Tuesday, July 16, 2019 09:46 PM

जय हो! नाक के बाल

अशोक गौतम

साहित्यकार

उनके पास अजब की चमचागिरी है। उनके पास गजब की चमचागिरी है, इसलिए वे आफिस में हर साहिब के नाक का बाल बड़े ही सहज भाव से हो जाते हैं। हालांकि उनके सिर के सारे बाल झड़ चुके हैं। पर अभी तक बीसियों बार नाक कटने के बाद भी उनके नाक का एक भी बाल नहीं झड़ा। असल में वे नाक के एक-एक बाल का महत्त्व भलीभांति जाने हैं। इसीलिए उन्होंने अपने सिर के बालों की कभी कतई परवाह नहीं की। वे ही कहते हैं कि वे पढ़े-लिखे हैं, सो उन्हें और कुछ पता हो या नहीं, पर ये अच्छी तरह पता है कि नाक के बाल जितने महत्त्वपूर्ण होते हैं, उतने सिर के बाल नहीं। उन्हें पता है कि मुहावरे में नाक के बाल का ही अस्तित्व है, सिर के बाल का नहीं। इसलिए भी उन्होंने सिर के सारे बाल मजे से झड़ने दिए, पर नाक का एक-एक बाल जतन से बहुत संभाल कर रखा। अपने नाक का बाल भर साहिब की नाक में लगा साहिब की नाक का बाल हो जाना, आज की तारीख में कर्त्तव्यनिष्ठता का सबसे बड़ा पैमाना है। इसलिए समझदार अपने नाक का हर बाल संभाल कर रखते हैं। उनकी पूरी केयर करते हैं, ताकि समय पड़ने पर उन्हें साहिब की नाक में लगा साहिब के भगवान से भी प्रिय हो सकें। वे साहिब की नाक के बाल हैं सो, आफिस में अपनी कर्त्तव्यनिष्ठता को लेकर तमाम मौन कर्र्त्तव्यनिष्ठों में कुख्यात हैं। वैसे साहब की नाक के बाल से बड़ा ईमानदार कोई दूसरा होता भी नहीं। होता हो, तो बनकर दिखाए, दूसरे ही पल धूल चाटता न दिखे तो कोई हैरत नहीं। पिछले हफ्ते हुआ यूं कि साहिब जी की नाक के बाल की माता जी का गोलोकवास हो गया। मां का कर्ज उतारते मां का इलाज तो वह आफिस से गायब हो करवाते ही रहे थे। कोई छुट्टी नहीं। नाक का बाल छुट्टी ले, क्यों ले? हर साहिब की नाक का बाल तो हर समय ड्यूटी पर ही रहता है, सोया-सोया भी। वह बिन छुट्टी लिए गंगाजी में स्वच्छता की संभावनाएं तलाशने के बहाने सरकारी टूअर बना मां की गंगा जी में अस्थियां विसर्जन कर आए। मां ने बहुत कहा- बेटा! अब तो अवकाश ले ले। अपने पैसों से मेरा अस्थि विसर्जन कर, ताकि मुझे तो कम से कम स्वर्ग मिले, पर वह नहीं माने, तो नहीं माने। नाक का बाल होने के बाद भी जो अपनी सी न करने से बाज आए, तो मान लेना वह नाक का बाल है ही नहीं। सिर्फ नाक का बाल होने के झूठे दावे कर रहा है। आप सबका उल्लू बनाते हुए, मेरी तरह।