Thursday, August 22, 2019 05:47 PM

देवना गांव में शांद पर्व की धूम

ग्रामीणों ने अपने बिरादरी-रिश्तेदारों को बुलाया पर्व में, तीन वर्ष के बाद मनाया जाता है त्योहार

नौहराधार -सावन के महीनों में हर मंदिर देवालयों में श्रद्धालुओं की काफी चहलपहल देखने को मिल रही है। वहीं जिला सिरमौर का गिरिपार क्षेत्र पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए भी प्रदेश में जाना जाता है। चाहे खान-पान में हो चाहे पारंपरिक त्यौहार हो गिरिपार क्षेत्रों में सभी त्योहार मनाए जाते हैं, जिसका उदाहरण देवना गांव में देखने को मिला। यहां पर प्राचीन विजट महाराज के मंदिर में शांद धूमधाम से मनाया गया। इस पर्व में इस गांव के लोगों ने अपने दाईचारे के लोगों को व रिश्तेदार को मेहमान के तौर पर बुलाया। इस अवसर पर गांव के लोग एक-दूसरे की संस्कृति के बारे में जानकारी सांझा करते हैं। लोगों ने पारंपरिक लिंबर देव स्तुति ढोल-नगाड़ांे के साथ शांद का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों व शहनाइयों के साथ कई देवी-देवताओं की पालकियां शांद में पहुंची। जब सभी पालकियों ने शिरकत की तो तभी देविक कार्य शुरू हुआ। इस मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शांद पर्व में लगातार बारिश लगी रही, मगर आस्था की डोर में बंधे श्रद्धालु लगातार बारिश में विजट महाराज का जयकारा लगाते रहे और देवता के गण अठखेलियां कर रहे थे। यहां के कुल देवता विजट महाराज व उनके भाई शिरगुल महाराज मुख्य रूप से उपस्थित होकर सभी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देते हैं। शांद पर्व के अवसर पर जिला सिरमौर के अलावा अन्य जिलों से भी श्रद्धालुओं ने शिरकत की। गौरतलब है कि यह महायज्ञ कई पीढि़यों से देवना में तीन वर्षों के बाद होता है। शांद पर्व में विजट महाराज के समस्त अनुयायी और विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी उपस्थति दर्ज करवाते हैं। यहां पर शिरगुल महाराज के कारिंदे ऐसी कलाएं दिखाते हैं। इसके अतिरिक्त यहां पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जिसे दूर-दूर से आए लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि शांद पर्व करने से क्षेत्र में सुख-स्मृद्धि, खुशहाली एवं रक्षा के लिए किया जाता है। शांद महायज्ञ पर्व मुख्य रूप से विजट महाराज को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस महायज्ञ को सफल बनाने के लिए स्थानीय पंडितों के अलावा क्षेत्र के कई विद्वान पंडितों एवं आचार्य को बुलाया गया। शांद महायज्ञ में पारंपरिक लिंबर देव स्तुति गान व ढोल-नगाड़ों एवं बंदूकों की गूंजों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। जब देव गान शुरू होता है अधिकतर लोगों में कंपन हो जाती है व देवता की हवा वाणी आने से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, जिस समय पारंपरिक देव स्तुति गान को गाया जाता है सभी लोग तलवारें डांगरा लहराते हुए झूमते हैं। यह दृश्य काफी ज्यादा मनमोहक दृश्य होता है।