मनाक है। यह बात भी ध्यान देने वाली है कि आरोपी शिक्षक को हिमाचल प्रदेश सरकार से राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार तथा महामहिम राष्ट्रपति से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। छेड़छाड़ का यह मामला उच्च स्तरीय सम्मान प्राप्त शिक्षक के लिए, शिक्षक समाज तथा शिक्षा विभाग के लिए गंभीर विषय है। यह प्रकरण सरकार व विभाग द्वारा शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर भी कई प्रश्न तथा संदेह पैदा करता है। शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे प्रकरण परस्पर विश्वास को तोड़ते हैं क्योंकि ऐसी घटनाओं से एक व्यक्ति को नहीं बल्कि संपूर्ण शिक्षक समाज को इस तरह के घृणित कार्यों के लिए अपमानित होना पड़ता है। ऐसी घटनाएं अमर्यादित आचरण की श्रेणी में आती हैं तथा घोर निंदनीय हैं। शिक्षा विभाग को भी अपने शिक्षक प्रशिक्षण तथा पुनश्चरय कार्यक्रमों में नैतिकता, व्यावसायिक आचार-व्यवहार, कार्य स्थलों पर आचरण, छेड़छाड़, आईपीसी की विभिन्न धाराओं तथा पोस्को एक्ट आदि कानूनों की जानकारी को महत्त्वपूर्ण विषय बनाना चाहिए ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अपने कार्यक्षेत्र की नवीन जानकारी के साथ अध्यापकों को संस्थान तथा समाज में रहने तथा व्यवहार की सामान्य जानकारी मिल सके। इस संदर्भ में शिक्षण संस्थानों में बहुत से मामले व्यक्तिगत दुश्मनी अथवा पूर्वाग्रह से भी प्रेरित होते हैं। बहुत से लोग किसी व्यक्ति विशेष से अपनी दुश्मनी के लिए आरोप भी लगा देते हैं। ऐसे में यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है कि केवल दुश्मनी या बदले की भावना के  उद्देश्य से कानून का दुरुपयोग भी नहीं होना चाहिए क्योंकि दुर्भावना से ग्रसित होकर किसी व्यक्ति की मानहानि होने पर उसकी भरपाई आसानी से नहीं हो सकती। अध्यापकों को अपने मान-सम्मान, चरित्र, आचरण तथा सामान्य गतिविधियों के लिए सदैव सचेत रहना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में बच्चों तथा समाज में लोगों की दृष्टि हमेशा अध्यापक पर रहती है। बढ़ती हुई प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा संचार माध्यम के युग में तो कार्य स्थलों में और भी सावधान रहने की आवश्यकता है। शिक्षकों को विद्यार्थियों से सीमा में रहकर प्रेम पूर्वक व्यवहार करना चाहिए तथा स्वयं को एक कुशल व्यवसायी के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। निश्चित रूप से इस तरह की गंदी व घिनौनी मानसिकता से उत्पन्न घटनाएं निंदनीय, चिंतनीय तथा अक्षम्य हैं। अध्यापकों को अपने आप को बच्चों व समाज के समक्ष उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि सभी उसका अनुकरण, अनुसरण कर सकें। आशा की जाती है कि छात्राओं द्वारा उजागर किए गए इस प्रकरण में आरोपी शिक्षक जांच की अग्नि में तप कर कुंदन बनकर अपने आप को साबित करेगा तथा सरकार व हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग भी इस गंभीर मामले में किसी निर्णय तक पहुंचेगा। छात्राओं तथा उनके अभिभावकों को न्याय मिलेगा। शिष्य-शिक्षक व अभिभावक के संबंधों की प्रगाढ़ता तथा परस्पर विश्वास बना रहे। इसी में शिक्षक, शिक्षा तथा समाज का हित है।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक