Monday, April 06, 2020 06:40 PM

दिउड़ी मंदिर

रांची से 70 किलोमीटर दूर तमाड़ प्रखंड में स्थित दिउड़ी मंदिर में मां दुर्गा के सोलहभुजी रूप की पूजा होती है। कई मीलों का सफर तय करके भक्त रांची के मंदिर में पहुंचते हैं। माता की मूर्ति बाजूबंद, कमरधनी, बाली आदि आभूषणों से सजी हुई है। देश के दूसरे मंदिरों की तुलना में इस मंदिर की अलग मान्यता है। यहां आपको पुजारी की भूमिका में आदिवासी पाहन और ब्राह्मण दोनों मिलेंगे। इस मंदिर के निर्माण को लेकर सदियों से बहस जारी है, मगर इसका निर्माण कब, किसने और क्यों करवाया इस पर एक राय नहीं बन पाई है। एक कथा के अनुसार माना जाता है कि सिंहभूम के केरा राजा अपने दुश्मनों से जंग हारने के बाद दिउड़ी पहुंचे थे। वो अपने साथ देवी मां की मूर्ति भी लेकर आए और उसे वेणु वन में जमीन के अंदर छिपा दिया था। उसके कुछ दिनों बाद वहां मंदिर का निर्माण किया गया और प्रतिमा स्थापित की गई। दूसरी कथा के अनुसार ओडिशा के चमरू पंडा वर्ष में दो बार तमाड़ के राजा को तसर बेचने के लिए आते थे। वो राजा के यहां पूजा-पाठ भी करा दिया करते थे। राजा ने उन्हें वहीं बस जाने के लिए मना लिया। राजा की बात मानकर उन्होंने जंगल में तपस्या करना आरंभ कर दिया और इस दौरान उन्हें लगा कि मां उनसे भेंट करना चाहती है। उन्होंने ये बात राजा को बताई। राजा ने जंगल की सफाई करवाई। इस दौरान काले रंग का पत्थर दिखा। मजदूर शाम होने के कारण थक कर वापस लौट गए। जब वे दूसरे दिन लौटे तब उन्हें वहां एक मंदिर खड़ा दिखाई दिया।