Tuesday, September 25, 2018 12:53 PM

दस योगिनियों का ध्यान कर पूजन करें

षष्ठमावरण : म कार से क्ष कार तक दस वर्णों से सुशोभित दशदल में उदीयमान सूर्य सम आभावाली तथा हाथों में ज्ञानमुद्रा, टंक, पाश तथा वरमुद्रा धारण करने वाली सर्वज्ञा आदि दस योगिनियों का ध्यान कर पश्चिम से प्रारंभ कर विलोम क्रम से पूजन करें। ध्यान मंत्र इस प्रकार है : सर्वरक्षाकरे चक्र उद्यद्भास्कर सन्निभाः। ज्ञानमुद्राटंक पाशवरधारि कराम्बुजाः...

-गतांक से आगे...

पंचमावरण : ण कार से क्ष कार तक वर्णों से सुशोभित दशदल में जापाकुसुम के समान आभावाली दैदीप्यमान आभूषणों से अलंकृत तथा हाथों में पाश एवं अंकुश धारण करने वाली दस योगिनियों का ध्यान कर विलोम-क्रम से पूजन करें। ध्यान मंत्र इस प्रकार है :

सिद्धिदा दशयोगिन्यो जपापुष्पसमप्रभाः।

स्फुरन्मणि विभूषाद्याः पाशांकुशलसत्कराः।।

ह्रीं श्रीं णं सर्वसिद्धिप्रदा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं तं सर्वसंपत्प्रदा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं थं सर्वप्रियंकरी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं दं सर्वमंगलकरी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं धं सर्वकामप्रदा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं नं सर्वदुःखविमोचिनी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं पं सर्वमृत्युप्रशयनी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं फं सर्वविघ्ननिवारिणी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं बं सर्वांगसुंदरी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं भं सौभाग्यदायिनी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

उपरोक्त पूजन के बाद ‘सर्वार्थसाधके चक्रे इमा दश कुलयोगन्यः पूजिता संतु’ कहकर मूल मंत्र जपते हुए पुष्पांजलि अर्पित करें, साथ ही उन्माद मुद्रा भी प्रदर्शित करें।

षष्ठमावरण : म कार से क्ष कार तक दस वर्णों से सुशोभित दशदल में उदीयमान सूर्य सम आभावाली तथा हाथों में ज्ञानमुद्रा, टंक, पाश तथा वरमुद्रा धारण करने वाली सर्वज्ञा आदि दस योगिनियों का ध्यान कर पश्चिम से प्रारंभ कर विलोम क्रम से पूजन करें। ध्यान मंत्र इस प्रकार है :

सर्वरक्षाकरे चक्र उद्यद्भास्कर सन्निभाः।

ज्ञानमुद्राटंक पाशवरधारि कराम्बुजाः।।

ह्रीं श्रीं मं सर्वज्ञा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं यं सर्वशक्ति देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं रं सर्वैश्वर्यफलप्रदा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं लं सर्वज्ञानमयी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं वं सर्वव्याधि विनाशिनी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं शं सर्वाधार स्वरूप देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं षं सर्वपापहरा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं सं सर्वानंदमयी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं हं सर्वरक्षा स्वरूपिणी देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं क्षं सर्वेप्सितार्थ फलप्रदा देवी श्रीपादुकां पूजयामि।

इस प्रकार पूजन कर ‘सर्वरक्षाकरे चक्रे इमा दशनिगर्भयोगिनी योगिन्यः पूजिता संतुः’ कहकर पुष्पांजलि अर्पित करें, इसके

साथ ही महांकुशा मुद्रा का प्रदर्शन भी

करना चाहिए।

सप्तमावरण : अष्टदल में अनार के पुष्प जैसी आभावाली, रक्तवर्णी वस्त्रों से अलंकृत तथा हाथों में धनुष, बाण, विद्या एवं वर धारण करने वाली, न्यासोक्त वशिनी आदि देवियों का ध्यान कर अकारादि वर्णों में तथा पूर्वोक्त बीजों के साथ पश्चिम से प्रारंभ कर विलोम-क्रम से पूजन करें। ध्यान मंत्र इस प्रकार है :

सर्वरोग हरे चक्रे दाडिमी पुष्पसन्निभां।

रक्तांशुका धनुर्बाण विद्यावर लसत्कराः।।

ह्रीं श्रीं अं आं वशिनी वाग्देवता श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं इं ईं कौमारी वाग्देवता श्रीपादुकां पूजयामि।

ह्रीं श्रीं उं ऊं मोहिनी वाग्देवता श्रीपादुकां पूजयामि।

                                     -क्रमशः