Monday, September 23, 2019 02:41 AM

त्योहारों पर अवकाश का बंटवारा क्योें

प्रेमलता

लेखिका, अध्यापिका हैं

सभी राष्ट्रीय त्योहारों की तरह हमारा देश प्रतिवर्ष दो बड़े त्योहारों रक्षाबंधन एवं भाईदूज को भी बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धापूर्वक मनाता है। हिमाचल प्रदेश में इन त्योहारों पर प्रदेश की नौकरीपेशा महिलाओं को विशेष अवकाश का प्रावधान सरकार ने कर रखा है, लेकिन प्रतिवर्ष इन त्योहारों के दिनों में अकसर लोगों को कहते सुना जा सकता है कि भाइयों के अवकाश के बिना बहनों को अवकाश का क्या महत्त्व रह जाता है, जब ये दोनों त्योहार भाई-बहन  के बिना अधूरे हैं...

हमारे देश और प्रदेशों में प्रतिवर्ष 20-22 सार्वजनिक और वैकल्पिक अवकाश होते हैं, जिन्हें लोग अपने-अपने धर्म, समुदाय के महत्त्व के अनुसार बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं। प्रत्येक त्योहार का अपना महत्त्व होता है, अपनी संस्कृति होती है। भारतवर्ष अनेकता में एकता का संदेश देने के लिए विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। सभी राष्ट्रीय त्योहारों की तरह हमारा देश प्रतिवर्ष दो बड़े त्योहारों रक्षाबंधन एवं भाईदूज को भी बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धापूर्वक मनाता है, हिमाचल प्रदेश में इन त्योहारों पर प्रदेश की नौकरी पेशा महिलाओं को विशेष अवकाश का प्रावधान सरकार ने कर रखा है, लेकिन प्रतिवर्ष इन त्योहारों के दिनों में अकसर लोगों को कहते सुना जा सकता है कि भाइयों के अवकाश के बिना बहनों को अवकाश का क्या महत्त्व रह जाता है, जब ये दोनों त्योहार भाई-बहन  के बिना अधूरे हैं। स्वयं नौकरी पेशा महिलाएं भी इन अवकाशों पर असहजता महसूस करती हैं जब उनके नौकरी पेशा भाई अपने कार्य पर जाने की तैयारी में होते हैं या फिर शाम को समय पर लौट नहीं पाते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह देखने में मिलती है कि जब शिक्षण संस्थानों में पढ़ रही लड़कियों, स्कूलों में मिड-डे मील वर्कर, महिला चपरासी (रात्रि सेवा) को यह अवकाश नहीं होता है।

स्कूल-कालेज में पढ़ने वाली लड़कियां, मिड-डे मील वर्कर, महिला चपरासी भी किसी की बहनें होती हैं, उनके लिए भी यह त्योहार उतना ही महत्त्व रखते हैं, जितना नौकरी पेशा महिलाओं के लिए। रक्षाबंधन एवं भाईदूज के दिन शिक्षण संस्थानों में अव्यवस्था का आलम रहता है। कई स्कूलों में महिला टीचर अधिक होने से वहां कार्यरत पुरुष अध्यापकों को उस दिन सभी कक्षाओं को स्कूल समय तक समेट कर रखना पड़ता है। उस दिन पढ़ाई नाम की कोई चीज स्कूलों में नहीं होती है। सरकारी कार्यालयों में भी महिला कर्मचारियों के अवकाश  होने के कारण उनके कुर्सी के कार्य ठप रहते हैं। कारणवश लोगों को अपना कार्य करवाने के लिए अगले दिन ही आना पड़ता है। सभी इस बात से परिचित हैं कि स्त्री-पुरुष समाज के दो पहिए हैं, एक के बिना भी इस जीवन की गाड़ी नहीं चलती है। इन त्योहारों पर अगर भाई अपनी बहन के इंतजार में होता है तो उसकी पत्नी, मां या भाभी ने भी अपने भाई को राखी बांधने या तिलक लगाने जाना होता है और उनको उनके मायके पहुंचाने का उत्तरदायित्व भी उसी व्यक्ति का होता है, जो इन त्योहारों पर अपनी बहन के इंतजार में होता है और आने वाली उस बहन को भी भाई के घर छोड़ने की जिम्मेदारी भी तो उसके पति पर ही कुछ न कुछ जरूर होती है। कहने का तात्पर्य है कि अवकाश भले ही महिलाओं के लिए होता है, लेकिन पुरुषों के लिए भी इन त्योहारों का उतना ही महत्त्व और जिम्मेदारी है।

 न जाने सरकार ने हिंदू धर्म के इन मुख्य दो त्योहारों पर मात्र महिला कर्मचारियों को अवकाश देकर अपनी किस सोच को अंजाम दिया है? हमारे देश-प्रदेश में कई ऐसे त्योहार हैं, जो भिन्न-भिन्न धर्मों-समुदायों के लिए अपने विशेष महत्त्व रखते हैं। कई बार कुछ विशेष धर्म, जाति या समुदाय के महत्त्वपूर्ण त्योहारों या महापुरुषों की जयंती के अवकाशों पर प्रत्येक व्यक्ति विशेष रुचि नहीं लेता है, बल्कि उनके स्वयं के समुदाय के लोग भी इन पर मिलने वाले अवकाशों के महत्त्व से अनभिज्ञ होते हैं, लेकिन रक्षाबंधन एवं भाईदूज जैसे त्योहारों को प्रत्येक जाति एवं समुदाय के बच्चे, बूढ़े और जवान प्रतिवर्ष बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं और हर साल इन त्योहारों के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़े इन त्योहारों पर मात्र महिला कर्मचारियों के अवकाश पर प्रदेश की जनता इन दिनों प्रतिवर्ष असमंजस की स्थिति में रहती है।

 प्रदेश सरकार या संगठन में बैठे प्रबुद्ध व्यक्ति अगर इस लेख को पढ़ें तो अवश्य इस पर चिंतन करें कि अगर भाई-बहन से जुड़े इन त्योहारों का वास्तव में ही विशेष महत्त्व है तो इन दोनों त्योहारों पर भी सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की पहल करें, जिससे भाई-बहन दोनों के लिए यह त्योहार यादगार पल बन सके।

स्कूल-कालेज जाने वाली लड़कियां, मिड-डे मील वर्कर इत्यादि भी इन त्योहारों को श्रद्धापूर्वक मना सकें। अगर सरकार को लगता है कि इन त्योहारों का महत्त्व केवल महिलाओं तक ही सीमित है तो यह अवकाश नौकरी पेशा महिलाओं के लिए भी रद्द कर दिया जाए जिस प्रकार स्कूल-कालेज जाने वाली लड़कियों, मिड-डे मील वर्कर इत्यादि के लिए भी इन त्योहारों पर वर्तमान में कोई अवकाश नहीं होता। मेरा हिमाचल प्रदेश सरकार से आग्रह है कि वह बहनों के साथ-सात भाइयों की सुविधा के लिए भी इन दिनों में सार्वजनिक अवकाश घोषित करे ताकि न तो बहनों को दिक्कत हो और न ही भाइयों को कोई समस्या आए। रक्षाबंधन और भैयादूज ऐसे त्योहार हैं जो भाई अथवा बहन में से किसी एक की भी अनुपस्थिति में नहीं मनाए जा सकते हैं। आशा है कि अगला त्योहार आने से पहले सरकार इस दिशा में कारगर कदम उठाएगी।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक