ज्यादा होमवर्क से बच्चों में बढ़ता तनाव

आजकल के समय में बच्चों पर पढ़ाई का सबसे ज्यादा भार रहता है। बच्चे अपना पूरा दिन स्कूल के काम में ही बिता देते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि स्कूल द्वारा दिए गए काम की वजह से आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता है। सही मायने में देखा जाए तो इस वजह से आपके बच्चे की सेहत पर काफी असर पड़ता है। छोटे बच्चे भी अपना पूरा दिन होमवर्क करने में ही बिता देते हैं। बच्चों में होमवर्क की वजह से बेहद तनाव रहता है, क्योंकि अगर होमवर्क वक्त से नहीं किया गया तो स्कूल में उन्हें दंड दिया जाएगा। इसी तनाव के चलते बच्चे अकसर सिरदर्द, मायूसी, अकेलेपन जैसी  बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। दरअसल आजकल मां-बाप अपने बच्चों से भी काफी अपेक्षाएं रखने लगे हैं और उन्हें पूरा करने के लिए वे बच्चों को महंगे से महंगे कॉन्वेंट स्कूलों में दाखिल कराते हैं। ऐसे स्कूल भी अपने ऊपर अच्छे स्कूल का ठप्पा लगाने के लिए बच्चों को अधिक से अधिक होमवर्क देते रहते हैं। बच्चों के बुझे चेहरे और शाम को खेल के मैदानों में घटती उनकी संख्या होमवर्क की अधिकता से परेशान बच्चों की कहानी बयां करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार छोटे बच्चों के लिए होमवर्क का समय सिर्फ  दस मिनट ही रहना चाहिए। अगर वह इससे ज्यादा समय देते हैं, तो वह कहीं न कहीं अपने आप को परेशानी में डाल सकते हैं। वहीं बड़े बच्चों के लिए होमवर्क का समय दो घंटे है। इससे ज्यादा अगर समय दिया जाए, तो यह उनके लिए फायदेमंद साबित नहीं होगा। बड़े बच्चे भी होमवर्क की वजह से बेहद दुखी रहते हैं। होमवर्क के चलते वह अपने टेलेंट को कहीं पीछे छोड़ देते हैं क्योंकि उनका पूरा वक्त तो सिर्फ  होमवर्क करने में ही निकल जाता है। बात की जाए तनाव की तो 70 प्रतिशत बच्चों का कहना है कि वह अकसर होमवर्क के चलते तनाव में रहते हैं, वहीं 56 प्रतिशत बच्चों का कहना हैं कि उन्हें होमवर्क का तनाव सबसे पहले सताता हैं। सिर्फ 1 प्रतिशत बच्चे हैं, जो होमवर्क को तनाव नहीं मानते हैं।  शोधकर्ताओं ने बताया कि होमवर्क के चलते बच्चे सिरदर्द, पेट दर्द, वजन घटना और नींद न आने जैसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि होमवर्क में ज्यादा समय बिताने से बच्चों में चिड़चिड़ापन हो जाता हैं। ऐसे बच्चे अकसर अपने परिवार और दोस्तों से दूर हो जाते हैं। बड़े बच्चे अकसर इसी तनाव को कम करने के लिए गलत आदतों के आदि हो जाते हैं। इस तनाव को कम करने के लिए वह कई प्रकार की दवाइयां और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं।

 

 

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