Wednesday, December 11, 2019 05:16 PM

जातिवाद को छोड़कर आम लोगों के मुद्दांे पर लड़ें चुनाव

भारत के महापर्व लोकसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस महापर्व में हिमाचल के मतदाता 19 मई को आहुति डालेंगे, लेकिन महापर्व में जाति, धर्म, संप्रदाय की आड़ लिए इसे खूब खंडित भी किया जाता है। ऐसा कोई मौका नहीं, जब राजनीतिक दल जाति के समीकरण नहीं देखते। चुनावों में जातिवाद पर जब ‘दिव्य हिमाचल’ ने जनता की नब्ज टटोली तो उन्होंने कुछ यूं बयां की मन की बात...  आदित्य सोफ्त,सोलन

मुद्दों पर लड़ा जाए चुनाव तो बने बात

युवा साहिल सिंगला का कहना है कि जाति को चुनाव का मुद्दा बनाना गलत है। चुनावों को जाति से अलग रखना चाहिए। क्योंकि चुनाव देश हित के लिए होता है। इसलिए चुनाव के लिए हास्पिटेलिटी, सड़क, शिक्षा व अन्य मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा जाना चाहिए ताकि भेद्भाव की भावना खत्म हो जाए ।

जाति के आधार पर बंट सकता है देश

चौपाल के सौरभ चौहान का कहना है कि जाति के आधार पर चुनाव लड़ने का एलान करना भेद्भाव की बाधा उत्पन्न करता है। जाति के आधार पर चुनाव लड़ने का ऐलान होने से हमारा देश बंट जाएगा। यह देश की तरकी के लिए सही नहीं है। इससे देश में सभी चीजें वोट बैंक बन रह जाएगी।

सभी लोग बराबर

जाति-पाती कुछ नहीं होता। देश में रह रहे सभी लोग एक जैसे है। यह कहना है सीएस हांडा का। उन्होंने कहा कि इनसानियत, अपना पन, भाई चारे की भावना सुदृढ़ बने इस आधार पर चुनाव लड़ना चाहिए। इससे देश बढे़गा और सभी प्रेमभाव व अपनेपन की भावना केसाथ रहेंगे।

जाति के आधार पर चुनाव लड़ना लोकतंत्र को ठेस

सोलन की रहने वाली सोनाली का कहना है कि जाति के आधार पर चुनाव को लड़ना गलत ही नहीं बल्कि लोकतंत्र पर भी इससे ठेस पहुंच सकती है। इसके लिए रोजगार, गरीबी व अन्य मुद्दों को लेकर चुनाव का एलान होना चाहिए ताकि देश के हित में कार्य हो और बेरोजगारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सके।

लड़ाई-झगड़े को मिलेगा प्रोत्साहन

नरेश कुमार का कहना है कि देश के लिए जाति के आधार पर चुनाव लड़ने से भेद्भाव की भावना को बढ़ावा मिलेगा। इससे लड़ाई-झगड़े ज्यादा बढ़ जाएंगे जिनका अंत कर पाना बेहद मुश्किल है। इस कारण जाति के आधार पर चुनाव ऐलान करना गलत है

न हो जाति भेदभाव

सोलन के सिधू का कहना है कि जाति भेद्भाव कुछ नहीं होना चाहिए। भेद्भाव से एक तरह से दुश्मनी पैदा होती है। सभी को एक ही दृष्टि से देखना चाहिए। जिस दिन यह जाति आदि का ऐलान होना बंद हो जाएगा उसी दिन सभी सही व स्पष्ट हो जाएगा। इससे हमारा लोकतंत्र भी मजबूत होगा।