Sunday, June 16, 2019 06:41 PM

टीमें बनीं, पर नहीं हुई इंस्पेक्शन

शिमला —छात्र अभिभावक मंच ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। मंच ने शिक्षा विभाग से पूछा है कि जब चार साल पहले इंस्पेक्शन टीमें बन गईं थीं, तो फिर किसी भी निजी स्कूल की इंस्पेक्शन क्यों नहीं हुई। निजी स्कूलों को इंस्पेक्शन के दायरे में न लाकर आखिर उन्हें क्यों विशेषाधिकार दिए गए। क्यों उन्हें सिस्टम में ज़्यादा तवज्जो दी गई। क्यों निजी स्कूलों की मनमर्जी व मनमानी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि निजी स्कूलों को हमेशा विशेष तरह की इम्युनिटी प्राप्त रही है। शिक्षा विभाग द्वारा लिए गए निर्णय हमेशा सरकारी स्कूलों पर थोपे गए, मगर निजी स्कूलों में इन निर्णयों को लागू करवाने के लिए शिक्षा विभाग ने कभी भी कोई पहल कदमी नहीं की। इससे साफ पता चलता है कि शिक्षा विभाग के सरकारी व निजी स्कूलों के लिए अलग-अलग मापदंड हैं। इससे यह भी पता चलता है कि निजी स्कूल प्रबंधनों का पूरे शिक्षा तंत्र में बोलबाला है व वे हर तरह के  नियम कायदे कानून से परे हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि निजी स्कूलों का पूरे सिस्टम में दबदबा इस कदर है कि शिक्षा निदेशालय के अधिकारी भी इन स्कूलों में हाथ डालने से कतराते हैं। शिक्षा अधिकारी भी निजी स्कूल प्रबंधनों के लंबे हाथों से खौफजदा हैं। उन्होंने शिक्षा निदेशक से पूछा है कि जब सरकारी स्कूलों की इंस्पेक्शन के लिए चार साल पहले इंस्पेक्शन टीमें गठित कर दी गईं तो फिर निजी स्कूलों को इसके दायरे में क्यों नहीं लाया गया। क्यों निजी स्कूलों को इंस्पेक्शन से छूट दी गई। अगर चार साल पहले इन इंस्पेक्शन टीमों ने निजी स्कूलों में इंस्पेक्शन का अपना कार्य शुरू कर दिया होता तो आज निजी स्कूल बेलगाम नहीं होते। उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा गठित 72 इंस्पेक्शन टीमों को केवल सफेद हाथी करार दिया है। उन्होंने शिक्षा निदेशक को चुनौती दी है कि अगर वाकई में ये 72 इंस्पेक्शन टीमें कोई बेहतर कार्य कर रही हैं तो उनका रिकॉर्ड अभिभावकों व जनता के समक्ष रखा जाए। उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि अगर इस तरह से सरकारी तंत्र काम करेगा जहां पर निजी स्कूलों में मनमानी, मनमर्जी व भारी फीसों को संचालित करने के बजाए उन्हें खुली छूट मिलेगी तो फिर छात्रों और अभिभावकों के हित कभी भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल के बाद शुरू हुई इंस्पेक्शन में भी छोटे निजी स्कूलों को टारगेट किया जा रहा है व बड़े-बड़े निजी स्कूलों पर कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि चंबा, डलहौजी, नाहन, पौंटा साहिब, नालागढ़,  बद्दी, मंडी, सरकाघाट, पालमपुर, शिलाई, रामपुर क्षेत्रों से मंच के पास काफी शिकायतें आ रही हैं, जिसमें स्पष्ट नजर आ रहा है कि कार्रवाई दिखाने के नाम पर छोटे निजी स्कूलों पर अधिकारी अपनी धौंस जमा रहे हैं परंतु महंगे कान्वेंट व बड़े निजी स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।