Tuesday, June 02, 2020 11:55 AM

ड्राइवर-कंडक्टर की समस्याओं का हो समाधान

शिमला - प्राइवेट मिनी बस ड्राइवर एंड कंडक्टर यूनियन का प्रतिनिधिमडल  सीटू के  प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा की अध्यक्षता में अतिरिक्त आयुक्त सुनील शर्मा से मिला व उन्हें ज्ञापन सौंप कर मांगोें पर सकारात्मक कार्रवाई करने की मागं उठाई। अतिरिक्त निदेशक ने भरोसा दिया कि इस मांग पत्र को राज्य सरकार के साथ होने वाली बैठक में रखा जाएगा व निजी बस ड्राइवरों व कंडक्टरों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस दौरान प्राइवेट मिनी बस ड्राइवर एंड कंडक्टर यूनियन शिमला के डाइवरों व कडक्टरों ने कहा कि कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा पीडि़त व प्रभावित मजदूर वर्ग ही है। मजदूर वर्ग में भी निजी परिवहन व्यवस्था से संबंध रखने वाले निजी बस चालक व परिचालक एक भयंकर आर्थिक व सामाजिक संकट में हैं। केंद्र व हिमाचल सरकार  की विभिन्न अधिसूचनाओं के बावजूद मार्च-अप्रैल महीने के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है जिस से इन्हें शिमला शहर जैसी जगह में मकान का किराया चुकाने व रोजमर्रा के खर्चों को निपटाने में बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा एपिडेमिक एक्ट व डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के विशेष प्रावधानों  के अनुसार 20,29 व 30 मार्च  को जारी की गई अधिसूचनाओं के बावजूद उन्हें मार्च-अप्रैल 2020 का वेतन नहीं दिया गया है। सीटू के प्रदेशाघ्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि   कृषि क्षेत्र के बाद देश में असंगठित क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार देने देने वाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर में निजी क्षेत्र की भी अपनी एक भूमिका रही है। उनके कार्य के घंटे भी निर्धारित नहीं हैं। चौदह घंटे तक कार्य लिया जाता है। उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं। उनके लिए अन्य आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा के बारे में कल्पना करना तो किसी सपने से कम नहीं है।

कर्मचारियों की ये हैं मुख्य मागें..

निजी बसों के चालकों-परिचालकों के मार्च-अप्रैल 2020 के वेतन का भुगतान नियोक्ताओं अथवा मालिकों से अविलंब करवाया जाए। कोर्ट के निर्देशानुसार दिल्ली सरकार की तर्ज पर आठ घंटे के कार्य दिवस के लिए 16,500 रुपए न्यूनतम वेतन दिया जाए। केवल आठ घंटे कार्य लिया जाए। आठ घंटे से ऊपर अतिरिक्त कार्य करने पर उन्हें डबल ओवरटाइम के हिसाब से वेतन का भुगतान किया जाए। कोरोना काल में ड्राइवरों व कंडक्टरों को 7500 रुपए मासिक की आर्थिक मदद दी जाए। यातायात सुविधा शुरू होने पर निजी ट्रांसपोर्ट सेवाओं में लगे सभी कर्मियों की उचित देखभाल व जनता की रक्षा के लिए समुचित सुरक्षा का प्रबंध किया जाए व उचित स्वास्थ्य किट मुहैया करवाई जाए। यातायात व्यवस्था शुरू होने पर निजी बस चालकों-परिचालकों का सरकारी तर्ज पर 50 लाख रुपए का बीमा किया जाए।