Friday, September 20, 2019 12:14 AM

धर्म और विज्ञान

ओशो

दुनिया में दो ही तरह के पागल लोग हैं, वे जो हमेशा अतीत की बात करते हैं और थोड़े जो भविष्य की बात करते हैं। अतीत की बात करने वाले इतिहासविद, पुरातत्वविद इत्यादि होते हैं। जो भविष्य की बात करते हैं वे पैगंबर, कल्पनाशील, कवि होते हैं। मैं दोनों ही नहीं हूं। मेरा सारा संबंध इस क्षण से है। अभी यहां मैं पैगंबर नहीं हूं, लेकिन एक बात मैं कह सकता हूं और इसका असल में भविष्य से कुछ लेना-देना नहीं है। यह अभी यहीं घट  रहा है।लोग अंधे हैं, इसलिए देख नहीं सकते। मैं देख सकता हूं, यह पहले ही हकीकत बन चुका है। बड़ी से बड़ी बात जो हो रही है,जो बाद में समझ में आएगी, वह है धर्म और विज्ञान का मिलन, पूर्व और पश्चिम का मिलन,भौतिकता और आध्यात्मिकता का मिलन, बाह्य और अंतस का मिलन, अंतर्मुखी और बाह्यर्मुखी का मिलन, लेकिन यह अभी ही हो रहा है, यह भविष्य में विकसित होगा, लेकिन मेरा संबंध वर्तमान से है और मैं बहुत प्रसन्न हूं कि कुछ बहुत ही महान बात होने को है। एडिंग्टन अपनी आत्मकथा में कहता है, जब मैंने अपने जीवन की शुरुआत एक वैज्ञानिक की तरह की तो मैं सोचता था कि दुनिया चीजों से चलती है, लेकिन जैसे मैं विकसित हुआ, वैसे-वैसे मैं अधिक से अधिक सचेत हुआ कि दुनिया में सिर्फ  चीजें ही नहीं होती, बल्कि विचार भी होते हैं। मेरी अपनी दृष्टि यह है कि हमें जोरबा दि बुद्धा का निर्माण करना होगा। जो नया बुद्ध होगा वह जोरबा दि ग्रीक और गौतम बुद्ध का मिलन होगा। यहां कई तरह के वैज्ञानिक हैं। कवि और संगीतकार, चित्रकार हैं। सभी तरह के लोग और ये सभी एक साथ एक महान प्रयास के लिए जुटे हैं ध्यान के लिए। यहां सिर्फ  एक मिलन का बिंदु है और वह है ध्यान। सिर्फ  एक बिंदु पर वे मिलते हैं अन्यथा सभी की अपनी वैयक्तिक यात्रा है। इस मिलन द्वारा अद्भुत विस्फोट संभव है। जिनके पास आंखें हैं, वे यह घटते यहां देख सकते हैं।पृथ्वी पर यही एक जगह है जहां दुनिया के सारे देशों के प्रतिनिधि मिलेंगे। हम यहां पर रूस के लोगों को उठा रहे थे और अब मैं यह बताते प्रसन्न हूं कि रूस से भी लोग यहां आ गए हैं। सभी वर्ग यहां मिल रहे हैं, सभी धर्म यहां मिल रहे हैं। यहां पर छोटा सा संसार है, छोटी सी दुनियां और हम सभी यहां पर मानव की तरह मिल रहे हैं। कोई ईसाई नहीं है, हिंदू नहीं है या मुसलमान नहीं है। कोई नहीं जानता कि कौन वैज्ञानिक है, कौन संगीतकार है, कौन चित्रकार है, कौन प्रसिद्ध अभिनेता है, कोई कहता भी नहीं। सभी एक दूसरे के साथ सही ढंग से पेश आते हैं। आगे बढ़ने के लिए यह बहुत जरूरी है कि हम बेकार के झूठे आडंबरों में न उलझें। प्रगति के पथ पर वही अग्रसर हो सकता है, जो सभी के साथ चलने की कला जानता है। अन्यथा पीछे तो अनगिनत पड़े रहते हैं।