Wednesday, July 08, 2020 06:31 PM

देवता धुंबल की नाराजगी पर बैठेगी देव संसद

 भगवान रघुनाथ जी ने देव जगती का दिन किया तय, ढालपुर में व्यापारियों ने दुकानें लगा किया था देवस्थल अपवित्र

कुल्लू -देवभूमि स्थित अठारह करडू की सौह ढालपुर कुल्लू में देवता धुंबल नाग का अस्थायी शिविर अपवित्र होने के मुद्दे पर अब भगवान रघुनाथ जी के दरबार में देव संसद बैठेगी। जगती करवाने का दिन भगवान रघुनाथ जी ने तय कर दिया है। यह जगती भगवान रघुनाथ जी के दरबार 24 नवंबर रविवार को होगी] जिसमें कुल्लू, बंजार, आनी, मनाली, सैंज, मणिकर्ण, गड़सा घाटी के साथ-साथ जितने देवी-देवी-देवता विश्व के सबसे बड़े व अनूठे देव समागम यानी अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में भाग लेते हैं, उन सभी को निमंत्रण भेजा जा रहा है। जगती में भाग लेने वाले देवी-देवता निशान में पुजारी-गूर तथा अन्य मुख्य कारकूनों के साथ विराजमान होंगे। इस देव जगती को लेकर भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बुधवार को परिधिगृह कुल्लू में प्रेस वार्ता की। उन्होंने इस दौरान कहा कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव संपन्न होने के बाद सभी देवी-देवता अपने देवालय पहुंचे। इसी बीच जब ढालपुर स्थित देवता धुंबल नाग के अस्थायी शिविर वाले स्थान को ठेकेदार ने व्यापारियों को दुकानें लगाने के लिए अलाट किया और यहां पर खाने-पीने  की दुकानें सज गई। ऐसे में देवता धुंबल नाग  अपने  मूल स्थान हलाण से ढालपुर में अपनी जगह अपवित्र होने पर नाराज हुए। कारकूनों और हारियानों संग फिर रथ मैदान में विराजमान होकर देवता ढालपुर पहुंचा। यही नहीं, देवता ने इस दौरान उपायुक्त और एसपी कुल्लू कार्यालय को भी घेरा और अस्थायी शिविर वाले स्थान में लगी दुकानों को तुरंत हटाने के निर्देश भी दिए गए। जब प्रशासन ने माफी मांगी तो उसके बाद देवता शांत हुए। इस दौरान जुर्माना भी लगाया था। इसी बीच देवता ने भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह को भी जगती बुलाने के निर्देश दिए गए। मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि उन्होंने धुंबल नाग के इस मसले को भगवान रघुनाथ जी के समक्ष रखा और भगवान ने भी इस मसले पर जगती करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ जी ने जगती के लिए 24 नवंबर का दिन जगती के लिए दिया है। उन्होंने बताया कि इसमें विजय दशमी में आने वाले सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा जाएगा। यह जगत भगवान रघुनाथ जी मंदिर में होगी और 11 बजे जगती का समय है। ऐसे में सभी देवी-देवता दस बजे तक मंदिर में पहुंचने जरूरी है।   उन्होंने कहा कि जिला देवी-देवता कारदार संघ के सभी खंडों के अध्यक्षों से भी संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जगती में सभी देवी-देवताओं से पूछ की जाएगी और जो भी निर्णय देवता देंगे, उसका देव समाज पालन करेगा। उन्होंने कहा कि देवधूनों के दौरान जो शंख ध्वनि 12 बजे बजाई गई हैं, उस पर भी देवी-देवता नाराज हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह जगती देव आदेशों पर ही होती है। इससे पहले भी कई बार हुई हैं। पहली जगती नग्गर में जगतपट्ट में होती है। यहां बड़े मुद्दे पर जगती होती है, जबकि दूसरी जगती रघुनाथपुर मंदिर और ढालपुर स्थित भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी शिविर में भी कई बार जगती हुई है। देव जगती के दौरान देवी-देवता एक स्वर में क्या आदेश देते हैं, उस पर देव समाज कार्य करता है। लिहाजा, 24 नवंबर को देव स्थल अपवित्र और देवस्थालों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर जगती होगी।