Monday, November 18, 2019 04:05 AM

नशा करे बर्बाद

राजेश कुमार चौहान

देश के विकास में युवा वर्ग का सबसे बड़ा योगदान होता है। स्वस्थ और तंदरुस्त युवा देश के विकास को रफ्तार दे सकते हैं, लेकिन बहुत अफसोस की बात है कि आज भारत के कुछ युवा नशे के आदी होकर अपनी जिंदगी को नरक बना रहे हैं। नशा, नाश का दूसरा नाम है। जिसने भी नशे का दामन एक बार पकड़ लिया उसे नशा मौत के मुंह तक ले जाता है, साथ ही उसके घर-परिवार का भी कई बार नाश कर देता है। मां-बाप अपने बच्चों को लाड़ प्यार से पाल कर उनके भविष्य के लिए सुनहरी सपने संजोते हैं, लेकिन जब कोई बच्चा बचपन या जवानी की दहलीज पर पांव रखते ही नशे के दलदल में धंसना शुरू होकर अपनी जिंदगी बर्बाद करने लगता है तो मां-बाप के सपने उसी समय चकनाचूर हो जाते हैं। नशे के कारण आज तक पता नहीं कितने ही घर बर्बाद हो गए और बहुत से नौजवान जवानी में ही कई बीमारियों के शिकार तो कुछ मौत के मुंह में चले गए। माना कि सरकार का नशे के प्रति ढुलमुल रवैया नशे पर नकेल कसने पर फेल है, लेकिन लोग खुद तो समझदारी से काम लेकर इसके मकडजाल में न फंसें और अपने बच्चों पर भी कड़ी नजर रखें। अगर बच्चों को बचपन से ही नशे से दूर रहने और इसके दुष्परिणामों के प्रति अवगत करवाया जाए तो जिंदगी के किसी भी मोड़ पर वे नशे के आदी नहीं होंगे। अंत में यही कहना उचित होगा कि जो लोग नशे के चंगुल में फंस चुके हैं या फंसने जा रहे हैं उन्हें एक ही बात याद रखनी चाहिए कि नशा नाश का दूसरा नाम है।