Tuesday, February 18, 2020 07:45 PM

नई करवटों में बिंदल

हिमाचल में भाजपा का संगठन एक नई तैयारी और नए समीकरणों के मध्य कुछ नए पन्ने लिखना चाहता है। पार्टी के भीतर सियासत से सत्ता और सत्ता से संगठन के नए रिश्ते, अनुभव व प्रयोग की कसौटियों पर अनेक नाम उछले, लेकिन सहमति के साथ डा. राजीव बिंदल एक संभावना बनकर उभरे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने हिमाचल में पार्टी का चेहरा चुन लिया है और अगर सियासत की यही तासीर है, तो अब तक जारी उछलकूद पर विराम लगेगा और राज्य की बिसात में एक वरिष्ठ नेता अपने रंग और ढंग से नई हस्तियां संवारेगा। सत्ता और संगठन की अब तक की पारियों में भाजपा के निवर्तमान हो रहे अध्यक्ष सतपाल सत्ती अपने संतुलन की समीक्षा करके रुखसत होंगे। पार्टी के अतीत में शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल जैसे नेताओं के बीच कार्यकर्ताओं के सामंजस्य और पार्टी के संतुलन को बरकरार रखने का किरदार सत्ती ने बखूबी निभाया। ऐसे में भविष्य की बागडोर केवल दायित्व का स्थानांतरण नहीं, बल्कि नए क्षितिज पर राजनीति हलचल सरीखा है। यह इसलिए क्योंकि डा. राजीव बिंदल अपनी वरिष्ठता, सरकार के पूर्व मंत्री व वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते पार्टी को नए मुकाम तक पहुंचा सकते हैं। भाजपा के लिए राष्ट्रीय से राज्यीय स्तर तक पिछला दशक स्वर्णिम रहा है, लेकिन अब चुनौतियां फिर उठने लगी हैं। दूसरी ओर हिमाचल में सत्ता की परंपरा जिस तरह रही है, उसे देखते हुए हर पांच साल के बाद सरकारों के लिए खुद को दोहराना आसान दिखाई नहीं देता, अतः पार्टी के नए राज्याध्यक्ष व मुख्यमंत्री के बीच अगले तीन साल का समय सस्पंदन का होना चाहिए। सरकार और संगठन के बीच भाजपा के अपने अनुशासन रहे हैं, फिर भी आम कार्यकर्ता की नजर में नेताओं का कद हमेशा सर्वोपरि रहा है। यह अवसर वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को कुछ विशेषाधिकार देता है और उनके प्रशासनिक दायित्व की कसौटी पर ही पार्टी का मनोबल सक्रिय रूप से प्रदर्शित होगा। जिन संभावनाओं से पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व डा. राजीव बिंदल का नाम आगे कर रहा है, उससे उनका निजी अक्स भी बड़ा हो रहा है। इससे पहले कई नाम चले और उनके आधार पर क्षेत्रीय राजनीति का गणित व सत्ता से नजदीकी का फलक भी देखा जा रहा था। बावजूद इसके कि डा. राजीव बिंदल वर्तमान सरकार में मंत्री के रूप में नहीं देखे गए, बतौर विधानसभा अध्यक्ष उनका व्यवहार व अनुभव प्रमाणित हुआ तथा राजनीतिक हलकों में उनकी छवि परिमार्जित रही। हिमाचल में उनके कद व क्षमता के नेता विरले ही दिखाई देते हैं। पूर्ववर्ती धूमल सरकार में उनका मंत्रिमंडलीय कौशल अपने प्रभाव का एक खास परिचय दे चुका है, लिहाजा संगठन के बीच उनका नया उभार सामान्य घटनाक्रम नहीं है। यह केवल राज्य में पार्टी अध्यक्ष का चयन नहीं, बल्कि डा. राजीव बिंदल की क्षमता को नए सिरे से अंगीकार करना है। इन तमाम करवटों के सान्निध्य में चल रही सियासत के कई धु्रव हो सकते हैं, लेकिन केंद्र से भाजपा ने हिमाचल को संदेश भेजने की नई परिपाटी जरूर तैयार की है। अध्यक्ष पद की दौड़ तक हिमाचल के जो नेता चिन्हित थे, उन महत्त्वाकांक्षाओं को विराम देकर भाजपा आलाकमान भविष्य को रेखांकित कर रहा है। भाजपा के पूर्ण राष्ट्रीय अध्यक्ष होने जा रहे जगत प्रकाश नड्डा की सहमति से डा. राजीव बिंदल विधानसभा अध्यक्ष का पद छोड़कर जिम्मेदारी ओढ़ रहे हैं, तो हिमाचल भाजपा के नए चेहरों का इंतजार रहेगा। जाहिर है पार्टी और सरकार के नए संतुलन-नए सेतु के रूप में डा. राजीव बिंदल को जिम्मेदारी का एक बड़ा परिदृश्य खड़ा करना है।