Tuesday, August 20, 2019 10:31 AM

जान हथेली पर रख पार कर रहे नदी

भराड़ी के चाड़ग में रज्जु मार्ग कई महीनों से क्षतिग्रस्त; स्कूली छात्रों व लोगों को झेलनी पड़ रही दिक्कतें, हर पल सता रहा हादसे का डर

नौहराधार -रआए दिन सरकार विकास के बड़े बड़े दावे करती नहीं थकती है मगर गिरिपार के दुर्गम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं से वंचित हंै जी हां बात कर रहे जिला पंचायत भराड़ी के चाड़ग गांव की जहां ग्रामीण हर रोज मौत से लड़ रहे है। आखिर ऐसी क्या बात है यहां नदी पर मौजूद रज्जु मार्ग कई महीनों से क्षतिग्रस्त अवस्था में है जिस कारण ग्रामीणों को जान जोखिम पर रखकर नदियां पार करना पड़ती है। सरकार व प्रशासन की इस ओर नजर-ए-इनायत कब होगी। हैरानी की बात यह भी है कि पंचायत प्रतिनिधि भी इस और कोई ध्यान नहीं देते। ग्रामीण पिछले कई महीनों से ग्रामीण तारों से बनी रस्सियों के सहारे नदी पार कर रहे हैं यानी जरा सी चूक हो जाए तो कोई भी अनहोनी हो सकती है। कई बार कम जल स्तर के चलते महिलाएं पुरुष व बच्चे पानी में तैरते हुए नदी को पार करते देखे जा सकते हैं । बता दें की हर दिन यहां कई छात्रों को दरिया पार करना पड़ता है। यदि पानी का जल स्तर ज्यादा बढ़ जाए तो बच्चों को कई दिनों तक स्कूल से अनुपस्थित रहना पड़ता है। या फिर स्कूल जाने वाले छात्रों को हर रोज जिंदगी दांव पर लगानी पड़ती है । चाड़ग, पलगेच, बाग के बच्चों को सात किमी पैदल सफर कर नदी पार करके पुन्नरधार स्कूल पहुंचना पड़ता है। बच्चों को नदी पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है वहीं इस गांव से ग्रामीणों को जरूरत की चीज व विभागीय कार्यों के लिए नौहराधार आने वाले भी रस्सियों पर चलने तथा पानी के उफनते पानी के बीच चलने को अपना मुकदर मान रहे है । आजकल बारिश के चलते नदियों में पानी बढ़ चुका है तथा रस्सी पर गुजरने में नाकाम रहने वाले लोग नदी में उतरने का जोखिम उठा रहे हैं । चाड़ग गांव में 20 से 30 परिवार रहते है इसके अलावा दूसरे गांव कोठी, पलगेच, बाग के ग्रामीण भी इसी नदी से होकर भराड़ी पुन्नरधार, भवाई जाते है। इन गांव के दोनों ओर नदियां हैं बीच में यह गांव बसे है। इन गांव के ग्रामीणों की नदियों पर बने इन रज्जू मार्ग पर जिंदगी की डोरी टिकी हुई है । ग्रामीण हर रोज रज्जु मार्ग पर करतब करने को विवश है। ग्रामीण नीताराम शर्मा, बाबूराम, मेलाराम, कुलानंद, गीताराम व मस्तराम आदि ने बताया कि हम लोगों को बरसात से पहले ही खाने पीने की वस्तुएं थोक में लानी पड़ती है। सुबह-शाम अपने बच्चों को स्कूल के लिए नदी पार करकवाना पड़ता है । कई बार ज्यादा बारिश से हम लोग दस से 15 दिन तक अपने घरों में ही रहते है ।

क्या कहते हैं विकास खंड अधिकारी संगड़ाह

 विकास खंड अधिकारी संगडाह कृष्णदत्त ने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था मैंने कुछ समय पहले ज्वाइनिंग की है। इस क्षेत्र का मौके पर जाकर जायजा लिया जाएगा। जल्द ही वहां पर पर इस समस्या का समाधान किया जाएगा।