Monday, April 06, 2020 06:39 PM

नई पुस्तक : महासुवी लोक संस्कृति

पुस्तक समीक्षा

हाल ही में युवा लेखिका उमा ठाकुर की नई पुस्तक ‘महासुवी लोक संस्कृति’ प्रकाशित हुई है। उमा ठाकुर पिछले चार साल से इस पर कार्य कर रही थीं। इसी कड़ी में वर्ष 2016 में आकाशवाणी शिमला से भी ‘महारा महासु’ शीर्षक से उनका नाटक तेरह किस्तों में प्रसारित हो चुका है। उमा ठाकुर आकाशवाणी शिमला की कैजुअल अनाउंसर भी हैं। जैसा कि हम जानते हैं जिला शिमला महासु का परिवर्तित स्वरूप है जिसका गठन तीस छोटी-बड़ी रियासतों और ठकुराइयों से हुआ है। उमा का बचपन कोटगढ़ के कोफनी मैलन गांव में बीता है, इसलिए उन्हें इस क्षेत्र के रीति-रिवाज, परंपराओं, इतिहास और लोक संस्कृति का अच्छा खासा अनुभव भी है और उसी अनुभव का परिणाम उनकी महासुवी बोली में लिखित यह पुस्तक भी है। पुस्तक इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसे माहसुवी बोली में रचा गया है, जबकि आज के आधुनिकीकरण और बाजार ने हमारी बोलियों को लील लिया है, जिनको बचाया जाना अति आवश्यक है। इस दिशा में उमा ठाकुर का प्रयास सराहनीय है। पुस्तक में  इतिहास, संस्कृति और लोक जीवन को समर्पित चौदह अध्याय हैं जिनसे आप महासुवी के प्राचीन और वर्तमान स्वरूप को समझ सकते हैं। अर्थ विजन पब्लिकेशन गुरुग्राम से प्रकाशित इस पुस्तक का विश्व पुस्तक मेले के दौरान हाल ही में हिमाचल कला भाषा अकादमी के कार्यक्रम में लोकार्पण भी हो चुका है। उमा को इस कृति के लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। 

-एसआर हरनोट, साहित्यकार