Wednesday, November 21, 2018 06:57 AM

छोटे शेयर निवेशकों के हितों की सुरक्षा जरूरी

डा. जयंतीलाल भंडारी

लेखक, ख्यात अर्थशास्त्री हैं

चूंकि छोटे शेयरों में छोटे निवेशकों का काफी धन लगा हुआ है। अतः ऐसी तेज गिरावट की सेबी के द्वारा सख्त जांच की जानी चाहिए और सेबी के द्वारा भविष्य के लिए ऐसे कदम सुनिश्चित किए जाने चाहिए, जिससे शेयर बाजार अनुचित व्यापार व्यवहार से बच सके। शेयर बाजार को प्रभावी व सुरक्षित बनाने के लिए 9 अगस्त को लिस्टेड कंपनियों में गड़बडि़यां रोकने पर विश्वनाथन समिति ने सेबी को जो सिफारिशें सौंपी हैं, उनका क्रियान्वयन लाभप्रद होगा। खासतौर से इन सिफारिशों के तहत शेयर बाजार में धोखाधड़ी रोकने के लिए सेबी को फोन सुनने का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए...

इन दिनों देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि जिस तरह प्रतिकूल आर्थिक परिवेश में भी भारत का शेयर बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब शेयर बाजार में छोटे शेयर निवेशकों के हितों की सुरक्षा एक बड़ी जरूरत है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि इस समय जब डालर के मुकाबले रुपया 71 के स्तर तक फिसल गया है तथा देश का विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डालर से भी कम हो गया है, तब भी देश की विकास दर बढ़ रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में विकास दर 8.2 फीसदी रही। साथ ही देश का शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयां छूते हुए दिखाई दे रहा है। हाल ही में एक सितंबर, 2018 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 38700 अंकों की ऊंचाई पर पाया गया। इस ऊंचाई के पीछे कई कारण हैं। अमरीकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल का वह वक्तव्य महत्त्वपूर्ण रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि अमरीका में ब्याज दरों को बढ़ाने के बारे में धीरे चलने का रुख जारी रहेगा, ताकि अमरीका की अर्थव्यवस्था में नौकरियों में वृद्धि जारी रखी जा सके। भारत में आर्थिक स्थिरता के कारण लोग उत्पादक निवेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उनके कदम म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। देश के बैंकिंग सेक्टर, बड़ी कंपनियों और उद्योग-कारोबार की स्थिति में सुधार आने से भी शेयर बाजार में बढ़ोतरी देखी गई है। यदि हम शेयर बाजार को सेंसेक्स के आईने में देखें, तो साफ होता है कि एक साल में सेंसेक्स दुनिया भर के विकासशील देशों के शेयर बाजारों की तुलना में शानदार है।

यद्यपि विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से अपना निवेश तेजी से निकाल रहे हैं। वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका से दुनिया के शेयर बाजार लुढ़क रहे हैं तथा कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है, उसके बाद भी भारतीय शेयर बाजार का बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। दुनिया के अर्थविशेषज्ञ एकमत से यह कह रहे हैं कि दुनिया के सभी विकासशील देशों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार सबसे अधिक संभावनाएं रखता है। गौरतलब है कि इस समय देश के लोगों के कदम शेयर बाजार की ओर तेजी से बढ़ने का एक प्रमुख कारण शेयर बाजार में निवेश पर बढ़ता हुआ अच्छा रिटर्न भी है। अब तक सोने की खरीद और संपत्ति की खरीद में निवेश को विश्वसनीय निवेश माना जाता रहा है, लेकिन अब इन दोनों क्षेत्रों में निवेश कम आकर्षक हो गए हैं। इसका एक प्रमुख कारण इन दोनों क्षेत्रों के लिए टैक्स संबंधी नियमों का सख्त हो जाना भी है। पिछले 3-4 वर्षों से रियल एस्टेट में नए सरकारी नियमों की सख्ती से बेनामी संपत्तियों की खरीद-बिक्री बहुत कुछ प्रतिबंधित हो गई है। साथ ही रियल एस्टेट में 4.5 साल पहले की तरह कीमतें नहीं बढ़ रही हैं। अतः इस क्षेत्र में निवेशकों के कदम धीमे हो गए हैं। इसी तरह पिछले कुछ वर्षों में सोने पर निवेश भी पहले जितना लाभप्रद नहीं रहा है। चूंकि 2014-15 से वर्ष 2017-18 तक म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में करीब 15.20 फीसदी सालाना रिटर्न मिला है, जबकि इस अवधि में सोने से मिलने वाला औसतन रिटर्न करीब 8.5 फीसदी ही रहा है। निश्चित रूप से लगातार अच्छे रिटर्न के कारण भी म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस समय जब भारतीय शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, तब इस जश्न के साथ कुछ सावधानी भी जरूरी है।

भारतीय शेयर बाजार के ऊंचाई पर पहुंचने के मौके पर शेयर बाजार संबंधित कुछ प्रश्नों पर विचार भी जरूरी है। क्या इस समय उद्योग और कारोबार के लिए शेयर बाजार से पर्याप्त धन मिल रहा है? आम आदमी अब भी शेयर बाजार से क्यों दूरी बनाए हुए है? जो भारत जीडीपी के आधार पर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और क्रय शक्ति के आधार पर दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसकी अर्थव्यवस्था एक खरब डालर की हो, क्या वहां कुल जनसंख्या के करीब तीन फीसदी लोगों का ही निवेशक के रूप में शेयर बाजार से जुड़ना पर्याप्त है? भारतीय कारोबारियों के पास नए उद्यम शुरू करने या चालू उद्यम को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन ही नहीं है। नए फंड तक भी उनकी पहुंच नहीं है, क्योंकि बैंक अब फंसे हुए कर्ज के मामलों को देखते हुए नए ऋण देने में काफी सतर्कता बरतने लगे हैं।

ऐसे में इस संकट से निकलने का तरीका है, नए सिरे से पूंजीकरण करना। इस काम के लिए मजबूत शेयर बाजार की आवश्यकता होगी। इस तरह जहां एक ओर भारत में शेयर बाजार के आगे बढ़ने की अनुकूलताएं मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार के विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि देश में आर्थिक सुधारों के बाद अब जिस तरह से बड़े पैमाने पर शेयर बाजार में लंबे समय से सुस्त पड़ी हुई कंपनियों के शेयर की बिक्री 2008 के बाद में हाल ही के दिनों में सर्वाधिक रूप से बढ़ी है, उससे शेयर बाजार में जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे में शेयर बाजार में हर कदम फूंक-फूंककर रखना जरूरी है। शेयर बाजार की  ऊंचाई के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में छोटे निवेशकों के हितों और उनकी पूंजी की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना जरूरी है। उल्लेखनीय है कि मई, 2018 से जुलाई, 2018 के तीन महीनों में स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के शेयरों यानी छोटे शेयरों की कीमतों में  40 फीसदी से ज्यादा की जो अप्रत्याशित गिरावट आई है, उससे अनुचित व्यापार व्यवहार के उल्लंघन का संदेह पैदा होता है। चूंकि छोटे शेयरों में छोटे निवेशकों का काफी धन लगा हुआ है। अतः ऐसी तेज गिरावट की सेबी के द्वारा सख्त जांच की जानी चाहिए और सेबी भविष्य के लिए ऐसे कदम सुनिश्चित करे, जिससे शेयर बाजार अनुचित व्यापार व्यवहार से बच सके। शेयर बाजार को प्रभावी व सुरक्षित बनाने के लिए 9 अगस्त को लिस्टेड कंपनियों में गड़बडि़यां रोकने पर विश्वनाथन समिति ने सेबी को जो सिफारिशें सौंपी हैं, उनका क्रियान्वयन लाभप्रद होगा। खासतौर से इन सिफारिशों के तहत शेयर बाजार में धोखाधड़ी रोकने के लिए सेबी को फोन सुनने का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अमरीका सहित कई देशों के शेयर बाजारों में शेयर बाजार की नियामक संस्थाओं को फोन सुनने के अधिकार मिले हुए हैं। यदि सरकार भारत के शेयर और पूंजी बाजार को मजबूत बनाने की डगर पर आगे बढ़ना चाहती है, तो जरूरी होगा कि सेबी की भूमिका को और प्रभावी बनाया जाए। जरूरी है कि सेबी शेयर बाजार की गतिविधियों पर सतर्कता से ध्यान देकर अधिक स्वस्थ दिशा दे। सेबी बाजार के संदिग्ध उतार-चढ़ावों की ओर आंखें खुली रखे।

शेयर बाजारों में घोटाले रोकने के लिए डीमैट और पैन की व्यवस्था को और कारगर बनाया जाए। छोटे और ग्रामीण निवेशकों की दृष्टि से शेयर बाजार की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। जहां ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में देश में छोटे निवेशकों की तादाद तेजी से नहीं बढ़ रही है, वहीं शेयर खरीदने की गतिविधि बड़े शहरों और विकसित राज्यों में ही केंद्रित हो रही है। ऐसे में शेयर बाजार के महत्त्व को ज्यादा से ज्यादा लोगों को समझाने की जरूरत है, ताकि उनके कदमों को शेयर बाजार की ओर मोड़ा जा सके। आशा की जानी चाहिए कि सरकार के बढ़ते हुए आर्थिक सुधारों और शेयर बाजार में धोखाधड़ी रोकने के नए प्रयासों के कारगर क्रियान्वयन के बाद ही बड़े निवेशकों के साथ-साथ छोटे निवेशक भी भारतीय शेयर बाजार में अपने कदम मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। इससे शेयर बाजार में सच्ची चमक दिखाई देगी, साथ ही भारतीय शेयर बाजार भारतीय अर्थव्यवस्था को निवेश के लिए बुनियादी आधार  देते हुए दिखाई देगा।