Monday, August 19, 2019 04:17 PM

जात-पात की राजनीति छोड़ जनहित मुद्दों पर लड़ें चुनाव

लोकसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही सियासी पारे मंे आया उछाल हिमाचल मंे भी चढ़ता जा रहा है। सियासी दलों के साथ-साथ टिकट के कुछ चाह्वान जाति को मुद्दा बनाकर चुनावी समर मंे उतरने का दम भर रहे हैं। पर क्या जाति की बैसाखियों के सहारे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की पगडंडियों पर चलना उचित है! क्या जाति के नाम पर चुनावी समर मंे उतरने वाले नुमाइंदे लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं हैं, इन्हीं मुद्दों पर लोगांे की राय सामने ला रहा है, प्रदेश का अग्रणी मीडिया गु्रप ’दिव्य हिमाचल’              -   हामिद खान, चंबा

भारत का अब हर नागरिक जागरूक है

सतपाल सिंह के अनुसार जात -पात की राजनीति से देश बनता हैञ इस प्रकार की राजनीति करने वालों को भारत जैसे लोकतंत्र देश में कोई जगह नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत का हरेक नागरिक अब जागरूक हो चुका है।

लोकतंत्र देश में ऐसी राजनीति को कोई स्थान नहीं

नितिन प्लाह का कहना है कि भारत जैसे लोकतंत्र देश में इस प्रकार की राजनीति कोई स्थान नहीं है। नितिन प्लाह का कहना है कि नेताओं को चाहिए कि वह एक दूसरे पर छींटाकशी न कर जात पात की राजनीति न खेलकर विकास और स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ें।

गाली-गलौज नेताओं को नहीं देता शोभा

एडवोकेट उमेश ठाकुर के अनुसार जात-पात गाली गलौज उन नेताओं को शोभा नहीं देता, जिन्हें लोग सांसद बनाकर इतने बड़े जिम्मेदाराना पद पर भेजते हैं। ऐसे बयानों से न केवल समाज मे दरार आती है, बल्कि आने वाली पीढि़यों पर गलत प्रभाव पड़ता।

गैर जिम्मेदाराना हरकत करने वाले लोग पसंद नहीं

उत्तम नरूला के अनुसार भारत जैसे देश में जात पात धर्म गाली गलौज की राजनीति को कोई स्थान नहीं है। देश का मतदाता अब जागरूक हो चुका है वह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो विकास छोड़कर इस प्रकार की गैर जिम्मेदराना  हरकत करते हैं।

लोकतंत्र में एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना उचित नहीं

रवि कुमार का कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जात पात तथा एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना उचित नहीं है। रवि के अनुसार मुद्दों और विकास पर चर्चा कर अपनी जीत हार का पैमाना स्थापित करना होगा अन्यथा अब समाज का हर वर्ग सचेत हो चुका है भारत में ऐसी राजनीति को जगह नहीं।

जात-पात की राजनीति भारत देश में मायने नहीं

नसीम खान के अनुसार जात-पात की राजनीति भारत देश में मायने नहीं रखती। तथा राजनीतिज्ञों को भी समझना होगा कि देश का नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझता है। तथा वह सही उम्मीदवार का चुनाव करेगा न कि समाज में फूट डालने वाले नेता का।