Wednesday, June 26, 2019 11:22 AM

तेगुबेहड़ अस्पताल में मरीज ही बने मोहरा

भुंतर—सता का सुख भोगने की खातिर सियासतदानों ने मरीजों को ही मोहरा बना रखा है। करोड़ों की राशि खर्च कर सरकार ने जिला कुल्लू के भुंतर के साथ लगते तेगुबेहड़ में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तैयार किया है लेकिन इस अस्पताल में सुविधाओं को प्रदान करने के लिए राजनैतिक हुक्मरानानें की गुथमगुत्थी के बीच हजारों मरीजों की जान पर बन आई है। लिहाजा, चुनावी बेला पर वोटर इस अस्पताल का लेखा-जोखा सियासी दलों से मांग रहे हैं तो नेताओं के जबाब देते नहीं बन रहा है। पिछले करीब एक दशक से सरकार जिला अस्पतालों के बोझ को कम करने के लिए उपमंडलों और अन्य कस्बों में छोटे अस्पताल खोलने पर जोर दे रही है लेकिन सता की चाबी हाथ में लिए राजनैतिक दल इन अस्पतालों को बनाने के लिए करोड़ों खर्च करने के अलावा सुविधाओं के नाम पर कुछ भी उपलब्ध करवाने को राजी नहीं हो रहे हैं।जिस पर राजनैतिक रंगों के छींटे ऐसे पड़े हैं कि धोए नहीं धुल रहे हैं। करीब 20 हजार की आबादी को सुविधा देने की क्षमता रखने वाले इस अस्पताल में मरीज रात्री सुविधा आरंभ होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सियासी नाटक के चलते ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इस अस्पताल को बनाने के लिए वैसे तो रूपरेखा करीब दस साल पहले से बननी आरंभ हो गई थी लेकिन साल 2018 में यह पूरी तरह से तैयार हो गया। मणिकर्ण, दियार, गड़सा, खोखण, मौहल क्षेत्रों के अलावा बजौरा और मंडी जिला की स्नोर घाटी के लोगों के लिए यह अस्पताल केंद्र बिंदु है। बाकायदा इसके लिए जरूरी प्रक्त्रिया भी पूरी की गई है। स्वास्थ्य विभाग के खंड विकास अधिकारी डा. रणजीत सिंह ठाकुर के अनुसार इस बारे में दस्तावेज तैयार कर भेज दिए गए हैं। राजनैतिक जानकारों के अनुसार कुछ माह पहले यहां पर रात्री सेवा आरंभ करने को सरकार ने हरी झंडी देने का मन बना लिया था लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के नेताओं की खिचड़ी ने काम खराब कर दिया। इससे पहले इसके निर्माण पर भी खूब भाजपा-कांग्रेस होती रही है। रात्री सेवा न मिलने के कारण अस्पताल में चार बजे के बाद इलाज नहीं हो पाता है और कई मरीजों को मजबूरन कुल्लू और अन्य स्थानों के लिए भेजना पड़ता है।