Monday, April 06, 2020 06:07 PM

दोषी पुलिस कर्मियों को जल्द निलबिंत करे एसपी कांगड़ा

बीबीएन - कोरोना वायरस के चलते लागू कर्फ्यू के दौरान पत्रकारों पर हो रहे हमले की नेशनल यूनियन आफ इंडिया एनयूजेआई ने कड़ी निंदा की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी, महामंत्री प्रसन्ना मोहंती, हिमाचल के अध्यक्ष रणेश राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन करते हुए कहा था कि इस महामारी से लड़ने में मीडिया का भी अहम योगदान था और रहेगा। परंतु पिछले दो दिनों में देखने में आया है कि देश के दो पत्रकारों पर हुए हमले पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार रात्रि अपना काम पूरा करके घर आ रहे ‘दिव्य हिमाचल‘ समाचार पत्र के संपादक संजय अवस्थी के साथ पुलिस ने जांच के नाम पर बदसलूकी की। हालांकि उनके पास उचित कारण व परिचय पत्र था लेकिन उन्होंने वह भी देखना गवारा नहीं समझा। रणेश राणा ने कहा कि कर्फ्यू की गाइडलाइन में साफ लिखा है कि कर्फ्यू  के दौरान प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया को कवरेज करने की इजाजत दी गई है। इसके बाद भी समाचार संपादक को दूर्भावना से प्रेरित होकर प्रताडि़त करना किसी भी स्तर पर सहन नहीं किया जाएगा। अगर एसपी कांगड़ा ने रविवार तक इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की तो पत्रकार यूनियन का संर्घष और तेज हो जाएगा। एनयूजे इंडिया ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले की न्यायिक जांच की जाए। उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता पर कुठाराघात बर्दाशत नहीं किया जाएगा। एनयूजे ने कहा कि दिल्ली में भी एक पत्रकार पर पुलिस के हमले की राष्ट्रीय इकाई ने कड़ी निंदा करके राष्ट्रपति से जांच की मांग की है। वहीं हिमाचल में हुए समाचार संपादक पर हुए हमले की एनयूजेआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जोगिंद्र देव आर्य, ठाकुर जितेंद्र सिंह, हेमंत शर्मा, सुमित शर्मा, सुरेंद्र अत्री, महिला विंग की अध्यक्ष सीमा शर्मा, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल हेडली, रितेश चौहान, विशाल आनंद, अशोक महाजन, दविंद्र ठाकुर, गोपाल दत्त शर्मा, सुरेश ठाकुर, रणवीर ठाकुर, जिला अध्यक्षों में रविंद्र तेजपाल, राजन पुंडिर, बंसीधर शर्मा, सुभाष ठाकुर, गौरी शंकर, राकेश शर्मा, मनमोहन शर्मा, चैन सिंह गुलेरिया, विजय ठाकुर, नीरज सोनी, रतन लाल नेगी, समर सिंह नेगी आदि ने कहा कि हम शुरू से ही मांग करते रहे हैं कि जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट का गठन केंद्र व प्रदेश सरकारें करें। अगर इसका गठन हो जाता तो आज तक यह नौबत न आती।