दर्जनों बच्चों को निःशुल्क कोचिंग

दर्जनों बच्चों को निशुल्क कोचिंग देने में श्याम लाल हांडा बने मास्टर प्लानर सच्चे गुरु की सोच बुलंदियां छूने वाली हो तो बच्चे ही आगे नहीं बढ़ते, बल्कि उस गुरु की योजना पर चलने से अन्य गुरुओं का कुनबा भी अग्रसर होता है और समाज में एक अलग सी छवि बना लेता है। जी हां हम यहां पर बात कर रहे हैं उन गुरुजी की, जो देवभूमि कुल्लू में जन्में हैं और आज उनकी देवभूमि की तरह अलग सी पृष्टभूमि है। जहां शिक्षक के कुनबे को परिवार की तरह चलाने में अपनी अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। वहीं, कुल्लू के बच्चों का भविष्य कैसे संवर सकता है, इसका भी टीजीटी श्याम लाल हांडा ने एक अलग मास्टर प्लान तैयार किया है और उस प्लान पर पिछले एक वर्ष से धरातल पर कार्य कर रहे हैं। इनकी बच्चों को आगे ले जाने की योजना प्रगति पर है। इन्हें मास्टर प्लानर भी कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है। बता दें कि कुल्लू के श्याम लाल हांडा टीजीटी अध्यापक के साथ-साथ टीचर होम कमेटी के अध्यक्ष हैं। इस कमेटी को इन्होंने इस कद्र चलाया है कि शायद प्रदेश के अन्य जिलों में कहीं भी इनकी जैसी योजना पर कार्य आरंभ नहीं हो पाया है। इनकी पूरी योजना लगभग बच्चों के भविष्य को संवारने की है। इन्होंने जो योजना तैयार की, उस योजना को धरातल पर उतारने के लिए इनकी कमेटी के सभी लोगों ने हामी भरी। बता दें कि कुल्लू की टीचर होम कमेटी पूरे प्रदेशभर में बिलकुल अलग सा कार्य बच्चों को पढ़ाने में कर रहे हैं। जहां श्याम लाल हांडा दिन के समय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भुंतर में बच्चों को ज्ञान बांटकर सरकार के सच्चे कर्मचारी का फर्ज अदा कर रहे हैं। वहीं, इसके बाद टीचर होम कमेटी का कार्य कर बच्चों को अलग से शिक्षित करने के कार्य में डट जाते हैं। बता दें कि श्याम लाल हांडा ने अपनी टीचर होम कमेटी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ वार्तालाब कर पिछले एक वर्ष से जिला कुल्लू में नवोदय परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों को निशुल्क कोचिंग शुरू कर दी है। पिछले वर्ष से लेकर अब तक 310 के करीब बच्चों को निशुल्क कोचिंग दी गई है और कार्य जारी रखा है। इनकी सोच ने 25 के करीब उन गरीब बच्चों को निशुल्क पाठ्य सामग्री प्रदान की, जो शायद आज तक कहीं भी नहीं हुआ होगा।  इसके अलावा इनकी योजना आगामी समय में कुल्लू के बच्चों के लिए और भी ज्यादा लाभदायक होगी। अगला लक्ष्य इनका निशुल्क करियर काउंसलिंग के साथ-साथ रोजगार से संबंधित निशुल्क कोचिंग करवाना है। वहीं, वर्ल्ड बुक डे के दिन टीचर होम कमेटी 200 के करीब बच्चों को बुक बांटेगी। इसके साथ-साथ यह कुल्लू की संस्कृति बचाने में भी अपना अलग से योगदान दे रहे हैं।  वहीं, आपदा प्रबंधन में जिला सलाहकार समिति में शामिल हैं। वहीं, नेहरु युवा केंद्र जिला सलाहकार समिति में रहकर भी यह बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। 1995 से लेकर ज्ञान विज्ञान समिति में भी काम करते आए हैं। इन्होंने गाइड लाइन बुक सत्त समग्र मूल्यांकन लिखी है। सोलो सिस्टम पर इनिमेशन लेस्ट लिखा है। 1995 में साक्षरता अभियान में काम किया है। सरकारी सेवा में 1997 से हैं। चार साल जेबीटी, 7 साल कला अध्यापक और 9 वर्ष इन्हें टीजीटी पर हुए हैं। लगभग जिला के 14 स्कूलों में अब तक सेवाएं दे चुके हैं। इनमें कई दूर दराज के स्कूल भी शामिल हैं। ग्रामीण बच्चों को पठन-पाठन में क्या दिक्कतें आती है, इसी आधार पर इनकी सोच ने काम करना शुरू कर दिया और आज यह बच्चों के भविष्य के लिए मसीहा से कम नहीं है।

मुलाकात  : शिक्षक पूरी उम्र विद्यार्थी ही रहता है...

शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच रिश्ते की मजबूती के लिए कौन से पहलू आवश्यक हैं?

अध्यापक को विद्यार्थियों की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि का पता होना चाहिए साथ ही उसके मनोविज्ञान से भी परिचित हो। अध्यापक बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम होना चाहिए।

टीचर होम कमेटी दरअसल है क्या?

टीचर होम कमेटी शिक्षकों की एक संस्था है जिसमें कुल्लू जिला के सरकारी स्कूल के एक सौ ज्यादा से शिक्षक सक्रिय सदस्य हैं। यह संस्था पिछले कई दशकों से निशुल्क नवोदय की कोचिंग, दसवी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए गणित की कक्षाओं का इंतजाम और एक बुक बैंक भी चलाती हैं जिसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निशुल्क पुस्तकें आवंटित की जाती हैं।

आपका लक्ष्य कैसे निर्धारित होता है तथा इसमें छात्रों की क्षमता की समीक्षा कैसे करते हैं?

अध्यापक होने के नाते हम प्रत्येक विद्यार्थी को आंकने के लिए अलग-अलग विधियां अपनाते हैं चूंकि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता और गति में फर्क होता है। जांचने की विधियां भी भिन्न होती हैं। यही देख कर लक्ष्य निर्धारित होते हैं।

बच्चों को आगे बढ़ने की उत्सुकता तथा प्रतिस्पर्धा के लिए कैसे तैयार करते हैं?

प्रत्येक अध्यापक का लक्ष्य बच्चों को आगे बढ़ना होता है। उनकी मानसिक और बौद्धिक क्षमता को ध्यान में रख कर उन्हें तैयार किया जाता है प्रेरणा दायी प्रांसगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों के बारे बता कर उन्हें प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाता है।

वर्तमान शिक्षा पद्धति को कहां दोषपूर्ण मानते हैं?

सीखने की प्रवृत्ति में कमी आना चिंता का विषय है। हमें नई तकनीक के साथ कदम ताल करना होगा। विद्यार्थी की रुचि के अनुसार हमें अपने को ढालना होगा तथा बदलते परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करने में हमें बच्चे की सहायता करनी होगी तभी उनमें गंभीर अध्ययन प्रवृत्ति को विकसित किया जा सकेगा।

युग की परिभाषा में कुछ परिवर्तन अनिवार्य है?

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बहुत सी कमियां हो सकती हैं,परंतु मुख्य रूप से व्यव्यसायिक शिक्षा का अभाव शिक्षा पद्धित को दोषपूर्ण बनाती है, जो विद्यार्थी पढ़ने लिखने में अच्छा न हो, लेकिन उनमें दूसरे कार्यों में निपुणता होती है उन्हें इस शिक्षा पद्धित में कोई कारगर अवसर नहीं मिल रहे हैं।

बतौर शिक्षक आप अपना मूल्यांकन कैसे करते हैं?

विद्यार्थियों के शैक्षणिक बौद्धिक और नैतिक सुधार को आधार मानकर एक शिक्षक अपने किए हुए कार्यों का मूल्यांकन करता है विद्यार्थियों के व्यतित्व में आए सकारात्मक सुधार से हम अपना मूल्यांकन करते हैं।

पढ़ाने में जो संतोष है वह पढ़ने से कहीं अधिक है?

हां ये बात सही है पढ़ने में सिर्फ  एक व्यक्ति का विकास होता है जबकि शिक्षण करने से हम एक समूह के विकास में भागदारी निभाते हैं। किसी को पढ़ना संतोष प्रदान करता है, लेकिन ये बात भी सही है शिक्षक सारी उम्र भर विद्यार्थी ही रहता है। उसे सीखने का हूनर नहीं भूलना चाहिए।

क्या अभिभावक अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालकर उनकी सृजनात्मक या स्वाभाविक क्षमता को नष्ट कर रहे हैं?

अभिभावकों की अपने बच्चों से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं । अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों की रुचियों के विपरीत अपनी इच्छाओं को उन पर थोप रहे हैं। जिसकी वजह उनको अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर नहीं मिलते। इस से उनकी सृजनात्मक क्षमता खत्म हो जाती है।

क्या शिक्षा खुद में दौड़ बनती जा रही है और अगर ऐसा हो रहा है, तो छात्र समुदाय की सहज क्षमता को किस तरह निखारा जाए?

शिक्षा क्षेत्र में प्रतियोगिता और प्रतिस्पर्धा को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के नाम पर अनावश्यक दबाव डालना भी न्यायसंगत नहीं है अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चे की रुचि को ध्यान में रखते हुए उसे विषय चयन में सहयोगी की भूमिका निभाएं।

क्या परीक्षा पद्धति के वर्तमान ढर्रे में छात्रों का सही मूल्यांकन हो रहा है?

वर्त्तमान शिक्षा पद्धति में सिर्फ  शैक्षणिक आधार पर विद्यार्थी का मूल्यांकन होता है जबकि अन्य विशेषताओं और क्षमताओं के मूल्यांकन के अवसर नहीं हैं। सतत समग्र मूल्याकंन की प्रणाली को हर स्तर लागू करना चाहिए सिर्फ  लिखित परीक्षा के आधार पर मूल्याकंन करने से विद्यार्थियों की समग्र क्षमताओं का आकलन नहीं किया जा सकता।

आपके लिए वर्तमान शिक्षा पद्धति में सबसे आशावान चेहरा क्या है?

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में शिक्षा का अधिकार मिलने से उन करोड़ों बच्चों के सपनों को उड़ान दी है जिनके हाथों की अंगुलियां किताब पकड़ने को  मचलते रहे, जो कभी स्कूल के प्रांगण के बाहर से खाली आखों से अंदर के दृश्य की सिर्फ झलक भर पाने को तरसते थे। शिक्षा का अधिकार ऐसे बच्चों को वरदान साबित हुआ है।

  • मोहर सिंह पुजारी, कुल्लू

 

 

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