Friday, October 18, 2019 11:25 AM

देवभूमि हिमाचल चिट्टे की चपेट में

डा. मनोज डोगरा

लेखक, हमीरपुर से हैं

आज इस शांति प्रिय प्रदेश से नशे की खबरें आ रही हैं, चाहे नशे में चिट्टा, चरस, गांजा, हिरोइन या भांग हो, आए दिन खबरें आती हैं कि किसी से किलो बरामद तो किसी से 600 ग्राम बरामद, किसी की चिट्टे के ओवरडोज से मौत या फिर नशे ने उजाड़े कई घरों के चिराग। ये खबरें हिमाचल के लिए अब सामान्य हो गई हैं, जोकि एक सोचने का विषय है कि आखिर क्यों ऐसी खबरें और घटनाएं हो रही हैं? आखिर इन नशे के सौदागरों के पीछे किसका हाथ है? क्या सरकार इन पर कार्रवाई नहीं कर सकती या फिर इनके पीछे रसूखदारों का हाथ है...

हिमाचल प्रदेश को पहले केवल पर्यटन की दृष्टि से  देखा जाता था, लेकिन अब हिमाचल नशे के सौदागरों के लिए किसी बाजार से कम नहीं है। नशे के सौदागर पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों से नशे को हिमाचल में ला रहे हैं। हिमाचल एक ऐसा प्रदेश जिसे देव भूमि के नाम से जाना जाता था। आज इस शांति प्रिय प्रदेश से नशे की खबरें आ रही हैं, चाहे नशे में चिट्टा, चरस, गांजा, हिरोइन या भांग हो, आए दिन खबरें आती हैं। किसी से किलो बरामद तो किसी से 600 ग्राम बरामद, किसी की चिट्टे के ओवरडोज से मौत या फिर नशे ने उजाड़े कई घरों के चिराग। ये खबरें हिमाचल के लिए अब सामान्य हो गई हैं, जोकि एक सोचने का विषय है आखिर क्यूं ऐसी खबरें और घटनाएं हो रही हैं? आखिर इन नशे के सौदागरों के पीछे किसका हाथ है?

क्या सरकार इन पर कार्रवाई नहीं कर सकती या फिर इनके पीछे रसूखदारों का हाथ है? अभी हाल ही में सुजानपुर में एक युवक की नशे की ओवरडोज से मौत हो गई जबकि हमीरपुर में होटल में युवकों से हाल ही में चिट्टा बरामद हुआ। साथ ही में सलौणी में भी युवकों से नशीले पदार्थ बरामद हुए। आखिर इस शांति प्रिय प्रदेश को हो क्या गया है जहां का युवा नशे की ओर जा रहा है। अगर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान न किया गया तो एक दिन ऐसा आ जाएगा कि हिमाचल को नशे के बाजार के रूप में जाना जाएगा, जो कि हिमाचल के लिए एक बहुत बुरी बात होगी। हिमाचल जैसे प्रदेश में बात होनी चाहिए, पर्यटन की, शिक्षा की, रोजगार की, यातायात सुविधाओं की, विकास के चरणों की लेकिन हिमाचल में बात हो रही है नशे की। हिमाचल सरकार ऐसे प्रबंध कर रही है कि नशा खत्म हो लेकिन सरकार को ऐसे कदम उठाने  चाहिएं कि इन नशे के सौदागरों पर नकेल कसी जाए, इन पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, इन्हें जेलों में डालना चाहिए। अगर यही हाल रहे तो हिमाचल से नशेड़ी ही निकल सकते हैं, होनहार विद्यार्थी नहीं। चिट्टा आखिर हिमाचल में आ कहां से रहा है, इसको बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, इसका ज्यादा व्यापार पंजाब से हिमाचल को होता है, नशे के दलालों पर कार्रवाई होना जरूरी हैं। पिछले कुछ वर्षो के आंकडों की बात करें तो हिमाचल में साल 2016 में 501 अभियुक्तों के साथ 432 केस दर्ज किए गए, इस दौरान चाहे चरस,चाहे हेरोइन या स्मैक हो या कोकीन हो। इसी तरह साल 2017 में 695 अभियुक्तों के खिलाफ  573 केस रजिस्टर किए गए। लेकिन 2018 में  छह महीनों के भीतर ही पुलिस ने 789 अभियुक्तों के खिलाफ 653 केस फाइल किए। इनमें सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पुलिस की गिरफ्त में कुछ  विदेशी तस्कर भी आए। ये पिछले कुछ सालों की तुलना में दोगुनी है। 2019 मे भी कई संख्या मे नशा तस्कर पकड़े गए, चाहे वे हमीरपुर में हो मंडी में हो या फिर कुल्लू या फिर पंजाब से लगते सीमावर्ती जिले हो जिनमें ऊना एक गढ़ है। पुलिस जहां इसे अपनी एक बड़ी सफलता मानती है, वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि नशाखोरी हिमाचल प्रदेश में कितनी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। सरकार ने नशे पर कुछ कड़े नियम लागू किए है, लेकिन आवश्यक यह है कि स्थानीय लोगों को भी इस अभियान में पुलिस के साथ सहयोग करना चाहिए, अन्यथा हिमाचल, नशीला हिमाचल बन जाएगा। खासकर युवा वर्ग इस चिट्टे की चपेट में ज्यादा आ रहा है नशे के सौदागर घर से दूर पढ़ रहे बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं, ये ही युवा इनके लिए नशे को बेचने के लिए  किसी मेगा बाजार के सामान है, अगर युवा ही इस दलदल मे धंस रहा है तो देश और प्रदेश कैसे आगे बढ़ सकता है, युवा वर्ग ही देश की रीढ़ की हड्डी होती है, अगर यही नशे की गिरफ्त में होगा तो प्रदेश व देश का कुछ नहीं हो सकता। हिमाचल प्रदेश पुलिस को लगातार नशा निवारण अभियानों मे सफलता मिल रही है, लेकिन यह अभियान स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता है। इसलिए लोगों को भी पुलिस को अधिक से अधिक सहयोग देना होगा। नहीं तो हिमाचल को नशीला हिमाचल बनाने से कोई नहीं रोक सकता। यह वर्तमान समय में पंजाब के बाद हिमाचल के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इन्हे रोकना बहुत आवश्यक है नहीं तो इसके परिणाम समाज में दिखना प्रारंभ हो जाएंगे।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक