Monday, November 18, 2019 04:02 AM

ठारू की खेती को लील रहा नगरोटा का कचरा

नगरोटा बगवां—एक ओर जहां हर व्यक्ति अपने नागरिक कर्त्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने को पूरी तन्मयता से तैयार हो और दूसरी ओर एक जवाबदेह जिम्मेदार व्यवस्था आंख पर पट्टी और कान में रुई डाल कर दूसरे की परेशानी का सबब बन जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठने लाजिमी हैं । मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है, जब शिकायत स्वच्छता और रोटी से जुड़ी हो । कहना गलत नहीं होगा कि जनाब केवल रैलियों तथा नारों से ही न तो अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री हो जाएगी और न ही कोई अभियान संपूर्णता प्राप्त कर सकता है। देश भर में धड़ल्ले से चल रहे स्वच्छता अभियान के चलते कचरे का उचित प्रबंध न होने की वजह से जहां सड़कों के किनारे और जंगल डंपिंग साइट बनते जा रहे हैं, वहीं किसानों की उपजाऊ कृषि योग्य भूमि भी बर्बाद हो रही है । यह मामला नगरोटा बगवां की ग्राम पंचायत ठारू का है, जहां वर्षों से किसान शहर की गंदगी से अपनी भूमि को बर्बाद होते देख रहे हैं । राष्ट्रीय उच्च मार्ग की बंद नालियों से निकल रहा शहर का कूड़ा किसानों के लिए सिर दर्द बन कर रह गया है, जबकि इससे होने वाले नुकसान की जिम्मरदारी लेने को कोई भी तैयार नहीं । नगर पंचायत, जिला प्रशासन, सरकार, राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण, न्यायधीशों व  जनप्रतिनिधियों से लेकर राष्ट्रपति तक शिकायतों पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा ।  स्थानीय जागरूक लोग ही नहीं बल्कि पंचायत भी पिछले कई वर्षों से अपनी कार्रवाई में मुद्दे का समाधान खोजती आ रही है, जिसका सबूत समय-समय पर संबंधित विभागों को भेजे गए मुहरबंद प्रस्ताव चीख-चीख कर लोगों का दर्द बयां करते हैं । प्रशासन और शासन की कोई ऐसी चौखट नहीं, जहां क्षेत्र के किसान माथा रगड़ने न पहुंचे हों।