Saturday, November 27, 2021 11:21 PM

डैल्टामैथरिन का छिड़काव कर बचाएं फ्रांसबीन

फ्रांसबीन हिमाचल प्रदेश की मुख्य सब्जियों में से एक है, जिसको बेचकर किसान अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि फ्रांसबीन को सब्जी के रूप में लगाकर अधिक आमदनी मिल सकती है, लेकिन बरसात में उगाई जाने वाली फ्रांसबीन पर कई प्रकार के नाशी कीट इसको काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें दो नाशी कीटों ब्लीस्टर बीटल व बीन का नाशी कीट प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त कभी-कभी कुछ क्षेत्रों में बालों वाली सुंडियां भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। मुख्य नाशी कीट ब्लीस्टर बीटल का विवरण निम्नलिखित है-

पहचान : इस कीट के प्रौढ़ अपेक्षतया बड़े होते हैं, जिनके पीठ पर काले व संतरी रंग के बैंड होते हैं। ये छोटी उड़ान भर कर एक से दूसरे पौधे तक जाते हैं। ब्लीस्टर बीटल मानव शरीर पर छूने पर ब्लीस्टर या छाले पैदा करते हैं। जब इन बीटल को पीसा जाता है, तो यह कई जोड़ों की बीमारियों को ठीक करने के काम भी आता है। इसका प्रयोग शरीर के लिए हानिकारक भी बताया गया है।

नुकसान : इस कीट के केवल प्रौढ़ ही फ्रांसबीन को हानि पहुंचाते हैं। ये बरसात के मौसम में प्रौढ़ कलियों, फूलों तथा फलियों को खाकर काफी नुकसान पहुंचाते हैं। कभी-कभी फूलों को ये प्रौढ़ अकेले में या झुंडों में इतना अधिक नुकसान करते हैं कि फ्रांसबीन में फलियां ही नहीं लगतीं। इनकी संख्या अधिक होने पर ये पत्तों को भी खाने लगते हैं। क्योंकि इस कीट की फूलों या कलियों को खाने की प्रवृत्ति है, जिससे अधिक नुकसान होता है तथा पैदावार काफी कम हो जाती है।

जीवन चक्र : इस कीट का जीवन चक्र बहुत ही विचित्र है। प्रौढ़ पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन इस कीट की सुंडियां टिड्डे/लोकस्ट के अंडों को खाती है। एक मादा अपने जीवन काल में कई हजार अंडे देती है। इन अंडों से 20-20 दिनों के बाद सुंडियां या लारवा निकलते हैं। यह लारवा बहुत ही सक्रिय होता है। इसे ट्राइअन्गुलिन के नाम से जाना जाता है। यह लारवा अंडे से निकलने के बाद टिड्डे के अंडों को ढूंढने के लिए इधर-उधर भागता है तथा उनको खाने लगता है। पूर्ण रूप से विकसित होने पर यह लारवा जमीन में चला जाता है तथा अस्थिर हो जाता है। यह अवस्था 10-30 दिनों तक चलती है। प्यूपेशन जमीन में मिट्टी में होती है तथा इस अवस्था में यह दो महीने तक रहता है। उसके बाद इससे प्रौढ़ फिर से अपना जीवन चक्र शुरू करते हैं।

रोकथाम : इस कीट की रोकथाम के लिए हाथों में दस्ताने पहनकर प्रौढ़ों को पकड़कर एक पानी भरी बाल्टी में डाल दें, जिसमें कीटनाशक डाला हुआ हो।

  1. इस कीट की संख्या को डैल्टामैथरिन (मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करके कम किया जा सकता है। 10-12 दिनों के बाद इस कीटनाशक को फिर से छिड़काव कर सकते हैं।

पत्ते खाने वाली सुंडियां : बरसात में प्रदेश के कई क्षेत्रों में फ्रांसबीन या दलहनी फसलों पर पत्ते खाने वाली सुंडियों का प्रकोप भी होता है। इन की रोकथाम के लिए भी ऊपर लिखित कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है। इन नाशी कीटों के अतिरिक्त बीन का काला बग फ्रांसबीन को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इस बग के बारे में पहले भी अधिक विस्तार से बताया गया है। इस कीट की रोकथाम के लिए फूलों व कलियों के बनने से पूर्व डाइमैथोएट (एक मिली प्रतिलीटर पानी) का छिड़काव करें।

डा केसी शर्मा, डा आरएस राणा,  डा अनिल सूद

The post डैल्टामैथरिन का छिड़काव कर बचाएं फ्रांसबीन appeared first on Himachal news - Hindi news - latest Himachal news.