Monday, September 23, 2019 01:45 AM

तबाही मचाने वाली सीर खड्ड की होगी मॉडल स्टडी

बिलासपुर - मंडी के बाद हमीरपुर में जाहू से बिलासपुर की सीमा में प्रवेश कर घुमारवीं और झंडूता के बलघाड़ होते हुए गोबिंदसागर में मिलने वाली सीरखड्ड के 20 किलोमीटर से ज्यादा एरिया की चैनलाइजेशन के लिए अब मॉडल स्टडी होगी। इस बाबत सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से एक प्रस्ताव सीडब्लयूपीआरएस (सेंटर वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन) पुणे को भेजा गया है। उस ओर से एक्सपर्ट्स की टीम द्वारा लंबे चौड़े दायरे में फैली सीरखड्ड के तटीकरण की स्टडी करने के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर बनाई जाएगी और फंडिंग के लिए (फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम) भारत सरकार को प्रेषित की जाएगी। अभी तक जाहू से लेकर बम्म तक पांच किलोमीटर दायरे में दोनों तरफ सीरखड्ड का तटीकरण किया गया है। क्योंकि इस एरिया में हर वर्ष बरसाती मौसम में बाढ़ के दौरान होने वाले भू-कटाव में किसानों की सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बर्बाद होती थी। बरसात शुरू होते ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलक जाती। सीर खड्ड के चैनेलाइजेशन के लिए विधानसभा से लेकर सड़कों तक बुलंद होने लगी और 1990 में तत्कालीन भाजपा विधायक ने इस मुद्दे को जोरशोर से विधानसभा में उठाया था। इस पर संज्ञान भी लिया गया और चैनलाइजेशन को लेकर योजना बनाने के लिए निर्देश हुए। दरअसल, जाहू से लेकर घुमारवीं तक सीर खड्ड के किनारे सैकड़ों बीघा किसानों की उपजाऊ भूमि हर साल बाढ़ से बर्बाद होती है। सीर खड्ड में जाहू से बम्म तक पांच किलोमीटर तक 1426.54 लाख रुपए से चैनेलाइजेशन किया गया है। मगर बम्म से नीचे घुमारवीं और इससे आगे झंडूता हलके के बलघाड़ तक चैनेलाइजेशन न होने के कारण यहां पर सीर खड्ड का खतरा बरकरार है, जिससे बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही यहां पर लोगों में भय सताने लगता है। ताजा स्थिति में आईपीएच विभाग घुमारवीं की ओर से सीर खड्ड के शेष बचे दायरे को कवर करने के मद्देनजर मॉडल स्टडी करवाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए पुणे सेंटर के विशेषज्ञों को स्टडी कर रिपोर्ट तैयार करने बाबत लिखा गया है। विशेषज्ञों द्वारा स्टडी करने के बाद जो रिपोर्ट तैयार की जाएगी उसी के आधार पर अगली कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। अहम बात यह है कि जब तक बम्म से लेकर घुमारवीं होते हुए झंडूता के बलघाड़ तक सीर खड्ड का चैनलाइजेशन नहीं हो जाता है तब तक हर साल बरसात किसानों की जमीन पर कहर बरपाती रहेगी। उधर, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग घुमारवीं के अधिशाषी अभियंता ईं. सतीश शर्मा ने बताया कि हर साल बरसाती मौसम में बाढ़ के दौरान तबाही मचाने वाली सीर खड्ड का बम्म से लेकर घुमारवीं और झंडूता के बलघाड़ तक चैनलाइजेशन करने के लिए मॉडल स्टडी करवाई जाएगी, जिसके लिए पुणे सेंटर को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही एक्सपर्ट्स टीम बिलासपुर आकर स्टडी कर रिपोर्ट बनाएगी।

आईपीएच को 1.28 करोड़ का नुकसान

इस बार 18 अगस्त की रात हुई भयंकर बारिश ने जिला में बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। इसके तहत आईपीएच विभाग की सीर खड्ड पर आधारित 16 पेयजल और छह सिंचाई योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 1.28 करोड़ रुपए के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है।