दो बार की विफलता भी आईपीएस बनने से रोक नहीं पाई

प्रोफाइल

नाम  : कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन

जन्मस्थान : कर्नाटक

जन्मतिथि : 7 दिसंबर, 1987

आईपीएस बैच :  2014

पिता : केवी गोकुलचंद्रन

माता :  संध्या गोकुलचंद्रन

शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली व नागपुर से, उच्च शिक्षा श्रीलंका से, बंगलूर से 2005 से 2010 तक बीडीएस की शिक्षा प्राप्त की।

अब तक इन पदों पर दी सेवाएं..

2010 में बीडीएस करने के बाद करीब छह माह डेंटिस्ट के रूप में सेवाएं दीं। बतौर आईपीएस 2015 से 2019 तक केरल कैडर में कार्यरत रहते हुए डीसीपी कोच्चि ,एसपी सबरीमाला, एसीपी कोलर, एंटी टेरारिस्ट फोर्स त्रिवेंद्रम के मुखिया के रूप में सेवाएं दीं। 2019 में हिमाचल कैडर में आने पर मंडी विजिलेंस में एसपी रहे। वर्तमान में एसपी ऊना के रूप में कार्यरत।

बचपन से पुलिस अफसर की यूनिफॉर्म के आकर्षण ने व्यक्तित्व में ऐसी छाप छोड़ी कि युवा कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन दंत चिकित्सक बनने के बाद भी सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए जुट गए। दो प्रयासों में असफल रहने के बाद तीसरी बार जब आईपीएस परीक्षा में 196वां रैंक हासिल किया, तो ऐसा लगा मानो सारा जहां जीत लिया उनके पिता केवी गोकुलचंद्रन भी भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे व पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पिता को रोल मॉडल मानते हुए बेटे कार्तिकेयन ने भी पुलिस अधिकारी बनने का सपना मन में संजोया था, जिसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर पूरा किया। सबरीमाला जिला में जब पूरे देश की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी तो कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने बतौर एसपी अपनी पहली पोस्टिंग में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच स्वयं को साबित किया तथा पूरे मसले को बेहतर ढंग से निपटाया। कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन सरदार वल्लभ भाई पटेल अकादमी हैदराबाद में अपने बैच के बेस्ट स्विमर रहे। वहीं, उन्होंने रॉयल स्कूल ऑफ म्यूजिक लंदन से वेस्टर्न क्लासिकल गिटार की विद्या भी सीखी। स्पोर्ट्स के भरपूर शौकीन युवा अधिकारी कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन जहां बेहतर तैराक हैं, वहीं बैडमिंटन में भी हाथ आजमा लेते हैं। स्कूल व कालेज समय के दौरान औसत छात्र रहे कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन पढ़ाई के अलावा खेलों व अन्य गतिविधियों में भी आगे रहे। कालेज के दौरान वह छात्र संघ के महासचिव चुने गए। उनका मानना है कि केवल पढ़ाई में बेहतर रहने वाले बच्चे ही प्रतियोगी परीक्षाओं में अव्वल नहीं आते, बल्कि विभिन्न गतिविधियों में लगातार सक्रिय विद्यार्थी भी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

मुलाकात :वही विषय चुनें, जिनकी पूरी समझ हो...

आपके अनुसार आईपीएस होने का मतलब क्या है?

आईपीएस होने से जिम्मेदारी का एहसास होता है, वहीं इसके माध्यम से जनता की सेवा व उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करने का अवसर मिल पाता है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली, नागपुर में हुई, जबकि पिता जी की आईबी में श्रीलंका में तैनाती के दौरान उच्च शिक्षा श्रीलंका में प्राप्त की। वहीं, बंगलूर से 2005 से 2010 तक बीडीएस की शिक्षा प्राप्त की।

छात्र के रूप में  हासिल उपलब्धियों में आप स्वयं को 10 में से कितने अंक देंगे?

बचपन से ही मैं एवरेज स्टूडेंट रहा हूं। पढ़ाई के साथ-साथ मैं खेल व अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहा। विशेषकर कालेज में छात्र संघ का महासचिव भी रहा। परीक्षा के दिनों में अवश्य पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करता था। स्टूडेंट्स के रूप में मैं स्वयं को 10 में से छह अंक दूंगा।

आप प्रशासनिक सेवा में आएंगे, इसके लिए कब सोचा?

बीडीएस करने के उपरांत मुझमें आत्मविश्वास आया। बीडीएस परीक्षा में मैं गोल्ड मेडलिस्ट था। अपने विश्वविद्यालय में तीसरे स्थान पर रहा था। इससे पहले बचपन से ही पिता जी को यूनिफॉर्म में देखकर आईपीएस बनने की सोचता जरूर था, लेकिन खुद को तैयार नहीं कर पा रहा था। बीडीएस में बेहतर प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा व सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए प्रेरित हो पाया।

आपने  सिविल सर्विस परीक्षा में कौन से विषय चुने और क्यों?

सोशियोलॉजी विषय को चुना था। यह विषय चुनते समय मैंने पाया कि मैं इसे समझ सकता हूं व इसे उत्तीर्ण कर सकता हूं।

आईपीएस बनने के लिए आपको कितने प्रयास करने पड़े। इसके लिए प्रेरणा कहां से मिली?

मैं तीसरे प्रयास में आईपीएस की परीक्षा पास कर पाया। मेरा रैंक 196वां रहा।

आईपीएस के लिए कितने समय तक तैयारी की और रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

आईपीएस बनने के लिए करीब तीन वर्ष तक लगातार प्रयास करता रहा। तीसरे प्रयास में मुझे सफलता मिली। रोजाना करीब 12 घंटे पढ़ता था। वहीं, स्वयं को तरोताजा करने के लिए हर रोज शाम को जिम भी जाता था। साथ ही करीब एक घंटा स्विमिंग करता था।

सिविल सर्विस परीक्षा के लिए क्या पढ़ा जाए, इसका चयन कैसे करें?

सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने के लिए बच्चों को अपने मनपसंद विषय को चुनना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए वे सहज महसूस कर सकें। विषय वही चुनें, जिसकी उन्हें पूरी समझ हो।

कंपीटीटिव एग्जाम के लिए आजकल कोचिंग का चलन बढ़ रहा है। क्या यह उपयोगी है?

निश्चित तौर पर बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन जरूरी है। बच्चों को पता होना चाहिए कि वे क्या पढ़ें और किस तरह तैयारी करें, लेकिन अंततः बच्चों को खुद ही पढ़ना होता है।

आपका काम सामान्य अफसरों से किस प्रकार अलग है?

मैं स्वयं को सामान्य अधिकारियों की तरह में ही देखता हूं। मैं हर दूसरे अधिकारी की वर्किंग से सीखने का प्रयास करता हूं।

आम व्यक्ति के नजरिए से कहें, तो एसपी की नौकरी में तनाव। क्या सचमुच ऐसा है?

ऐसा कुछ नहीं है। हां, बतौर एसपी आप कुछ ज्यादा व्यस्त हो जाओगे। जब आपने बतौर आईपीएस ज्वाइन कर लिया, तो हर पोस्टिंग एक बराबर है।

अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को किस सोच के साथ सेवा में आना चाहिए?

अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को सकारात्मक सोच लेकर आगे आना चाहिए। युवा वर्ग किसी भी पद पर कार्य करे, वे अपना शत-प्रतिशत दें। साथ ही ईमानदारी से दिए हुए दायित्व को निभाने का प्रयास करें।

आईपीएस बनने की सोच रहे नौजवानों को आप तैयारी के लिए क्या टिप्स देना चाहेंगे?

आईपीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ साक्षात्कार के लिए भी विशेष तैयारी करनी चाहिए। सबसे पहले तो खुद के बायोडाटा को पूरी तरह से जानना चाहिए। जीवन में हमेशा पॉजिटिव रहें और यह मत भूलें कि हर एक चैंपियन कभी न कभी एक प्रतिभागी था, जिसने हार मानने से इनकार कर दिया था।

अनिल पटियाल, ऊना

 

 

 

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