जब करें प्ले स्कूल का चुनाव…

बच्चों के लिए कै्रच प्रीस्कूल, प्ले स्कूल, किंडरगार्टन जैसे नामों से संचालित होने वाली संस्थाएं बदलते सामाजिक परिवेश की जरूरत बन गई हैं। कामकाजी माता-पिता आफिस आवर्स में बच्चों को उचित देखभाल के लिए ऐसी संस्थाओं में छोड़ देते हैं।

सतर्क रहें अभिभावक संचालकों की मुंह मांगी फीस  चुका कर इस बेफ्रिकी में और भी इजाफा हो जाता है, लेकिन  क्या हकीकत में उसे बेफ्रिकी मान लिया जाए? ऐसा करने वाले अभिभावक कभी ऐसी सावधानी और सतर्कता बरतने वाली चूक कर देते हैं, उन की चूक न सिर्फ  उन्हें, बल्कि उन के बच्चे के कोमल मन पर भी भारी पड़ती है।

सोच-समझ कर चुनें प्ले स्कूल

 माता-पिता को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें जैसा रूप दिया जाएगा वे वैसे ही हो जाएंगे। यदि उन के साथ प्री स्कूल में अच्छा व्यवहार नहीं किया जाएगा तो उनमें भावनात्मक व मानसिक विकृतियां आने की संभावना बढ़ जाती है। अतं: अभिभावकों को छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए। यह तय  करना जरूरी है कि जहां बच्चों को छोड़ना चाहते हैं। क्या वह बच्चों के लिए सुविधाजनक और हर तरह से सुरक्षित है।