Tuesday, March 31, 2020 08:09 PM

नई पेंशन कर्मचारियों से छलावा

एनपीएस कर्मचारी महासंघ ने सरकार पर जड़ा आरोप; कहा, मात्र 500 से 1500 में कैसे कटेगा बुढ़ापा

मंडी - पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर हिमाचल प्रदेश सहित देश भर में एनपीएस कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारी संघर्षरत हैं, लेकिन केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया है। इसके चलते कर्मचारी वर्ग में अब आक्रोश बढ़ने लगा है। पुरानी पेंशन योजना किसी कर्मचारी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि सरकार द्वारा जो नई पेंशन स्कीम के नाम पर कर्मचारियों को पेंशन दी जा रही है, वह 500 से 1500 रुपए तक दी जा रही है, जो कि कर्मचारी वर्ग के साथ सरासर अन्याय है। कर्मचारियों का कहना है कि इतने कम पैसे में कर्मचारियों को बुढ़ापे में जीवन यापन करना बहुत मुश्किल है। हिमाचल प्रदेश एनपीएस कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश के कर्मचारी, जो 2003 के बाद सरकारी सेवा में आए हैं, उन्हें पेंशन से वंचित रखा गया है और सरकार द्वारा जो अंशदायी पेंशन 2003 के बाद के कर्मचारियों को दी जा रही है, वह पेंशन के नाम पर एक धोखा है। ये पैसे जो सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मिल रहे हैं, वे कर्मचारियों की सेवा के दौरान जमा पैसे का ब्याज मात्र है। प्रदीप ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ वर्ष 2015 से प्रदेश स्तर पर काम कर रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर एनएमओपीएस का सहयोगी संगठन है, जो पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर कर्मचारियों को एकजुट कर संघर्षरत है। महासंघ का कहना है कि जब तक कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिल जाती, तब तक महासंघ कर्मचारियों को एकजुट कर संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि संगठन को पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की भावनाओं को ध्यान में रखेंगे। अगर सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जाती है, तो सरकार को कर्मचारियों का रोष सहना पड़ सकता है।

कर्मियों के पैसे का ही दिया जा रहा ब्याज

महासंघ का कहना है कि वर्तमान समय में भारत सरकार व राज्य सरकारों द्वारा नई पेंशन स्कीम के नाम पर सरकार द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। जहां एक तरफ  कर्मचारियों को उनके पैसे का ब्याज मात्र दिया जा रहा है, वहीं खुद सरकार में बैठे लोग दो से तीन पेंशन ले रहे हैं। यदि कर्मचारी और समाज के नागरिक टैक्स दे रहे हैं और सरकार सभी से टैक्स ले रही है, तो सरकार को अपने नागरिकों व कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी लेनी चाहिए, न कि बुढ़ापे में उन्हें ठोकरें खाने पर मजबूर करें।