Monday, June 24, 2019 05:55 PM

देश को डुबोएगा जातिवाद का नारा

भारत के महापर्व लोकसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस महापर्व में हिमाचल के मतदाता 19 मई को आहुति डालेंगे, लेकिन महापर्व में जाति, धर्म, संप्रदाय की आड़ लिए इसे खूब खंडित भी किया जाता है। ऐसा कोई मौका नहीं, जब राजनीतिक दल जाति के समीकरण नहीं देखते। चुनावों में जातिवाद पर जब ‘दिव्य हिमाचल’ ने जनता की नब्ज टटोली तो उन्होंने कुछ यूं बयां की मन की बात... मंडी से आशीष भरमोरिया की रिपोर्ट

चुनावों में न हो जातिवाद, परिवारवाद

लोक गायक सूरज मेहता ने कहा कि भारत में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। देश में जातिवाद, धर्म और परिवारवाद के मुद्दे पर चुनाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत देश सभी धर्मों को मानने वाला देश है। जो भी चुनाव हो तो सभी धर्मों को लेकर साथ लेकर चलें।

भावी पीढ़ी उठेगी जातिवाद से ऊपर

आकाश शर्मा ने कहा कि बहुत ज्यादा चुनाव जातीय समीकरण पर आधारित रहते हैं। हालांकि संविधान निर्माताओं ने जिस संविधान की परिकल्पना की थी उसे हम आज भी पूरा नहीं कर पाए हैं। नौजवान पीढ़ी जिस तरह से जागरूक हो रही है और युवाओं को जैसी शिक्षा मिल रही है, यह पीढ़ी भविष्य में जातिवाद, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर मतदान करेगी।

जाति के आधार पर न मिले टिकट

पाल वर्मा ने बताया कि लोकतंत्र के इस महापर्व में जाति के आधार पर राजनीति करना देश की दशा और दिशा के लिए सही नहीं है। जातिगत आधार पर टिकट मांगना और रजनीति करना देश को अलग-थलग करने की कोशिश है। भारत में बहुत सी जातियों के लोग रहते हैं। सभी के बीच में भाईचारा बना रहना चाहिए। इसलिए जाति के आधार पर राजनीति हरगिज नहीं होनी चाहिए।

ऊंच-नीच की भावना गलत

खेम चंद का कहना है कि देश में एक जहां वीर सैनिक सरहद पर देश की रक्षा के लिए शहीद हो रहे हैं, वहीं अंदर ही जातिवाद के नाम गठजोड़ ऊंच नीच की भावना रखना गलत है। सभी लोगों को मिलजुल कर विश्व शांति को दुनिया भर में संदेश देना चाहिए।