छप्पर फाड़ कृपा

निर्मल असो

स्वतंत्र लेखक

दरअसल भारतवर्ष को धार्मिक गुरु ही चला रहे हैं। मेरा यकीन तो वर्षों से रहा है, लेकिन इस बीच कई गुरु जेल में जाकर क्वारंटीन हो गए तो आज तक बाहर नहीं आए। मुझे खुद जो आसा राम बापू बताते रहे, उसका पता अब चला कि वह कितने भयंकर वायरस से लड़ते-लड़ते जेल गए ताकि संस्थागत क्वारंटीन में देश का भरोसा बढ़े। मैं बार-बार बाबा निर्मल से कृपा मांगता रहा, लेकिन वह टालते रहे। अब कहीं जाकर उन्होंने मुझ पर ‘क्षमता की कृपा’ कर दी। प्रधानमंत्री ने यूं ही बीस लाख करोड़ का पैकेज जारी नहीं किया, बल्कि यह निर्मल बाबा की हम पर हुई ‘क्षमता की कृपा’ का कमाल है। वैसे यकीन नहीं होता कि भारत में आज भी छप्पर फाड़ कृपा होती है और अचानक हमें पता चलता है कि हमारी क्षमता से कितनी बड़ी होती है दिल्ली सरकार। मेरे साथ इसी तर्क पर कुछ लोग खफा हो गए। कहने लगे वास्तव में देश की क्षमता में बाबा रामदेव का आशीर्वाद है, निर्मल बाबा का नहीं। वैसे पिछले कुछ सालों में भारतीय क्षमता को समझने के लिए बाबा रामदेव से बड़ा उदाहरण हो भी नहीं सकता। प्रधानमंत्री भी शायद इसी क्षमता से अभिभूत लोकल यानी स्वदेशी को आगे बढ़ा रहे हैं। सोचता हूं बीस लाख करोड़ की गिनती कहां से शुरू करूं। वैसे मैंने देश के विभिन्न इलाकों से लौटते मजदूरों को गिनना शुरू किया ताकि पता चले कि सन बीस के आगे कितने शून्य जोड़ दें कि क्षमता बीस लाख करोड़ की हो जाए। मैं प्रवासी मजदूरों की घर वापसी में बीस लाख करोड़ गिनने की क्षमता से जोड़ने के प्रयास में हूं, लेकिन बीच में कोई न कोई आवारा वाहन इन्हें कुचल कर मेरे गिनने की क्षमता को कमजोर कर देता है। समझ में यह नहीं आता कि जिस शिद्दत से देश की वित्त मंत्री लगातार पांच दिन बीस लाख करोड़ उठाकर हमें परोस रही थी, उसे प्रवासी मजदूर क्यों नहीं देख रहे। माना कि उनके पांव में छाले और पेट में दुर्बलता है, लेकिन बीस लाख करोड़ ऐसे घावों के सामने कभी कमजोर नहीं पड़ेंगे। यह भारतीय क्षमता ही तो है कि पांच दिन स्वयं वित्त मंत्री बताती रही हैं कि इसमें कितने शून्य जुड़ते हैं, तब कहीं जाकर बीस लाख करोड़ होते हैं। क्या इस क्षमता से अमरीका, ब्रिटेन या जर्मनी जैसे देशों के वित्त मंत्री बोल पाएंगे। है कोई विदेशी माई का लाल जो भारत के बीस लाख करोड़ पैकेज की क्षमता का अर्थ समझ ले। हम भारतीयों में यह क्षमता है कि सब समझ गए। पैदल भागते मजदूर, नौकरी से बेदखल युवा और घर बैठ गए हर भारतीय व्यापारी को अपनी-अपनी क्षमता में मालूम है कि वित्त मंत्री के आर्थिक पैकेज की क्षमता क्या है। अगर फिर भी मालूम न हो तो हर चैनल में कोई एंकर अपनी कृपा से हमें इसकी क्षमता बता रहा है। वास्तव में अब खबरिया चैनल हर समय कृपा ही तो बरसा रहे होते हैं, इसलिए अपने निर्मल बाबा की क्षमता कम हो गई। देश की क्षमता में अब हर खबर बोलती है, इसलिए मीडिया भी इतना क्षमतावान होने लगा कि उसे कृपा हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। कोरोना के सामने भारतीय कृपा अब दर्शन दे रही है, लिहाजा बीस लाख करोड़ सभी पर भारी पड़ेंगे।

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