Saturday, January 25, 2020 11:36 PM

जंगल और जमीन के लिए रिकांगपिओ में रैली

रिकांगपिओ   - हिम लोक जागृति मंच किन्नौर व जिला वन अधिकार समिति किन्नौर के संयुक्त तत्त्वावधान में सोमवार को जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में किन्नौर के कई मुद्दों को लेकर विशाल रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान जंगल, जमीन हमारी है नारों के गुंजायमान के साथ रैली मुख्य बाजार से होते हुए वापस रामलीला मैदान पहुचकर जनसभा में तब्दील हुई। जनसभा को संबोधित करते हुए एक के बाद एक कई वक्ताओं ने वन अधिकार अधिनियम 2006 को लागू नहीं करने पर सरकार एवं प्रशासन को जमकर कोसा। जनसभा के बाद जिला के सभी मुद्दों को लेकर उपायुक्त किन्नौर को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। हिम लोक जागृति मंच किन्नौर के संयोजक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आरएस नेगी एवं जिला वन अधिकार संघर्ष समिति किन्नौर के अध्यक्ष जिया लाल नेगी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत जिला में 2011 से पहले 2614 व्यक्तिगत तथा 54 सामुदायिक दावे पेश किए गए थे जिनकी संख्या बढ़कर अब 3000 से ऊपर हो गया है। जिला में अब तक केवल लिप्पा गांव के 47 दावों पर निर्णय लिया गया था जिसे प्रशासन ने गैर कानूनी आधार पर नामंजूर किए है। जिला में वर्ष 2006 में 6666 नोतोड़ के मिस्ले विभाग के पास लंबित पड़ी थी जिनकी संख्या बढ़कर 10000 से अधिक हो गई है। जिला में विद्युत परियोजनाओं द्वारा जनजातीय कानूनों की पूरी तरह उलंघन की जा रही है। इन परियोजनाओं के निर्माण से जहां स्थानीय स्तर पर कई परेशानियां हो रही है वहीं चीन सिमा से सटे होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पैदा होने लगा है। जनसभा के तुरंत बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त किन्नौर को ज्ञापन सौंपना चाहा तो पुलिस सुरक्षा ने प्रतिनिधिमंडल को उपायुक्त तक पहुंचने से रोका। तहसीलदार कल्पा ने स्वंय उपायुक्त किन्नौर के उस आदेश को पड़कर सुनाया जिसमे कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल में पांच से अधिक लोगों की उपायुक्त से मिलने की इजाजत नहीं है। ऐसे में जहां इसे प्रतिनिधिमंडल ने लोकतंत्र का हत्या बताकर कोई भी सदस्यों को उपायुक्त से मिलने नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्यों ने उपयुक्त कार्यालय जाकर ऑफिसियल डायरी के माध्यम से उपयुक्त किन्नौर को ज्ञापन सौंपा। उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने कहा कि पांच लोगों को मिलने की इजाजत दी गई थी। प्रशासन की हक है कि वो प्रतिनिधिमंदल के सदस्यों की संख्या निश्चित करें। इससे पूर्व भी प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिला था जब प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य बदतमीजी से पेश आए। प्रतिनिधिमंडल के कुछ ऐसे सदस्य भी है जो सरकारी कार्य मे बाधा डालने का प्रयत्न करते है। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले ही निर्देश जारी किया था कि प्रतिनिधिमंडल के पांच सदस्यों को ही उपायुक्त कार्यालय में आने दिया जाए, ताकि सरकारी कार्य मे बाधा उत्पन्न न हो सके।