जन मंच का जमीनी आधार

विनय छींटा

लेखक, शिमला से हैं

लोकतंत्र में जनता का सरकारों पर पूर्ण नियंत्रण रहता है कि जनहितैषी कार्यों को पूर्ण करें। जनता की मांगों पर कार्य करें। वर्तमान की हिमाचल सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम जन मंच ने अनेक सवालों के जवाब भी दिए और अपनी दृष्टि भी स्पष्ट रखी। इस कार्यक्रम का पहला केंद्रीय लाभ जनता और सरकार का प्रत्यक्ष संवाद है जो बहुत कम रह गया है। सरकार और जनता का मिलन अनिवार्य होना यह जगत के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए बहुत सुखद है। सरकार का घर-घर जाना वास्तविक लोक शासन का आधार है। इस कार्यक्रम का दूसरा लाभ है कि सरकार ने जनता को यह आभास करवाया है कि सरकार आसपास है...

जन मंच प्रदेश की वर्तमान सरकार का एक मुख्य जनहितैषी कार्यक्रम है, जिसमे सरकार मौके पर जमीनी स्तर की मुख्य समस्याओं का समाधान करती है। जयराम सरकार की इस योजना इस कार्यक्रम का महत्त्व क्या है? सवाल यह है। इस कार्यक्रम का अंतिम लाभ वास्तव में जनता का हुआ या नहीं? भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतंत्र में जनता का सरकारों पर पूर्ण नियंत्रण रहता है कि जनहितैषी कार्यो को पूर्ण करें। जनता की मांगों पर कार्य करे। वर्तमान की हिमाचल सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम जन मंच ने अनेक सवालों के जवाब भी दिए और अपनी दृष्टि भी स्पष्ट रखी।

इस कार्यक्रम का पहला केंद्रीय लाभ जनता और सरकार का प्रत्यक्ष संवाद जो बहुत कम रह गया है। महीने में सरकार और जनता का मिलन अनिवार्य होना यह जगत के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए बहुत सुखद है। सरकार का घर-घर जाना वास्तविक लोक शासन का आधार है। इस कार्यक्रम का दूसरा लाभ सरकार ने जनता को यह आभास करवाया है कि सरकार आसपास है। जो असल में बहुत कम देखने को मिलता है। जन मंच के माध्यम से जनता की नीति निर्माण भूमिका में भी प्रत्यक्ष भूमिका तय होती है। सरकार ने जन मंच के माध्यम से संदेश दिया है कि सरकार जनता के बीच है। शिमला में नहीं। प्रतिनिधि लोकतंत्र में सबसे बड़ी समस्या थी कि सरकार और जनता के बीच समय-समय पर संवाद की कमी रहती थी। इस आधार पर आलोचना होती है कि वास्तव में केवल एक दिन का लोकतंत्र है। जिस दिन जनता अपने मत डालेगी। प्रश्न वाजिब भी है। यह प्रतिनिधि लोकतंत्र का एक नकारात्मक पक्ष है कि जनता के कार्य उस गति से नहीं होते जो होने चाहिए। विकास करवाने के लिए क्षेत्र की वोटिंग लिस्ट देखी जाती है कि हमारे पक्ष को कितने वोट पड़े। लेकिन  हाल ही में खत्म जन मंच के कार्यक्रम में 34,000  जन समस्यां आईं। क्या सभी भारतीय जनता पार्टी के पाले से आई यह संभव नहीं है। जन मंच की यह भी एक केंद्रीय उपलब्धि है। हाल ही में संपन्न जन मंच कार्यक्रम जिला शिमला के विकास से वंचित क्षेत्र कुपवी में जन मंच के दौरान 85 समस्याएं आई जिसमें 79 का मौके पर निवारण हुआ। अब सवाल यह कि असल में यह जो समस्याएं आइर्ं यह समाज का कौन सा वर्ग है तो इसका जवाब यह है कि यह उन लोगों की समस्याएं सुलझी जिन लोगो का सरकार और सरकार की कार्य प्रणाली से दूर-दूर तक का नाता नहीं है। जो लोग आर्थिक कमी के कारण शिमला नहीं जा पाते जो लोग समाज की मुख्य धारा से कटे हुए है। जन मंच के कारण जन सहभागिता बढ़ी है। नीति निर्माण में और विकास के स्वरूप में बदलाव आया है। पहले विकास का पैमाना सरकार और अधिकारी केंद्रित था। लेकिन अब जो वास्तविक जमीनी स्तर की समस्या है जनता जाकर अधिकारी-मंत्री को बताती है कि यह हमारे लिए बेहतर है, इस विकास पैमाने की ज्यादा जरूरत है। क्योंकि विकास निरंतर प्रक्रिया है। लेकिन क्या जरूरी है कैसा विकास पहले होना चाहिए, यह जन मंच के सहारे हो रहा है भले ही अभी इसका आकार सीमित है।

बड़े पैमाने में अभी भी वोट केंद्रित विकास है। चुनाव केंद्रित विकास है। यह बात भी किसी से छिपी नहीं है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस कार्यक्रम को बहुत मुख्यता प्रदान की है यह स्पष्ट है बड़ा प्रश्न यह है कि जन मंच के कार्यक्रम से सबसे अधिक लाभ किस वर्ग हो हुआ? इसके आंकड़े साफ  है कि समाज के उस वर्ग को जो सरकार तक नहीं जा सकता था। उस वर्ग को जो आर्थिक तंगी के कारण समस्याओं को नहीं सुलझा पाते थे। छोटी- छोटी समस्या जो असल में दिखती छोटी थी, लेकिन जनमानस पर आम जनता पर उसका प्रभाव गहरा पड़ता था। इस प्रकार की समस्याओं का समाधान मौके पर हो रहा है, घरों पर हो रहा है यह खुशी से कम नहीं। जन मंच का श्रेष्ठ आना अभी भी बाकी है। यह स्पष्ट है। लेकिन इस कार्यक्रम की भावना अत्यंत शुद्ध है। स्पष्ट है। उस पर कार्य करने की जरूरत है। लोकतंत्र में सरकार का समय-समय पर जनता से सीधा संवाद लोकतांत्रिक भावनाओं को मजबूती प्रदान करता है। लोकतंत्र को इस प्रकार के कार्यक्रमों से मजबूती मिलती है। लोकतंत्र को जमीनी आकर मिलता है। लेकिन इसमें अनेक समस्याएं भी हैं। क्या विपक्षी दल इस कार्यक्रम से सहमत है? अगर है तो क्यों अगर नहीं तो उसकी असल वजह क्या है? क्या जन मंच में केवल वैचारिक संबंधो वाले व्यक्तियों को महत्त्व मिलता है? क्या वास्तव में समस्याएं सुलझी है या केवल सरकारी आंकड़ों को सकारात्मक करने का प्रयास मात्र है? यह अभी भी चुनौती है। विपक्ष अगर कार्यक्रम का विरोध कर रहा है, तो क्या विरोध राजनीतिक है या लक्ष्यहीन है, इस बात को भी समझना पड़ेगा। तर्कों पर विरोध स्वीकार्य है। लेकिन विरोध का आधार राजनीतिक हो यह सही नहीं है। लोकतंत्र सहमति भागीदारी का शासन है। विरोधी विचार को तर्कों पर सहमति देना विरोधी विचारधारा को जन हित के उद्देश्य के लिए स्वीकार करना अच्छी सरकार के लक्षण है। जन मंच निश्चित प्रदेश की वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकती है। इसके अनेक फायदे हैं। लेकिन उसमें शर्त यह है कि इसकी मूल भावना को जिंदा रखा जाए। राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल न हो।