Wednesday, September 18, 2019 04:46 PM

जल मार्ग से निकलता समाधान  

कर्म सिंह ठाकुर

लेखक, मंडी से हैं

हर वर्ष करीब 80 हजार नए वाहन हिमाचल प्रदेश में रजिस्टर हो रहे हैं। अधिकतर सड़कों की हालत बदतर है तथा पिछले एक दशक से कोई ज्यादा बड़ा परिवर्तन भी परिवहन व्यवस्था में देखने को नहीं मिला है। सड़कों पर भारी जाम, प्रदूषण तथा दुर्घटनाओं ने प्रदेश की जनता को झकझोर कर रख दिया है। सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक जाम तथा अनियंत्रित परिवहन व्यवस्था के कारण सड़क दुर्घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। स्कूल के बच्चे, पर्यटक तथा आम आदमी हर दिन सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं और कई घरों के दीये बुझ रहे हैं...

भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से प्रदेश की जनता का जीवन-यापन कठिन है। आवागमन का मुख्य साधन सड़क व्यवस्था ही है। प्रदेश की जनसंख्या 70 लाख के करीब है और वाहनों की संख्या 16 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। हर वर्ष करीब 80 हजार नए वाहन हिमाचल प्रदेश में रजिस्टर हो रहे हैं। अधिकतर सड़कों की हालत बदतर है तथा पिछले एक दशक से कोई ज्यादा बड़ा परिवर्तन भी परिवहन व्यवस्था में देखने को नहीं मिला है। सड़कों पर भारी जाम, प्रदूषण तथा दुर्घटनाओं ने प्रदेश की जनता को झकझोर कर रख दिया है। सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक जाम तथा अनियंत्रित परिवहन व्यवस्था के कारण सड़क दुर्घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। स्कूल के बच्चे, पर्यटक तथा आम आदमी हर दिन सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं और कई घरों के दीये बुझ रहे हैं।

सड़क दुर्घटनाओं के बहुत से कारण हो सकते हैं जिनमें प्रमुख मानवीय भूल तथा बदतर सड़कों की हालत, तकनीकी खामियां तथा लावारिस पशुओं को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन रोकथाम का कार्य भी सरकार को कानून बनाकर तथा जागरूकता के माध्यम से करना होगा। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने विधानसभा में बताया कि 1 अगस्त 2015 से 16 अगस्त 2019 के बीच 12,475 सड़क दुर्घटनाओं में 95.06 फीसदी मानवीय चूक के कारण, 51.45 फीसदी तेज रफ्तार के कारण तथा 4.50 फीसदी दुर्घटनाएं खराब सड़क व वाहनों की खराबी के कारण हुई हैं। वर्ष 2017 में 1888 सड़क हादसे हुए जिनमें 779 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। 2019 में जनवरी से लेकर अब तक 1753 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 658 लोगों की मृत्यु हुई है।

छोटे से प्रदेश में इतने ज्यादा लोगों की मृत्यु सड़क हादसों के कारण होना चिंतनीय विषय है। सड़क दुर्घटनाओं तथा बढ़ते ट्रैफिक जाम के कारण हिमाचल से पर्यटक भी मुंह मोड़ रहे हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 3 सालों के दौरान अप्रैल से लेकर जून 2018 तक हिमाचल में आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में पर्यटन के अन्य मार्गों पर विचार करना जरूरी हो गया है। जलमार्ग को तंदुरुस्त करना प्रदेश के लिए बहुत अनिवार्य हो गया है। विधानसभा में माननीय परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर द्वारा बताया गया कि 25 मार्च 2016 को केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए चार राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित किए थे। व्यास नदी पर तलवाड़ा बैराज से हरेक डैम, चिनाब नदी पर चिनाब सड़क ब्रिज से भद्रकला ब्रिज तक, रावी नदी पर गंधियार बांध से रणजीत सागर डैम तक, सतलुज नदी पर सुन्नी सड़क ब्रिज से हरिके बांध तक 4 राष्ट्रीय जलमार्ग बनाए जाएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा जलमार्ग बनाने की प्रक्रिया के लिए मैरिटाइम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड से परामर्श रिपोर्ट तैयार करवाई है। विशेषज्ञों व डीपीआर के अनुसार भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को अनुदान के लिए एक प्रस्ताव भी भेजा है। अनुदान राशि मिलने के बाद इन पर कार्य शुरू किया जाएगा। इसके अलावा भाखड़ा बांध, कोल बांध,चमेरा बांध में भी जलमार्ग बनाने की प्रक्रिया जारी है। जलमार्ग से हिमाचल प्रदेश की जनता को सड़कों से वाहनों के बोझ से निजात मिलेगी, वहीं पर्यावरण प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी, नवीन पर्यटक स्थल तथा रोजगार के साधन सृजित होंगे। प्रकृति प्रेमी भी जलमार्गों का आनंद लेने के लिए प्रदेश का दीदार करेंगे। इस तरह के जनकल्याणकारी कार्यों के लिए विपक्ष को भी सरकार का पूर्ण सहयोग करना चाहिए। आपसी मतभेद तथा राजनीतिक द्वेष तो पिछले 7 दशकों से राजनीति पर हावी है।

राजनीतिक नफा-नुकसान पर प्रतिक्रियाएं राजनीतिक दलों द्वारा इतिहास में भी की हैं, वर्तमान में भी हो रही हैं और भविष्य में भी होती रहेंगी, लेकिन जनकल्याण से जुड़े सीधे मुद्दों पर नीति-निर्माताओं तथा सरकार को एकता दिखानी होगी। जल मार्गों के अलावा हवाई मार्गों पर भी प्रदेश में उन्नति होनी चाहिए। मानसून सत्र के द्वितीय कार्य दिवस में माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर ने 11 नए हेलिपैड तथा 6 हेलीपोर्ट के निर्माण का ऐलान किया। वर्तमान में प्रदेश में 64 हेलिपैड है, प्रदेश में गगल, भुंतर तथा जुब्बड़हट्टी बड़े हवाई अड्डे हैं। जिसमें प्रदेश सरकार गगल हवाई अड्डे को विकसित करने की रूपरेखा बना रही है। प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की समय पर पहुंच के लिए हवाई मार्गों का विकास करना समय की मांग है।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था करीब 52 हजार करोड़ की ऋणी है। प्रदेश में बेरोजगारों की फौज 8 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। ऐसे में औद्योगिक निवेश तथा पर्यटक क्षेत्र ही प्रदेश को बचा सकते हैं। पिछले कुछ महीनों से माननीय मुख्यमंत्री तथा उनकी टीम विभिन्न देशों तथा समस्त भारत के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि धर्मशाला में प्रस्तावित राइजिंग निवेश सम्मेलन में सरकार 85,000 करोड़ के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। अब सरकार को पर्यटन क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान देना होगा ताकि पर्यटन से युवाओं को जोड़कर रोजगार दिया जाए तथा प्रदेश की माली आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सके।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे। 

-संपादक