ज्ञान-परिश्रम से होंगे सपने साकार

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

यह जीवन सभी लोगों को समान रूप से मिला है, लेकिन मात्र कुछ लोग ही मिलने वाले अवसरों को कामयाबी में बदल कर दूसरों के लिए मिसाल पैदा करते हैं। हमें हमेशा प्रगति की ओर बढ़ने के लिए और बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए हमारा अपने ऊपर विश्वास शत् प्रतिशत होना चाहिए। असफलताएं हमें सिखाती हैं, वही हमारी वास्तविक शिक्षक हैं। हमेशा तत्पर रहें, आगे बढ़ें, अच्छे संबंध स्थापित करें, परिश्रम करें, आशावादी बने रहें। मात्र 20 प्रतिशत  लोग ही कामयाब होते हैं। हमारी सफलता हमारे द्वारा की गई कोशिशों और भाग्य पर निर्भर करती है...

बाल्यावस्था और जीवन के प्रारंभिक वर्षों में जब हम विद्यालय में अध्ययनरत होते हैं, तो भावी जीवन में प्रेरणास्पद बातों का कितना महत्त्व होता है, प्रायः इससे अनजान ही रहते हैं, क्योंकि उस समय हम पर पाठ्य पुस्तकों को पढ़ने और वार्षिक परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने का भारी दबाव रहता है। उसके बाद पुनः किसी अच्छे कालेज और विश्वविद्यालय में दाखिले को लेकर भारी जद्दोजहद रहती है। ऐसा भी नहीं है कि विद्यालय जीवन में हमारे अध्यापक हमें पाठ्य पुस्तकों के ज्ञान के अलावा भावी जीवन की चुनौतियों से निपटने के गुर न सिखाते हों, लेकिन अपरिपक्वता के चलते हम श्रेष्ठ ज्ञान की बातों का अनुसरण नहीं कर पाते हैं। मेरा ऐसा मानना है कि हम अपनी किशोरावस्था में जो कुछ देखते-सुनते हैं, वह बातें कहीं न कहीं हमारे अवचेतन मस्तिष्क में बैठ जाती हैं और जब हम जीवन रूपी यात्रा में अग्रसर होते हैं, तो पूर्व में सुनी गईं ज्ञान की बातें तत्काल हमारे स्मृतिपटल से बाहर आकर प्रत्यक्ष उद्घाटित हो जाती हैं तथा हमारा मार्गदर्शन करती प्रतीत होती हैं।

चूंकि हमारे मस्तिष्क में पहले से ही सकारात्मकता का बीजारोपण गुरुओं की कृपा से हो चुका होता है और यही सकारात्मक दृष्टिकोण अथवा नजरिया आगामी जीवन में हमारा मददगार साबित होता है। प्रत्येक मानव में बुनियादी ज्ञान की उपस्थिति और सही सोच के चलते उसकी कार्यप्रणाली में उत्तरोत्तर बदलाव होता रहता है, जो उसे सफलता पथ पर ले जाता है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी दक्षता, ज्ञान को बढ़ाएं और कठोर परिश्रम से अपने लक्ष्य को साधें। इसमें ‘मैं कर सकता हूं’ वाला नजरिया हमेशा हमारी सहायता करता है, क्योंकि सकारात्मक विचार ही वह बीज हैं, जो आगे चलकर वृक्ष का रूप धारण करते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम कभी भी शिकायत करने वाला रवैया अख्तियार न करें, बल्कि हमेशा सकारात्मक सोच रखें। जिस आदमी का हौसला बुलंद होता है, वह दूसरों का विश्वास भी हासिल कर लेता है। यदि आप गंभीरता से प्रयत्न करेंगे, तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि आपको सफलता न मिले। इसलिए रचनात्मक नजरिया हमारे भीतर एक ईंधन का काम करता है। अपने जीवन में यदि हम सफलता हासिल करना चाहते हैं, तो इसके लिए आवश्यक है कि हम कुछ नियम, सिद्धांत और तौर-तरीकों का पालन करें और निश्चित उद्देश्य सामने रखकर अपनी तैयारियों को धार दें। किसी भी कार्य की सफलता के लिए आपको तीन बातों पर अमल करना होगा, वह हैं सपने (ड्रीम), योजना (प्लान) और प्रयास (एफर्ट्स)। ऐसा माना जाता है कि बिना सपनों के जीने वाला आदमी मृत होता है। इसलिए पहले एक सपना देखें, उसे ही अपना लक्ष्य बनाएं, फिर योजना बनाकर पूरे प्रयत्न से उसे लागू कर अंजाम तक पहुंचाएं। आपका सपना न केवल बड़ा होना चाहिए, बल्कि वह आपको भीतर से इतना ज्यादा आंदोलित कर दे कि आप उसे प्राप्त करके ही मानें। इसके लिए रास्ते में आने वाली बाधाओं, मुश्किलों और रुकावटों से दो-दो हाथ करने का साहस, हौसला भी आपको ही जुटाना पड़ेगा। आपको घर और बाहर के लोगों से भी विरोध के स्वर सुनाई दे सकते हैं, लेकिन आपको गंभीर रहना है और अपने सपने को साधने के लिए टिके रहना है। याद रखें ‘कभी भी अपने सपनों को चुराने न दें’। जितना ज्यादा आपका प्रयत्न और प्रयास होगा, उतनी ही बड़ी सफलता के आप हकदार भी होंगे। इंटरनेट के दौर में आज यद्यपि लोगों का रुझान पुस्तकों के पठन-पाठन से घटा है, तथापि अपने भीतर के सपनों को जिंदा रखने और निरंतर उद्यमशील बने रहने के लिए अति आवश्यक है कि हम प्रेरणास्पद पुस्तकों का अध्ययन करें।

लगान और थ्री इडियट्स जैसी फिल्में देखना भी हमारे लिए उपयोगी रहेगा। सफलता पाने के लिए जरूरी है कि हम अपने ज्ञान को बढ़ाएं, वार्तालाप की कला सीखें, निरंतर प्रयत्नशील बने रहें, योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें, अभ्यास करें तथा किसी भी चुनौती का सामना करने का साहस रखें और अपने आत्मविश्वास के बलबूते आगे बढ़ें। जीवन में मात्र पांच प्रतिशत लोग ही पैदायशी लीडर होते हैं, 15 फीसदी हालात द्वारा बनते हैं, जबकि 80 प्रतिशत लोग ट्रेनिंग, पढ़-लिखकर, अच्छी संगत और मेहनत से ही लीडर बन पाते हैं। यह जीवन सभी लोगों को समान रूप से मिला है, लेकिन मात्र कुछ लोग ही मिलने वाले अवसरों को कामयाबी में बदल कर दूसरों के लिए मिसाल पैदा करते हैं। हमें हमेशा प्रगति की ओर बढ़ने के लिए और बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए हमारा अपने ऊपर विश्वास शत् प्रतिशत होना चाहिए। असफलताएं हमें सिखाती हैं, वही हमारी वास्तविक शिक्षक हैं। हमेशा तत्पर रहें, आगे बढ़ें, अच्छे संबंध स्थापित करें, परिश्रम करें, आशावादी बने रहें। मात्र 20 प्रतिशत  लोग ही कामयाब होते हैं। हमारी सफलता हमारे द्वारा की गई कोशिशों और भाग्य पर निर्भर करती है। अतएव सदैव प्रयत्नरत रहें।

कुछ सामान्य गुणों को अपनी दैनिक दिनचर्या का अंग बनाएं, यथा - कार्य को संपन्न करने की प्रतिबद्धता, धैर्य, दूसरों के साथ हमारे अच्छे संबंध, कार्यक्षेत्र अथवा संस्था में टीमवर्क, आत्मविश्वास और चुनौतियों को स्वीकार करने का हौसला। लिहाजा आशावान रहें, अपने आप को बदलें, फिर तेजी से आगे बढ़ें और हमेशा बदलाव के प्रति तैयार रहें। यदि आपको कामयाबी हासिल करनी है और अपनी तरक्की को हाथ से नहीं फिसलने देना है, तो फिर ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा उपाय नहीं है। इसलिए ज्ञान प्राप्त कर  सफलता पाएं।