Monday, November 19, 2018 12:28 AM

नशे के चंगुल में फंसते हिमाचली युवा

कर्म सिंह ठाकुर

लेखक, मंडी से हैं

नशा आजाद परिंदे की तरह हिमाचल में भी अपने पंख फैलाता हुआ आगे बढ़ रहा है। नशे के शिकार युवाओं की बात करें, तो वर्ष 2016 में प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक राज्य के करीब 40 फीसदी युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं। अत: सरकार व लोगों को मिलकर इसके खिलाफ लडऩा होगा...

आज देवभूमि हिमाचल प्रदेश के युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं। राज्य के कई हिस्सों में बड़ी मात्रा में अफीम, भांग, चरस, कोकीन भुक्की, चिट्टा जैसे नशीले पदार्थों के बरामद होने से हिमाचल भी हर रोज सुर्खियों में बना है।  हिमाचल प्रदेश के विभिन्न राज्यों में युवा वर्ग नशा तस्करों के जाल में फंसता जा रहा है। बीते सप्ताह शिमला तथा कुल्लू में चिट्टा के दो नाइजीरियन एवं स्थानीय तस्करों की गिरफ्तारी हुई है। इसके अतिरिक्त पंजाब के नशा तस्कर हिमाचल में भी सक्रिय हैं। पिछले 6 महीनों में 36 महिलाओं तथा 6 विदेशियों सहित नशा तस्करी के 653 मामलों में 832 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिमाचल प्रदेश में तंबाकू, गुटखा, बीड़ी व सिगरेट पर पाबंदी है, लेकिन फिर भी हिमाचल प्रदेश में सभी नशीले पदार्थ युवाओं को उपलब्ध हो रहे हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि पंजाब से सटे हिमाचल के क्षेत्रों में स्कूल और कालेज के छात्रों को सिगरेट, गुटखा, खैनी और शराब के साथ-साथ नशीले कैप्सूल, जूतों की पॉलिश, व्हाइटनर, चरस, हेरोइन, अफीम तथा खांसी के सिरप मुहैया करवाया जाते हैं, जिनके कारण युवा वर्ग नशे की लत के शिकार हो रहे हैं। कांगड़ा, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, चंबा तथा शिमला में भी नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। अक्तूूबर, 2017 में डीजीपी द्वारा हाई कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक कुल्लू, मंडी, चंबा, शिमला, सिरमौर के 400 गांवों को अफीम की गैर क ानूनी खेती के कारण प्रभावित बताया गया था।

प्रदेश में नशाखोरी को बढ़ाने के लिए पर्यटकों तथा होटल व्यवसायियों का भी प्रमुख योगदान रहता है। अकसर बाहरी राज्यों के पर्यटक हिमाचल में मौज-मस्ती करने आते हैं। इस मौज-मस्ती में नशा और शबाब का तडक़ा लगाया जाता है। जो होटल व्यापारी पर्यटकों को नशा तथा शबाब के दम पर अपने होटल में ठहरने के लिए लालायित करते हैं, वही नशाखोरी के असली गुनहगार हैं। दरअसल बाहरी राज्यों के पर्यटक इन होटल व्यवसायियों के जाल में आसानी से आ जाते हैं तथा खूब पैसा लुटाकर मौज-मस्ती करते हैं। ऐसी घटनाएं प्रदेश के बहुत से होटलों में देखी जा सकती हैं।

अगर प्रदेश की शांति, स्वास्थ्यवर्धक वातावरण व ईमानदार जीवन शैली नशाखोरी की भूमि बन गई है, तो प्रदेश में युवा शक्ति अपना संयम खो देगी, जिसका खामियाजा प्रदेश को भुगतना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश में नशे की जड़ को खोजना अति आवश्यक हो गया है। बाहरी राज्यों के नशा तस्कर हिमाचली युवाओं को नशे की लत लगाने की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। यदि प्रदेश सरकार सजग तथा सख्त नहीं हुई, तो आने वाली युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होगा। नशे के शिकार युवाओं की बात करें, तो वर्ष 2016 में प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक राज्य के करीब 40 फीसदी युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं। स्थिति की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य में नशे के व्यापारियों के विरुद्ध पुलिस एवं गुप्तचर एजेंसियों को हाई अलर्ट जारी करके सजग रहने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त नशे की तस्करी से निपटने के लिए शिमला-कांगड़ा व कुल्लू में तीन नारकोटिक्स कंट्रोल यूनिट स्थापित किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रचलन को देखते हुए, प्रदेश सरकार ने पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है, ताकि बच्चों में नशे के सिंपटम्स का पता लगाकर तथा उनके अभिभावकों को सूचित किया जा सके। यह सरकार की अच्छी पहल है, लेकिन इस तरह के छोटे प्रयासों से कुछ नहीं होगा। जिस तरह से पिछले करीब 2-3 वर्षों में समाचार पत्रों के माध्यम से हमें नशा-नशाखोरी के समाचार प्राप्त हुए हैं, उनके आधार पर यह आकलन निकाला जा सकता है कि प्रदेश सरकार को नशे के व्यापारियों पर सख्ती से नकेल कसनी होगी। युवा वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत करवाने के लिए शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों का सहयोग लेकर विशेष जागरूकता अभियान छेडऩा होगा। बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए कांगड़ा पुलिस द्वारा एक सराहनीय निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत नशे की ओवरडोज से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और इसकी पुष्टि हो जाए, तो नशा बेचने वाले के खिलाफ पुलिस 302 यानी हत्या का मामला दर्ज करेगी। इसके लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे और क्षेत्र के लोगों की सहायता लेगी। इस तरह के कठोर निर्णय से ही नशे की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।

नशा समाज की एक ऐसी बुराई है जो कुछ पलों का आनंद लेने के लिए युवाओं को ताउम्र के घाव दे देती है। आज का युवा शारीरिक क्रियाओं से कतराता है। उसका जीवनचक्र घर के बेडरूम तथा स्मार्टफोन तक ही सीमित हो गया है। अभिभावक वर्ग भी बच्चों को स्मार्टफोन तथा इंटरनेट की खुली आजादी देते हैं, जिसके दुरुपयोग के कारण आज का युवा नशे और अन्य सामाजिक कुरीतियों का शिकार हो रहा है। इस संदर्भ में अभिभावक वर्ग को भी सजग रहना होगा, ताकि उनके घर का चिराग नशे की प्रवृत्ति से बच सके। आज का युवा लक्ष्यहीन बनकर कई नशों की लत में फंसता जा रहा है। यदि युवा पीढ़ी अपने भविष्य को नशे के जाल में कलंकित करती रही, तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में उसे अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ेगा।