Thursday, December 12, 2019 03:05 PM

जानलेवा बनता सेल्फी का क्रेज

 ज्योति स्वरूप पाठक

जब से स्मार्टफोन का जमाना आया है, तब से ही मोबाइल पर अपनी फोटो खींचना एक शौक बन गया है। न सिर्फ नौजवान पीढ़ी सेल्फी लेने की आदी हुई है, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति पर इसका प्रभाव देखा जा सकता है। अकसर सेल्फी को विशेष बनाने के चक्कर में लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। सेल्फी का यह रुझान मानसिक रोग बनता जा रहा है। देखादेखी में इसका दायरा भी बढ़ता जा रहा है। सेल्फी लेना कोई बुरी बात नहीं है, परंतु   सेल्फी को के्रज बना लेना, यह बहुत गलत बात है। प्रशासन तो कुछ स्पॉट प्लेसेज पर सतर्क रहता है, परंतु हमें ही जागरूकता और सतर्कता से कार्य लेना होगा।