Monday, April 06, 2020 05:06 PM

…तो कैसे हारेगा कोरोना?

धीरे-धीरे भारत में शटडाउन की स्थितियां बनती जा रही हैं। यह दहशत या खौफ  की नहीं, सार्वजनिक यथार्थ की एक बानगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल ने फिलहाल कहा है कि भारत में कोरोना वायरस का सामुदायिक प्रसार अभी नहीं हुआ है। बेशक सरकार ने अच्छे प्रयास किए हैं, लेकिन यह नाकाफी है। अभी जिस स्तर पर कोरोना संक्रमित लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं, वह गति बहुत धीमी है, उसे और विस्तार देने की जरूरत है। यदि यह महामारी तीसरे चरण में पहुंच गई, तो कमोबेश भारत के लिए बड़ी मुसीबत होगी। यह चेतावनी भी हमारे देश को गंभीर नहीं होने दे रही है। अब भी औसत भारतीय भगवान या अल्लाह के भरोसे है। शाहीन बाग पर औरतों का धरना-प्रदर्शन 95 दिन पूरे कर चुका है। वहां अचानक तख्त भी बिछ गए हैं, लेकिन नानियां-दादियां कोरोना के महामारी कानून और आदेश को न मानने पर अड़ी हैं। वे कोरोना से ज्यादा घातक और जानलेवा नागरिकता संशोधन कानून और संभावित एनआरसी को मान रही हैं। शाहीन बाग की इस जिद पर न तो सरकार कुछ कर पा रही है और न ही वे लोग आज मौजूद हैं, जिन्होंने इस प्रदर्शन को भड़काया-सुलगाया था। यदि एक भीड़ इस तरह जमा रहेगी, तो फिर कोरोना वायरस के जानलेवा प्रभावों से कैसे बचा जा सकेगा? संवैधानिक अधिकार तब हैं, जब यह देश ठीक-ठाक रहेगा या प्रदर्शनकारियों की जान सलामत रहेगी। लोग सामाजिक दूरी और जमावड़े की भाषा नहीं समझ पा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों, मेट्रो रेल, पार्कों, बाजारों में लोग हाथ मिला रहे हैं, बिना सावधानी बरते खांस-छींक रहे हैं, गले मिल रहे हैं और आदतन सड़कों पर सरेआम थूक रहे हैं। हमारा दावा यह नहीं है कि इन व्यवहारों से कोरोना को फैलने का आधार मिलेगा, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दुनिया भर के चिकित्सा विशेषज्ञ ‘सामाजिक दूरी’ और ‘जमावड़े’ पर चिंता और सरोकार जरूर जता रहे हैं। यदि स्कूल-कालेज, प्रख्यात आस्था-केंद्र और मंदिर, कई रेलगाडि़यां, कुछ खास देशों की उड़ानें, मॉल, सिनेमाघर, सरकारी दफ्तर आदि को बंद किया गया है, तो उसके पीछे एक ही तार्किक कारण है कि लोगों के बीच दूरी बनी रहे, मेल-मिलाप कम हो, ताकि कोरोना के सामुदायिक फैलाव का तीसरा चरण शुरू ही न हो सके। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीएम को पत्र लिख कर पूछा है कि शाहीन बाग में बच्चों को भी क्यों बिठाया जाता रहा है? कोरोना पर बार-बार दोहराया जा रहा है कि यह कोई ‘बारूदी वायरस’ नहीं है, लिहाजा दहशत और खौफ  खाने की जरूरत नहीं है। अलबत्ता सचेत और सतर्क नहीं रहे, तो इटली, ईरान, स्पेन वाले हालात पैदा होने में देर कितनी लगती है? दुनिया में कोरोना से संक्रमित या प्रभावित लोगों की संख्या 2 लाख के पार जा चुकी है। मौत का आंकड़ा करीब 9000 हो चुका है। इटली में 2500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और ईरान में यह आंकड़ा 1100 पार कर चुका है। फिलहाल चीन में नए केस सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन वहां 3200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। बेशक यूरोपीय देशों और अमरीका की तुलना में भारत बहुत बेहतर स्थिति में है, लेकिन हमारे देश में संक्रमण की संख्या 169 तक पहुंच चुकी है। करीब 300 संक्रमित भारतीय विदेशों में हैं। यदि उन्हें वापस लाना पड़ा, तो आंकड़ा क्या होगा? मौत दस्तक देकर नहीं आती, कारण और हालात उस ओर ले जाते हैं, लिहाजा हमारे लिए परहेज और सावधानी बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी देश के नाम कमोबेश यही संदेश दिया है। कोरोना धर्म या मजहब पूछकर भी नहीं फैलेगा, लिहाजा जिद छोड़ कर शाहीन बाग को बंद करना भी देशहित में है।