डिजिटलाइजेशन से पेपर लैस कार्यालय

कपिल चटर्जी

लेखक, मंडी से हैं

 

अगर समस्त कार्यालय इस प्रणाली से जुड़ते हैं, तो कार्यों में तेजी तो लाई जा सकेगी व करोड़ों की स्टेशनरी की बचत होगी। जहां एक तरफ पेपर लैस प्रणाली से कई तरह के व्यय पर अकुंश लगेगा, वहीं कागज की बचत, पेपरों को स्टोरेज की समस्या से छुटकारा और समय की भी बचत होगी...

कार्यालय और कागज रहित कुछ अटपटा सा लगता है, क्योंकि आदमी का कागज के साथ संबंध गहरे से जुड़ा है। चाहे वह कोरा कागज हो या कागज का नोट, इसके बिना कोई भी कार्य पूर्ण होता नजर नहीं आता है। शायद मनुष्य ने यह कभी भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा भी दिन आएगा, जब  कार्यालय व अन्य कार्य कागज रहित हो जाएंगे। इस कागज रहित समाज में कार्यालयों में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का ही नहीं, बल्कि समाज का बड़ा सहयोग है, चाहे वह कार्यालयों में कागज रहित कार्य प्रणाली को अपना कर या कैशलैस जैसी प्रणालियों  से बाजार से जुड़ना हो। आज कहीं न कहीं समाज का हर नागरिक इस व्यवस्था से किसी न किसी प्रकार से जुड़ रहा है। पारंपरिक  कार्यालयों में  कागज आधारित फाइलिंग सिस्टम, जिनमें इनको नत्थी करके रखना और फिर मोटी-मोटी फाइलों के रख-रखाव के लिए फाइल कैबिनों को भरा जाना पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा था। जिन्हें न जाने कितने   समय तक संभाल कर रखा जाता था।

कार्यालयों में पेपर लेस वर्किंग होने से किसी हद तक फाइलें संजो कर रखने से राहत मिली है। डिजिटलाइजेश्न व कम्प्यूटराइजेशन सिस्टमों ने हमारी जिंदगी को बदल दिया है, जिसके कारण ही हम आज पेपर लेस वर्किंग की तरफ अपने कदमों को बढ़ा रहे हैं। पहले  तो यह शोचनीय विषय है कि हम इस कागज रहित वर्किंग प्रणाली के लिए तैयार हैं भी या नहीं। इस के लिए अपने दृष्टिकोण को भी बदलना है और मानसिक रूप से तैयार होना है। पुरानी पीढ़ी के लिए तो यह एक अटपटा सा  लगता हो, पर युवा पीढ़ी तो इस पेपर लेस वर्किंग के वातावरण में कार्यालयों में प्रवेश कर समय के साथ इस क्षेत्र में हुए बदलाव के साथ इस सिस्टम को सफल करने में सक्षम भी है।  विकिपीडिया के अनुसार  1978 में दि पेपर लेस आफिस शब्द का उपयोग पहली बार एक स्वचलित कार्यालय उपकरण कंपनी माइक्रोनेट इंक द्वारा वाणिज्य में किया था व पेपर लैस कार्यालय की प्रारंभिक भविष्यवाणी 1975 में बिजनेस वीक लेख में की गई थी। विभाग द्वारा कार्यालयों को कागज रहित करने के लिए  कम्प्यूटरीकरण व इंटरनेट जैसी सुविधाओं से लैस तो कर दिया, परंतु कार्यालय पूरी तरह से  पेपर लैस नहीं हो पाए हैं। कार्यालयों, कालेजों व पाठशालाओं में जहां पर्सनल कम्प्यूटर तो हैं, पर उनका सही उपयोग सही रूप में हो पा रहा है या नहीं? क्योंकि कार्यालयों को पेपर लेस करना कार्यालय की पहली प्राथमिकता रहनी चाहिए, ताकि कार्यालय में कागज का उपयोग कम से कम हो सके व कागज निर्माण से हो रहे पर्यावरण नुकसान को कम करने में कागज रहित कार्य प्रणाली को पूरी तरह से अपनाकर कुछ हद तक हम अपना सहयोग दे सकें।   आज भी कागज कार्यालयों के वातावरण का प्रमुख हिस्सा हैं। जहां से फाइलों के ढेर गायब  होने लगे, कार्यालयों के दस्तावेजों को जहां फाइलों में लगाकर सुरक्षित रखा जाता था, वह दिन बहुत पुराने तो नहीं लगते हैं, अभी जैसे कल की बात हो। कागज रहित आधारित प्रक्रियाओं का प्रयोग, जैसे ई-मेल, ई-आफिस प्रणाली इत्यादि कागज के उपयोग को खत्म करने में काफी सहायक सिद्ध हुए हैं। कार्यालय में ज्यादातर कार्य को डिजिटल रूप में परिवर्तित कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है और कार्यालय के दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सहेजा जाने लगा है, ताकि कार्यालय को कागज रहित करने के लिए अपनाई जा रही कोशिशों को सफल किया जा सके। अगर कार्यालय में तकनीक का अभाव है, तो इलेक्ट्रोनिक फाइल सिस्टम को छोड़कर मैनुअल तकनीक से फाइलों को बनाकर अपनाया जा सकता है। शुरुआती दौर में थोड़ी-बहुत दिक्कतों का सामना तो करना पड़ सकता है, परंतु धीरे-धीरे इन तकनीकों से जुड़ना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। कर्मचारियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दे कर प्रशिक्षित करना होगा, तब जाकर कर्मचारियों में इसके बारे में ज्यादा जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होगी।

इस प्रक्रिया के उपयोग से फाइलों का निस्तारण जल्द होने लगेगा व सरकारी कार्य में पारदर्शिता भी आएगी और समय की बचत भी होगी। इससे कर्मचारियों की शिकायतें, शोषण व भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। सरकार ई-प्रशासन से सुशासन की तरफ बढ़ रही है। इसी कड़ी में कार्यालयों में ई-आफिस लागू किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश की विधानसभा का कार्य कागज रहित होने से न जाने कितने पेड़ों को काटने से बचाया गया है। प्रदेश वर्ष 2014 से पूर्ण रूप से पेपर रहित होकर देश के अन्य राज्यों के  लिए एक मिसाल बना है। कार्यालयों में अपनाई जा रही ई-आफिस प्रणाली के तहत  विभागों द्वारा कई प्रकार की सुविधाएं घर-द्वार पर नागरिकों को प्रदान की जानी हैं। इनमें से कुछ जैसे परिवहन, बिजली व टेलीफोन के बिलों को अदा करना हो या अन्य कार्य हो इस प्रणाली के तहत पेपर लेस एवं कैशलैस जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया है। आफिस में फाइलों का ई-आफिस प्रणाली के तहत टेबल से टेबल का सफर खत्म हो रहा है व कम्प्यूटर पर एक क्लिक से फाइलें इधर से उधर दौडें़गी।

अगर समस्त कार्यालय इस प्रणाली से जुड़ते हैं, तो कार्यों में तेजी तो लाई जा सकेगी व करोड़ों की स्टेशनरी की बचत होगी। जहां एक तरफ पेपर लैस प्रणाली से कई तरह के व्यय पर अकुंश लगेगा, वहीं कागज की बचत, पेपरों को स्टोरेज की समस्या से छुटकारा, समय की भी बचत होगी। कागज रहित कार्यालयों का बदलता रूप तो दिख रहा है, पर जब तक प्रिंटरों का  उपयोग कम नहीं होगा, तब तक हम कार्यालयों  के कागज रहित होने के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। चारों ओर प्रगति के इस दौर में हम अभी तक कागज रहित कार्य के लक्ष्य से कुछ ही दूरी पर हैं व इसके लिए एक दृढ़ संकल्प के साथ इसको अपनाना होगा, ताकि आने वाला समय कागज रहित आकर्षक भविष्य हो।