Saturday, September 21, 2019 04:24 PM

डर्टी पालिटिक्स…न ट्रेन, न ही प्लेन

चंबा की हर बार होती रही अनदेखी;संवेदनशील जे एंड के से जुड़े जिला की हालत खराब, पठानकोट तक  सिमटी उत्तर भारत की सबसे बड़ी रेल सेवा

चंबा -पहाड़ी जिला का जनमानस प्रदेश के नोर्थ जोन पर बसें जम्मू एवं कशमीर की सीमाओं से लगते सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील जिला चंबा में रेल, हवाई एवं यातायात कनेक्टिविटी को बढ़ाने की मांग कर रहा है। चंबा अवाम का कहना है कई दफा सांसदों की ओर से चंबा को रेल नेटवर्क से जोड़ने की बात कही गई, लेकिन पठानकोट तक  सिमटी उत्तरी भारत की सबसे बड़ी रेल सेवा कई बरस गुजर जाने के बाद एक इंच भी चंबा की पहाड़ी की तरफ नहीं खिसक पाई है। इससे पहले कई दफा मांग उठाने की बाद अब फिर से चंबा के सामाजिक संगठनों के अलावा अवाम भी चंबा को रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने की मांग उठाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि लोकसभा चुनावों के दौरान कई दफा चंबा को रेल नेटवर्क  से जोड़ने की बात कही गई है। वहीं एक बार तो इसके सर्वे पर भी विचार किए जाने लगा था, जिससे लोगों को भी चंबा को रेल नेटवर्क से जुड़ने की आस जगी थी, लेकिन फिर से मामला ठंडे वस्ते मंे पड़ गया है। चंबा जन हित संगठन के अलावा अन्य समाजिक संगठनों का कहना है कि लेह को मंडी मनाली होते हुए रेल सेवा से जोड़ने पर सर्वे किया गया है। जो की काफी लंबा मार्ग होगा। जबकि पठानकोट चंबा होते हुए लेह तक रेल नेटवर्क बनाया जाए तो यह सुगम होने के साथ ही कम दूरी बाला मार्ग होगा। जिसे जल्द तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा चंबा वासियों का कहना है कि जिला चंबा की सीमाएं जम्मू कशमीर को टच करती हैं। जहां से चीन व पकिस्तान की सीमाएं भी काफी नजदीक हैं। वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में में अप्रिय घटना घट चुकी है। जिससे सुरक्षा की दृष्टि से चंबा जिला अति संवेदनशील है। लिहाजा जनमानस अब भारी बहुत के साथ जिता कर दिल्ली भेजे सांसदों से मांग कर रही है कि चंबा जिला में रेल, हवाई जहाज, व राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कर जम्मू कशमीर की तरह सुरक्षा संसधानों का जाल विछाने की मांग कर रहा है। ताकि भविष्य में किसी तरह की अप्रिय घटना का अंदेशा न रहे।