Tuesday, March 31, 2020 08:12 PM

जंगली पशु-पक्षी का वायरस

यह संपादकीय जागरूकता के लिए है। हमने चिकित्सा और मेडिसन के कुछ विशेषज्ञों का एक राष्ट्रीय सेमिनार सुना है, लिहाजा कुछ महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष साझा कर रहे हैं। चीन के एक हिस्से में कोरोना वायरस ने महामारी का जो कहर बरपाना था, अब वह ढलान पर है। अब वायरस का प्रभाव शांत हो रहा है, क्योंकि संक्रमण का विस्तार भी कम हुआ है, लेकिन इस वायरस का पहला उदाहरण चीन के रूप में स्थापित हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस चमगादड़, सांप आदि खाने से फैला या कोई दूसरे कारण भी थे, अभी यह स्थापना तय नहीं है, लेकिन यह जंगली जानवरों, पशु-पक्षियों के जरिए फैला वायरस है। यह वायरस पशु-पक्षियों में तो आता-जाता रहता है, लेकिन यह तीसरी बार है कि जंगल को पार कर यह वायरस उछल कर इनसान तक पहुंचा है। यदि चमगादड़ को ही इसका बुनियादी कारण मान लिया जाए, तो इनसान और चमगादड़ के बीच किस माध्यम से यह वायरस उछल कर आया है, यह भी अभी स्थापित होना है। अटकलें लगाई जा सकती हैं कि लोग चमगादड़ के कारोबार से जुड़े हों या चमगादड़ का मीट 70 डिग्री तापमान पर पूरी तरह पकाया न गया हो अथवा किसी भी संपर्क के जरिए संक्रमण लोगों की नाक, मुंह, आंख तक पहुंचा हो! बहरहाल चीन के वुहान शहर में ही अभी तक करीब 1900 लोगों की मौत हो चुकी है और 72,000 से अधिक संक्रमण के शिकार माने जा रहे हैं। चीन के अलावा, हांगकांग, ताइवान, फ्रांस, फिलीपींस में भी मौतें दर्ज की गई हैं। हालात अब भी भयावह  बने हैं। स्कूल-कालेज, कंपनियां-फैक्टिरियां और बाजार बंद हैं। चीन की अर्थव्यवस्था को 30 लाख करोड़ रुपए का चूना लग चुका है। बाजार का अभी तक का आकलन यही है। वुहान और आसपास के लोग घरों में कैद हैं। सुरक्षा और चौकसी के प्रबंध ऐसे हैं कि एक घर से तीन दिन में औसतन एक व्यक्ति ही तमाम मानकों  पर खरा उतरने के बाद बाजार तक जा सकता है। बहरहाल कोरोना वायरस का विस्तार 28 देशों तक हो चुका है, लेकिन भारत में इसकी मौजूदगी फिलहाल नगण्य है। हालांकि चीन हमारा पड़ोसी देश है। फिर भी सीमा के पार कहर है और सीमा के इस ओर शांति है। जो 550 के करीब भारतीय चीन से बच कर लाए गए थे, उन्हें मानेसर और छावला कैंपों में अलग-थलग रखा गया था। इलाज और जांच के बाद वे अपने-अपने घर लौट चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के मद्देनजर आपातकाल घोषित कर रखा है, लेकिन अब भी यह चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसकी सटीक दवा और वैक्सीन आदि कुछ भी उपलब्ध नहीं है। कोरोना से मौत की दर सार्स वायरस से चार गुना अधिक है। कोरोना का विस्तार बहुत तेजी से होता है। विशेषज्ञों ने इस वायरस से संक्रमित होने के कुछ लक्षण बताए हैं। यदि उनका यथासमय उपचार किया जाए, तो मौत को टाला जा सकता है। फिलहाल कोरोना की मृत्यु दर करीब 2.5 ही है। इस वायरस का निशाना इनसानी चेहरा ही है। यानी आंख, नाक, मुंह के जरिए ही यह वायरस तेजी से फैलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि 10 दिनों के भीतर 104 डिग्री का तेज बुखार होता है या 14 दिन के अंतराल में आप किसी संक्रमित व्यक्ति, वस्तु, स्थान के संपर्क में आते हैं अथवा आपको सूखी खांसी, बिना बलगम के भी लगातार जारी रहे तो आप कोरोना वायरस के मरीज हो सकते हैं। इस वायरस का प्रभाव यह है कि एक बीमार व्यक्ति बहुत जल्दी तीन को बीमार कर सकता है। वायरस आपस में हाथ मिलाने, संक्रमित हाथ को नाक, मुंह और चेहरे  पर बार-बार रगड़ने आदि से भी होता है, लिहाजा खांसने और जुकाम में छींकने के दौरान एहतियात बरती जाए और रूमाल या कोहनी को मरोड़ कर उसके अंदरूनी हिस्से में छींका या खांसा जाए। विशेषज्ञों ने कहा है कि हालांकि चीन के बाहर सिर्फ  तीन ही मौतें हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, चीन के बाहर 12 देशों में इनसान से इनसान में कोरोना का संक्रमण पाया गया है। इसके बावजूद भारत में इसके फैलाव की आशंका बहुत कम है। अलबत्ता कोई और वायरस फैल सकता है, लेकिन उसकी बेहतर तैयारियां की जा चुकी हैं। अब पूरे देश में वायरल लैब स्थापित की जा चुकी हैं। अब पुणे जाने की हड़बड़ी नहीं है। बहरहाल यह बेहद जानलेवा वायरस साबित हुआ है। इनसानी सभ्यता अभी ऐसे हमलों का सटीक जवाब नहीं खोज पाई है। जंगल और कुदरत से भी छेड़छाड़ के सबक हमें सीखने पड़ेंगे।