Tuesday, January 21, 2020 11:16 AM

छह उद्योगों की 31 दवाइयां घटिया

सीडीएससीओ की जांच में गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरी हिमाचल में बनी मेडिसिन

बीबीएन - केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में हिमाचल के छह दवा उद्योगों में निर्मित दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाई हैं। जो दवाएं सब-स्टैंडर्ड पाई गई हैं, उनमें हाई बीपी, एंटीकान्वेलेंट की दवा, बैक्टिरियल इन्फेक्शन व टेपवार्म संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। सीडीएससीओ की पड़ताल में अन्य राज्यों के दवा उद्योगों में निर्मित 31 तरह की दवाएं भी सब-स्टैंडर्ड पाई गई हैं। इस फेहरिस्त में उत्तराखंड के नौ,  पंजाब के चार उद्योगों में निर्मित दवाएं, हरियाणा के दो, महाराष्ट्र के चार, आंध्रप्रदेश दो, कोलकाता दो, कर्नाटक, गुजरात, सिक्किम के दवा उद्योग में निर्मित दवा सहित चीन में निर्मित एक दवा के सैंपल भी जांच में गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं पाए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने बाजार से दो ऐसी दवाओं के सैंपल भी जांच के दौरान एकत्रित किए हैं, जिनमें दवा निर्माता के नाम तक अंकित नहीं हैं। सीडीएससीओ द्वारा जारी नवंबर माह के ड्रग अलर्ट के बाद राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण ने हरकत में आते हुए संबंधित दवा उद्योगों को नोटिस जारी कर बाजार से फेल हुए दवा उत्पादों का पूरा बैच हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा प्राधिकरण ने सबंधित क्षेत्रों के दवा निरिक्षकों को उद्योगों का निरिक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के  मुताबिक सीडीएससीओ द्वारा जारी नबंबर के ड्रग अलर्ट में हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आंध्रपदेश, हरियाणा, गुजरात के उद्योगों में निर्मित 37 दवाएं जांच के दौरान सब-स्टैंडर्ड पाई गई हैं। इस लिस्ट में हिमाचल के छह उद्योग भी शामिल हैं, ये उद्योग बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ में स्थापित हैं। दवाइयों के ये सैंपल सीडीएससीओ बद्दी, बंगलूर, अहमदाबाद, गोवा असम, कोलकाता, मिजोरम, गाजियाबाद, दिल्ली व अरूणाचल प्रदेश के ड्रग डिपार्टमेंट ने जांच के लिए जुटाए थे। सीडीएससीओ ने नबंबर में देश भर के अलग-अलग राज्यों से 1158 दवाओं के सैंपल एकत्रित किए थे, जिनमें से जांच के दौरान 37 दवाएं सब-स्टैंडर्ड पाई गई, जबकि 1121 दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर सही।

कारण बताओ नोटिस

राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण के बद्दी स्थित डिप्टी ड्रग कंट्रोलर मनीष कपूर ने बताया कि संबंधित दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें बाजार से फेल हुए दवा का पूरा स्टॉक हटाने के आदेश दे दिए गए हैं। संबंधित क्षेत्रों के दवा निरिक्षकों को इन लापरवाह उद्योगों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। प्राधिकरण ने निगरानी बढ़ाई है और माह दर माह सुधार हो रहा है।