Sunday, November 17, 2019 03:38 PM

टेढ़ा मंदिर के मेकअप को 60 लाख

आचार संहिता हटते ही मंदिर के सौंदर्यीकरण का युद्धस्तर पर शुरू होगा काम

ज्वालामुखी -ज्वालामुखी के प्राचीन और एतिहासिक रघुनाथेश्वर टेढ़ा मंदिर के दिन फिरने वाले है। मंदिर न्यास ज्वालामुखी के अधीन इस मंदिर के जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण के लिए मंदिर न्यास ज्वालामुखी ने 60 लाख का बजट रखा है, जिससे यात्रियों की सुविधा के लिए यहां छोटी सराय, रसोई, स्नानागार, शौचालय व भवन बनाने की योजना है। इसके अलावा इस मंदिर को जाने वाली सीढि़यों और सड़क मार्ग को भी बेहतर बनाकर इस स्थान को यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की योजना है। इस मंदिर को जाने वाला सीढि़यों वाला मार्ग दो किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग को सुलभ और सुरक्षित बनाने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें इस मार्ग में जगह-जगह रेन शेल्टर, शौचालय, स्नानागार  आदि बनाए जाएंगे। रास्ते मे पीने के पानी के वाटर कूलर लगाए जाएंगे। रास्ते मे कई स्थानों पर शॉपिंग हट्स बनाए जाएंगे। इस संदर्भ में एसडीएम ज्वालामुखी अंकुश शर्मा का कहना है कि आचार संहिता हटते ही इन सभी योजनाओं पर काम शुरू होगा, ताकि ज्वालामुखी को और भी संुदर आकर्षक और पर्यटकों के लिए बेहतर रमणीय स्थल बनाया जा सके। योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि ज्वालामुखी में आने वाले यात्री और पर्यटक यहां माता के दर्शन करके चले जाते हैं। हम चाहते हैं कि यात्री यहां पर दो तीन दिन तक रुक के जाएं, जिसके लिए हमें यहां यात्रियों को आकर्षित करने के लिए सभी मंदिरों को परिक्रमा मार्ग से जोड़कर यहां यात्रियों को हरसंभव सुविधा उपलब्ध करानी होगी। शहंशाह अकबर की नहर का जीर्णोद्धार करना होगा। ध्यानु भक्त की यादों को जिंदा करना होगा, उनका मंदिर बनाया जाए। यहां पानी के अथाह स्रोतों का दोहन किया जाए, ताकि ये पानी उपयोग में लाया जा सके। भैरों बाबा मंदिर, तारा देवी मंदिर के मार्गों को मुरम्मत कर यहां कैनोपी बनाई जाएगी। रज्जु मार्ग और मिनी चिडि़याघर की संभावनाएं तलाशनी होंगी, तभी इस स्थान को धार्मिक स्थल के साथ पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

धवाला के बोल

योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि ज्वालामुखी में आने वाले यात्री और पर्यटक यहां माता के दर्शन करके चले जाते हैं। हम चाहते हैं कि यात्री यहां पर दो-तीन दिन तक रुक के जाएं, जिसके लिए हमें यहां यात्रियों को आकर्षित करने के लिए सभी मंदिरों को परिक्रमा मार्ग से जोड़कर यहां यात्रियों को सुविधा उपलब्ध करानी होगी।