Monday, November 18, 2019 04:31 AM

दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम

-गतांक से आगे...

श्रीकलाऽनंतदृष्टिश्च ह्यक्षुद्राऽऽरातिसूदनी।

रक्तबीजनिहंत्री च दैत्यसङ्गविमर्दिनी।। 126।।

सिंहारूढ़ा सिंहिकास्या दैत्यशोणितपायिनी।

सुकीर्तिसहिताच्छिन्नसंशया रसवेदिनी।। 127।।

गुणाभिरामा नागारिवाहना निर्जरार्चिता।

नित्योदिता स्वयंज्योतिः स्वर्णकाया प्रकीर्तिता।। 128।।

वज्रदण्डाङ्किता चैव तथाऽमृतसञ्जीविनी।

वज्रच्छन्ना देवदेवी वरवज्रस्वविग्रहा।। 129।।

माङ्गल्या मङ्गलात्मा च मालिनी माल्यधारिणी।

गंधर्वी तरुणी चांद्री खड्गायुधधरा तथा।। 130।।

सौदामिनी प्रजानंदा तथा प्रोक्ता भृगूद्भवा।

एकानङ्गा च शास्त्रार्थकुशला धर्मचारिणी।। 131।।

धर्मसर्वस्ववाहा च धर्माधर्मविनिश्चया।

धर्मशक्तिर्धर्ममया धार्मिकानां शिवप्रदा।। 132।।

विधर्मा विश्वधर्मज्ञा धर्मार्थांतरविग्रहा।

धर्मवर्ष्मा धर्मपूर्वा धर्मपारङ्गतांतरा।। 133।।

धर्मोपदेष्ट्री धर्मात्मा धर्मगम्या धराधरा।

कपालिनी शाकलिनी कलाकलितविग्रहा।। 134।।

सर्वशक्तिविमुक्ता च कर्णिकारधराऽक्षरा।

कंसप्राणहरा चैव युगधर्मधरा तथा।। 135।।   

-क्रमशः