Tuesday, September 17, 2019 03:46 PM

ट्रांसप्लांट के 12 दिन बाद लौटे किडनी रोगी

आईजीएमसी से दोनों प्रभावितों को छुट्टी, अगले दो अन्य प्रभावितों का भी जल्द होगा ट्रांसप्लांट

शिमला -ट्रांसप्लांट के बाद 12 दिनों के भीतर दोनों प्रभावितों को आईजीएमसी से छुट्टी दे दी गई है। दोनों प्रभावितों को अंडर आब्जर्वेशन में रखने के बाद दोनों किडनी प्रभावितों की टेस्ट रिपोर्ट सही आई है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। प्रदेश के किडनी प्रभावितों में मंडी के  38  वर्षीय बेटे को उसकी मां भगवान साबित हुई। 55 वर्षीय मां ने 38 वर्षीय बेटे को किडनी दान की। वहीं अन्य ट्रांसप्लांट में शिमला के रोहडू क्षेत्र से 68 वर्षीय पिता ने अपनी 31 वर्षीय बेटी को किडनी दान देकर उसका जीवन बचाया है।  बहरहाल हिमाचल के  पहले दो किडनी ट्रांसप्लांट लगभग दस वर्षो के लंबे इंतजार के बाद आईजीएमसी में सफल हो गए हैं। दोनों प्रभावितों की दोनों किडनियों में इन्फेंक्शन था। माता- पिता के लिए ये दिन बहुत बड़ी खुशी लेकर आया कि वह स्वस्थ्य होकर घर लौट आए हैं। अकसर यह देखा जा रहा है कि किडनी दान करने में उनके माता- पिता ही सबसे ज्यादा आगे आते देखे जा रहे हैं। अब अगले दो अन्य प्रभावितों का ट्रांसप्लांट भी जल्द किया जाने वाला है। किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था के लिए अब प्रदेश सरकार हिमकेयर और आयुषमान योजना में शामिल करेगी। प्रदेश सराकर गरीब परिवार के पहले दस किडनी रोगियों के ट्रांसप्लांट के लिए आने वाले चार लाख रुपए तक का खर्चा उठाएगी।  एक आंकडे के मुताबिक इस समय प्रदेश में लगभग 1200 लोग किडनी रोग से ग्रस्ति हैं। इसमें से लगभग 500 रोगियिं का किडनी ट्रांसप्लांट किया जाना है।  बताया जा रहा है कि बहुत से लोग किडनी की बीमारी से ग्रसित हैं। इसका मुख्य कारण उच्च रक्तचार और मधुमेह की बीमारियां हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पहले पीजीआई या एम्स में जाना पड़ता था, अब सरकार ने वर्ष 2018 में आईजीएमसी में गुर्दा प्रत्यारोपण की  सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार ने एम्स के सर्जिकल यूनिट के प्रोफेसर और प्रमुख से गुर्दा प्रत्यारोपण करने के लिए सहयोग की बात कही। एम्स की टीम ने शिमला में आ कर इस काम को शुरू करने का रोडमैप तैयार किया। इसमें डायलिसिस यूनिट के साथ तीन बिस्तरों वाला गुर्दा प्रत्यारोपण आईसीयू बनाया गया है।  इसके बाद 12 अगस्त को दो मरीजों की सफल किडनी ट्रांस्पलांट किया गया। यह काम एम्स की सात सदस्यीय टीम की देख-रेख में किया गया।