Sunday, May 09, 2021 07:01 PM

ज्यादा पानी चाहिए तो लगाओ एक्स्ट्रा कनेक्शन

गर्मियों की पसंदीदा सैरगाह है पर्यटन नगरी, इस बार कोविड मापदंडों को पूरा करने पर ही होगी एंट्री

स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर

कोरोना की बंदिशों के बीच अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली की ओर सैलानी उमड़ने लगे हैं। सरकार के नए निर्देशों के तहत होटल कारोबारी भी मेहमानों की आवभगत करने में जुट गए हैं। लिहाजा, आने वाले दो से तीन माह तक अगर कोरोना का खतरा ज्यादा नहीं बढ़ा तो सैलानियों की रौनक देखने को मिलगी। बता दें कि अप्रैल से जुलाई की गरमी से परेशान सैलानी राहत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली को भागे-भागे आते हैं। इन चार महीनों में जिला में आने वाले पर्यटकों की संख्या सर्दियों की तुलना में दोगुनी हो जाती है। सैलानी मनाली-रोहतांग-सोलंगनाला, मणिकर्ण-बरशैणी तथा बंजार-जलोड़ी के पर्यटन ठिकानों में इस दौरान रहते हैं और अगस्त-सितंबर में गर्मी कम होने के बाद वापस लौटना आरंभ करते हैं। जानकारों के अनुसार कुल्लू-मनाली देश-दुनिया के सैलानियों के लिए सबसे पसंदीदा सैरगाह बन गया है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल माह में सैलानियों की संख्या में इजाफा होना आरंभ होता है और मई-जून साल का पीक सीजन रहता है।

साल के किसी भी माह में एक से दो लाख तक जिला में आने वाले सैनियों का आंकड़ा इन महीनों में चार लाख के पार हो जाता है।  पिछले दो सालों में केवल मई व जून केवल मात्र महीने रहे हैं, जब यहां आने वाले सैलानियों का आंकड़ा चार लाख के पार हुआ है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 से 2019 तक अप्रैल माह में जिला में 1752742 सैलानी, मई में 2131096, जून में 2299923 तथा जुलाई में 1791598 सैलानी आए हैं, जो अन्य माह में आए सैलानियों से 50 फीसदी तक ज्यादा हैं। हालांकि पिछले साल कोई भी सैलानी इस दौरान लॉकडाउन के कारण नहीं आ पाया था। गर्मियों में यहां पहुंच रहे पर्यटकों के कारण पर्यटन कारोबारी खूब चांदी कूटते हैं। जानकारी के अनुसार 2015 के बाद से शिमला भी कुल्लू के मुकाबले सैलानियों को आकर्षिक करने के मामले में पिछड़ता जा रहा है। 2018 में कुल्लू में शिमला के मुकाबले करीब तीन लाख ज्यादा सैलानी आए थे। पर्यटकों की लंबी लाइन के बाद जिला के कारोबारी इस बार भी ज्यादा सैलानियों के यहां पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उपायुक्त डा. ऋचा वर्मा का कहना है कि सैलानियों के अनुसार सरकार ने कोविड मापदंड तय किए हैं और इनका पालन करते हुए सैलानी जिला में आ सकते हैं।

ब्यास-पार्वती-सैंज बेसिन की पहाडि़यों से छंटने लगी सफेदी, नदियों के जलस्तर में हो रहा इजाफा

स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर

इस साल अच्छी बर्फ को तरसे जिला कुल्लू के पार्वती-ब्यास और सैंज बेसिन के बर्फ क्षेत्र गर्मी की आहट से हौले-हौले पिघलने आरंभ हो गए हैं। मौसम में आई गर्माहट अपना रंग दिखाने लगी है, जिसका असर जिला के हिम क्षेत्रों पर दिख रहा है। लिहाजा सदानीरा ब्यास और पार्वती सहित सैंज नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने वाली है। बता दें कि सर्दियों में पहाड़ों पर हुए हिमपात ने यहां की नदियों के जलस्तर को भी निम्र स्तर पर पहुंचा दिया था। सबसे ज्यादा 36 ग्लेशियरों से घिरे पार्वती बेसिन के करीब 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, छह ग्लेशियरों से घिरे ब्यास के 15 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र और नौ ग्लेशियरों से घिरे सैंज बेसिन के 37 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इस बार बर्फ अपेक्षाकृत कुछ कम पड़ी है और यह बर्फ अब पिघलने लगी है। बर्फ पिघलने के बाद इन चोटियों में लोगों का आवागमन भी होने लगा है। जानकारी के अनुससार पार्वती घाटी की मलाणा व खीरंगगा में बर्फ की चादर हट रही है और यहां पर सैलानी व अन्य लोग भी पहुंच रहे हैं। ग्लेशियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार जिला में करीब 330 से अधिक हिम क्षेत्र हैं, जिनमें पार्वती बेसिन में सबसे ज्यादा 147 हिमक्षेत्र हैं, जिनका दायरा करीब 118 वर्ग किलोमीटर है तो ब्यास बेसिन में 47 और सैंज बेसिन में 59 हिमक्षेत्र हैं, जिनका दायरा 72 व 51 वर्ग किलोमीटर है।

जल जीवन मिशन में मनमानी पर लगेगी रोक; मिलेगा केवल आधा इंच पानी का कनेक्शन, अधिक पानी के लिए करनी होगी ज्यादा जेब ढीली

हीरा लाल ठाकुर — भुंतर आम लोगों को परेशानी में डालकर चहेतों को मनमाना वितरण करने वालों पर केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन की ब्रेक लग गई है। इस मिशन के तहत किसी भी व्यक्ति को मांगने के बाबजूद अलग-अलग साइज के कनेक्शन नहीं मिलेंगे। योजना के तहत केवल आधा इंच आकार का ही कनेक्शन मिलेगा और अगर किसी को ज्यादा पानी चाहिए तो उसे दो कनेक्शन लगाकर ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। लिहाजा, पानी का मनमाना वितरण अब जल्द ही बंद होने वाला है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब पंचायत स्तर पर एक्शन प्लान बनने के कारण इसका कार्यान्वयन व रखरखाव सुनिश्चित होगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर जल समितियों का गठन किया जा रहा है और इसकी प्रक्रिया इन दिनों पूरी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार हर घर के अलावा गांव के सभी संस्थानों, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, पंचायत घर को भी कनेक्शन मिलेगा तो पशुओं के पानी पीने के स्थानों में भी पानी की व्यवस्था करनी होगी। अधिकारियों की मानें तो नई पाइपलाइन बिछने के बाद सभी को एयरेटर नल का ही प्रयोग करना होगा, जिससे कम पानी की खपत हो, जो व्यक्ति इस प्रकार का नल नहीं लगाता है तो उस पर जुर्माना भी लग सकता है। इसके अतिरिक्त पांच लीटर प्रति मिनट पानी देने वाला टेंपर प्रूफ फ्लो कंट्रोल वाल्व का प्रयोग भी होगा, ताकि पानी का अधिक बहाव न हो सके। इसे डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन के साथ-साथ हर घर मे लगाना होगा, जिससे हर घर को समान रूप से पानी मिले। बता दें कि केंद्र सरकार की इस योजना के लिए कुल्लू सहित प्रदेश के सभी जिलों में कार्य