Monday, July 13, 2020 09:20 AM

डाक्टरों के व्यवहार पर मरीजों के सवाल

शिमला  - प्रदेश के कई अस्पतालों का स्टाफ मिसबिहेव कर रहा है, जिसका खुलासा 104 टोल फ्री नंबर पर आए मरीजों के विभिन्न कॉल्स को लेकर हुआ है। एक माह में दो से तीन शिकायतें मरीज ऐसी कर रहे हैं कि जिसमें मरीजों का यह कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए अस्पताल आने के बाद कई बार डाक्टर अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। वहीं कई बार डाक्टर्स के अलावा अन्य स्टाफ भी मरीज या फिर उसके तीमारदार के साथ मिसबिहेव कर रहे हैं। मरीजों की शिकायत है कि वे प्यार से बात नहीं करते हैं। इसमें कुछ शिकायतें प्रदेश में फील्ड से भी हैं, जिसमें कुछ आशा वर्कर के साथ कुछ हैल्थ वर्कर्ज की शिकायतें बेहतर व्यवहार न करने क ो लेकर पेश आ रही हैं। वहीं 104 टोल फ्री नंबर में प्रदेश के अस्पतालों से दवाएं नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। एक माह में आने वाली लगभग पंद्रह से बीस शिकायतों में से दो से तीन शिकायतें मिसबिहेव की प्रकाश में आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री निःशुल्क दवाई योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क दवाइयां एवं उपभोज्य वस्तुएं जैसे सूइयां, पट्टिया इत्यादि प्रदान की जा रही हैं, लेकिन इसे लेकर ही कई शिकायतें ऐसी आ रही हैं, जिसमें दवा संबंधित दिक्कतों के बारे में जनता संबंधित नंबर पर शिकायत कर रही है। विभाग ने साफ किया है कि जिला अस्पताल एवं चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में 330 फ्री दवाएं और फ्री प्रदान की जा रही हैं, जिनमें 310 दवाइयां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नागरिक अस्पताल व सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों में 216 दवाइयां व अन्य उपयोग की वस्तुएं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 106 व स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 43 दवाइयां व अन्य उपयोग की वस्तुएं प्रदान की जा रही हैं।

इन योजनाओं को चला रही सरकार

सरकार की योजनाआें के बारे में भी जनता टोल फ्री नंबर पर सवाल पूछ रही है। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा निःशुल्क निदान योजना भी आरंभ की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में 11 श्रेणियां, जिनमें कैंसर, क्षय रोगी, एचआईवी, एड्स, गरीबी रेखा से नीचे के रोगी, मेडिको-लीगल मामले, 60 वर्ष से अधिक आयु के रोगी, सभी गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु, महामारी के दौरान किए जा रहे परीक्षण, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किए जाने वाले परीक्षण व 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले रोगियों के परीक्षण शामिल हैं।