दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे...

सुधौतकर्मणाऽऽराध्या युगांतदहनात्मिका।

सङ्कर्षिणी जगद्धात्री कामयोनिः किरीटिनी।। 116।।

ऐंद्री त्रैलोक्यनमिता वैष्णवी परमेश्वरी।

प्रद्युम्नजननी बिम्बसमोष्ठी पद्मलोचना।। 117।।

मदोत्कटा हंसगतिः प्रचण्डा चण्डविक्रमा।

वृषाधीशा परात्मा च विंध्या पर्वतवासिनी।। 118।।

हिमवन्मेरुनिलया कैलासपुरवासिनी।

चाणूरहंत्री नीतिज्ञा कामरूपा त्रयीतनुः।। 119।।

व्रतस्नाता धर्मशीला सिंहासननिवासिनी।

वीरभद्रादृता वीरा महाकालसमुद्भवा।। 120।।

विद्याधरार्चिता सिद्धसाध्याराधितपादुका।

श्रद्धात्मिका पावनी च मोहिनी अचलात्मिका।। 121।।

महाद्भुता वारिजाक्षी सिंहवाहनगामिनी।

मनीषिणी सुधावाणी वीणावादनतत्परा।। 122।।

श्वेतवाहनिषेव्या च लसंमतिररुंधती।

हिरण्याक्षी तथा चैव महानंदप्रदायिनी।। 123।।

वसुप्रभा सुमाल्याप्तकंधरा पङ्कजानना।

परावरा वरारोहा सहस्रनयनार्चिता।। 124।।

श्रीरूपा श्रीमती श्रेष्ठा शिवनाम्नी शिवप्रिया।

श्रीप्रदा श्रितकल्याणा श्रीधरार्धशरीरिणी।। 125।।    

-क्रमशः